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Patna Science City: जहां बच्चे खुद वैज्ञानिक बन जाते हैं, रॉकेट उड़ाते हैं और विज्ञान मुस्कुराता है

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का यह ड्रीम सिटी शिक्षा और पर्यटन दोनों को नई ऊंचाईयां दे रहा है। यही कारण है कि पटना साइंस सिटी में विज्ञान का अनोखा संगम देखने के लिए देश-विदेश से सैलानी आ रहे हैं। तो आप भी यहां आकर इस जादू को खुद महसूस करिए।

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डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी
© social media
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

Patna Science City: किताबों के पन्नों से निकलकर विज्ञान अगर छूने लायक हो जाए तो क्या कहना। बिहार की राजधानी पटना में डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी ने यह सच कर दिखाया है। 21 एकड़ में बने इस अनोखे केंद्र पर बच्चे खेलते-कूदते गुरुत्वाकर्षण जैसे जटिल विज्ञान के सिद्धांतो को समझते हैं। रॉकेट लॉन्च करते हैं और रोबोट को कमान देते हैं। 21 एकड़ के भूखंड पर बना साइंस सिटी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट है।


जिसका उद्घाटन नए साल पर हुआ और बिहार का नया गौरव बन चुका है। हाल ही में नीतीश कुमार ने इसका निरीक्षण किया। जहां विभिन्न गैलरी का दौरा कर उन्होंने कहा कि साइंस सिटी बहुत अद्भुत बना है। छात्र-छात्राएं यहां विज्ञान के मूल सिद्धांत को सरलता से समझेंगे और विज्ञान में उनकी दिलचस्पी  बढ़ेगी।


चार गैलरियां, 243 विज्ञान के चमत्कार

साइंस सिटी की रीढ़ इसकी चार थीम गैलरी है, जहां शरीर और मन, अंतरिक्ष, खगोल विज्ञान, बुनियादी विज्ञान और सतत ग्रह जिनमें 243 इंटरैक्टिव और वास्तविक प्रदर्शन शामिल हैं। बच्चे बटन दबाते हैं, लीवर घूमाते हैं और विज्ञान जीवंत होता है। उदाहरण के तौर पर एक कोने में साइकिल चलाकर बिजली बनाया जाता है। दूसरे कोने में पानी व हवा की ताकत महसूस कर सकते हैं। स्पेस गैलरी में चंद्रयान व मंगलयान के सिमुलेशन से रॉकेट लॉन्च का रोमांच पैदा होता है। सतत ग्रह की विशालकाय दूनिया से लेकर जलवायु परिवर्तन और समुद्री जीवों की मायावी दुनिया से रूबरू होने का मौका मिलता है। 


रोबोटिक जोन में ए-आई का जादू, जिससे बच्चे खुद वैज्ञानिक बन जाते हैं। इसके साथ ही प्रवेश के लिए एक भव्य एट्रियम लॉबी, ओरिएंटेशन थिएटर, बहुउद्देशीय हॉल, अस्थाई प्रदर्शनी हॉल, 500 सीटों वाला सभागार, 300 सीटों वाला कैफेटेरिया, 4डी थिएटर रिटेल स्पेस, जैव विविधता पार्क आदि बहुत कुछ है जो पर्यटकों को इसके आकर्षण से मंत्रमुग्ध कर देगी। इसके अलावा चार शिक्षक कक्ष, मार्कर स्पेस, विशाल डेटा सेंटर, डेमो किचन और पहली मंजिल पर एक जिम जो अध्ययन यात्रा या भ्रमण के दौरान आने वाले बच्चों के लिए है। साथ ही छात्रावास में शिक्षक कक्षाओं से जुड़े 250 छात्रों के रहने की व्यवस्था का भी ध्यान रखा गया है।


बटन दबाइए, विज्ञान समझिए

साइंस सिटी आने वाले पर्यटक बताते हैं कि यहां आकर महसूस होता है कि विज्ञान अब बोरिंग नहीं, सुपर फैन है। यहां आने वाले बच्चे भी बेहद उत्साहित दिखते हैं, कहते हैं कि रॉकेट उड़ाना उनका सपना था, जो यहां आकर सच हो गया। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह साइंस सिटी लोगों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करेगा, बिहार को नवाचार विकसित करेगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का यह ड्रीम सिटी शिक्षा और पर्यटन दोनों को नई ऊंचाईयां दे रहा है। यही कारण है कि पटना साइंस सिटी में विज्ञान का अनोखा संगम देखने के लिए देश-विदेश से सैलानी आ रहे हैं। तो आप भी यहां आकर इस जादू को खुद महसूस करिए। जहां सीखना उतना ही रोमांचक है, जितना सपने बुनना।

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