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डिप्टी सीएम विजय चौधरी के करीबी की जमीन बचाने के लिए पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का रूट बदला? समस्तीपुर में बड़ा विवाद

Patna Purnia Greenfield Expressway: पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के रूट बदलाव को लेकर समस्तीपुर में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों ने राजनीतिक दबाव में रूट बदलने और कई घर, दुकान व कॉलेज प्रभावित होने के आरोप लगाए हैं।

Patna Purnia Greenfield Expressway
प्रतिकात्मक तस्वीर
© Google
Mukesh Srivastava
8 मिनट

SAMASTIPUR:  केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना और बिहार के पहले एक्सप्रेसवे पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे  को लेकर बिहार के समस्तीपुर जिले के सरायरंजन प्रखंड में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि एक्सप्रेसवे के मूल रूट में मनमाने और राजनीतिक दबाव में बदलाव किया गया है। 


65 साल पुराना कॉलेज होगा ध्वस्त

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि बदला हुआ रूट लागू हुआ तो 150 से अधिक घरों, दर्जनों दुकानों और 65 साल पुराने केदार संत रामाश्रय कॉलेज का हिस्सा तोड़ा जा सकता है। इस कॉलेज में 6 हजार से अधिक छात्र पढ़ते हैं।


डिप्टी सीएम विजय चौधरी पर आरोप

एक अंग्रेजी अखबार ने इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित किया है. इस रिपोर्ट के मुताबिक शिकायतकर्ताओं ने अपने पत्र में किसी का नाम नहीं लिखा है, लेकिन सरायरंजन के जदयू विधायक और बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि उन्होंने अपने एक करीबी और दूर के रिश्तेदार को फायदा पहुंचाने के लिए रूट बदलवाया। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, विनीत ईश्वर उर्फ बॉबी ईश्वर और उनके परिवार की लगभग 10.5 बीघा जमीन मूल रूट में आ रही थी।


हालांकि इस मामले पर विजय कुमार चौधरी ने उस अखबार को कहा कि उन्होंने किसी तरह का राजनीतिक दबाव नहीं बनाया है। उन्होंने कहा, “सरायरंजन के सभी लोग मेरे अपने हैं। रूट बदला गया है या नहीं, यह एनएचएआई बताएगा। यह मेरा विषय नहीं है।”


वहीं बॉबी ईश्वर ने भी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बदले हुए प्रस्तावित रूट में उनकी भी लगभग 6 बीघा जमीन प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा, “अगर प्रभाव का इस्तेमाल हुआ होता तो मैं अपनी यह जमीन भी बचा लेता।”


सीएम ने दिलाया कार्रवाई का भरोसा

इस विवाद के बीच बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और एनएचएआई अधिकारियों ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है। अखबार को मुख्यमंत्री ने बताया कि यह केंद्र सरकार की परियोजना है, लेकिन रूट तय करने में राज्य सरकार की भूमिका होती है। लोगों की चिंताओं को देखते हुए मामले की जांच कराई जाएगी।


NHAI की दलील

एनएचएआई के बिहार रीजनल ऑफिसर एन एल योटकर ने कहा कि नियमों के अनुसार एक बार अधिसूचित रूट में बदलाव नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि मूल रूट बदला गया है तो यह गंभीर मामला है। छपरा के एनएचएआई प्रोजेक्ट डायरेक्टर राजू कुमार ने भी कहा कि एक बार रूट फाइनल हो जाने के बाद उसमें बदलाव संभव नहीं होता।


केंद्रीय मंत्री ने कार्रवाई का भरोसा दिलाया

उजियारपुर से सांसद और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने भी माना कि उन्हें इस विवाद की जानकारी है। उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के समक्ष उठा चुके हैं और कोशिश कर रहे हैं कि एनएचएआई को मूल रूट बहाल करने का निर्देश दिया जाए ताकि आबादी वाले इलाकों को बचाया जा सके।


स्थानीय लोगों का डिप्टी सीएम पर गंभीर आरोप

स्थानीय लोगों का कहना है कि मई 2025 में विजय कुमार चौधरी ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि किसी की बस्ती नहीं उजड़ेगी। 8 मई 2025 को किए गए एक फेसबुक पोस्ट में विजय कुमार चौधरी ने लिखा था कि उन्होंने प्रभावित लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनी हैं और सभी मुद्दों का संवेदनशील तरीके से समाधान किया जाएगा।


लोगों का आरोप है कि उस समय तीसरे वैकल्पिक रूट का प्रस्ताव देने की बात कही गई थी, लेकिन ऐसा कोई प्रस्ताव कभी एनएचएआई को नहीं भेजा गया। बीते दो महीनों में जब जमीन सर्वेक्षण शुरू हुआ तब लोगों को पता चला कि बदले हुए रूट पर काम आगे बढ़ाया जा रहा है। फिलहाल परियोजना भूमि अधिग्रहण से पहले के चरण में है।


बिहार का पहला एक्सप्रेसवे

पटना से पूर्णिया के बीच यह छह लेन वाला ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे लगभग 244.93 किलोमीटर लंबा होगा और इसकी अनुमानित लागत 18 हजार करोड़ रुपये है। यह एक्सप्रेसवे वैशाली, समस्तीपुर और मधेपुरा होते हुए पूर्णिया तक जाएगा। परियोजना के तहत 90 मीटर चौड़ा कॉरिडोर बनाया जाएगा, जिसमें 21 बड़े पुल, 140 छोटे पुल और 9 रेलवे ओवरब्रिज होंगे। इसके बनने के बाद पटना से पूर्णिया की यात्रा का समय 8 घंटे से घटकर लगभग 4 घंटे रह जाएगा।


अचानक से बदल गया रूट

स्थानीय निवासियों का कहना है कि एनएचएआई के शुरुआती सर्वे में रूट धनहर चौर जैसे कम आबादी वाले इलाके से गुजर रहा था और किसानों ने भी इसका विरोध नहीं किया था। लेकिन बाद में राजनीतिक दबाव में रूट को मोड़कर घनी आबादी वाले इलाकों की तरफ कर दिया गया।


कॉलेज की मुख्य इमारत टूटेगी

लोगों के मुताबिक, नए रूट के लागू होने पर सरायरंजन बाजार, कंकालीपुर और झाखड़ा में 150 से ज्यादा घर और कई दुकानें टूट सकती हैं। एनएचएआई दस्तावेजों के अनुसार, झाखड़ा स्थित केदार संत रामाश्रय कॉलेज की मुख्य इमारत का हिस्सा भी प्रभावित हो सकता है।


ऐसे बदल गया एक्सप्रेसवे का रूट

दस्तावेजों के मुताबिक, 13 मार्च 2025 को जारी पहली गजट अधिसूचना में एक्सप्रेसवे का रूट झाखड़ा, सुरमार और वाजिदपुर मेयारी गांवों से होकर गुजर रहा था। इसके बाद 26 मार्च 2025 की दूसरी अधिसूचना में कबरा और करिहारा इलाके का उल्लेख किया गया। लेकिन 6 मार्च 2026 की तीसरी गजट अधिसूचना में 48 से 53 किलोमीटर के बीच रूट में बदलाव कर दिया  गया।


नई अधिसूचना में हरलोचनपुर के 17 प्लॉट, भगवतपुर के 28, सरायरंजन के 32 और झाखड़ा गांव के 160 प्लॉट प्रभावित बताए गए हैं। कुल 237 प्लॉट में से 224 निजी जमीनें हैं, जिनमें डिग्री कॉलेज भी शामिल है।


बीजेपी नेता भी कर रहे विरोध

इस बदलाव के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व कर रहे भाजपा नेता रंजीत निर्गुणी ने कहा कि नई गजट अधिसूचना में स्पष्ट रूप से रूट में बदलाव दिख रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां पहले केवल कुछ घर प्रभावित हो रहे थे, वहीं अब लगभग 150 घर और दुकानें टूटने की स्थिति में हैं।


स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने गडकरी को लिखा पत्र

सरायरंजन नगर पंचायत की मुख्य पार्षद पूजा कुमारी ने भी पिछले साल जुलाई में नितिन गडकरी को पत्र लिखकर विरोध दर्ज कराया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि रूट बदला गया तो कॉलेज समेत कई घर और दुकानें टूट जाएंगी।


ब्राह्मण परिवारों पर संकट

सरायरंजन के ब्राह्मण बहुल इलाकों में रहने वाले कई परिवारों पर भी संकट मंडरा रहा है। स्थानीय निवासी सुशील झा ने कहा कि उनका आठ कट्ठा में बना घर टूट सकता है और आसपास कम से कम 15 अन्य घर भी प्रभावित होंगे।


विजय चौधरी के खिलाफ गुस्सा

केदार संत रामाश्रय कॉलेज निर्माण के लिए 8 एकड़ जमीन दान करने वाले परमानंद ईश्वर ने कहा कि वे कॉलेज को टूटने नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि हम बदले हुए रूट को स्वीकार नहीं करेंगे। हमारे विधायक को इसका जवाब देना चाहिए। कॉलेज के प्राचार्य बिपिन झा ने कहा कि कॉलेज में करीब 6 हजार छात्र नामांकित हैं और निकटतम डिग्री कॉलेज दलसिंहसराय में है, जो यहां से 20 किलोमीटर दूर है।


विरोध के बावजूद काम जारी

विरोध के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। रिकॉर्ड बताते हैं कि समस्तीपुर जिला निबंधन कार्यालय ने प्रभावित क्षेत्रों के लिए न्यूनतम मूल्यांकन दरें बढ़ा दी हैं। वहीं सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने समस्तीपुर जिले में 64.7 किलोमीटर लंबे हिस्से के लिए भूमि अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया शुरू करने हेतु केंद्रीय गजट अधिसूचना जारी कर दी है।

ब्यूरो रिपोर्ट, फर्स्ट बिहार/झारखंड

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FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता