1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sat, 03 Jan 2026 08:36:36 PM IST
विभाग ने जारी किया पत्र - फ़ोटो social media
PATNA: बिहार में भूमि से संबंधित मामलों में हो रहे खेल को रोकने में लगे डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने फिर से बड़ा आदेश जारी किया है. विजय कुमार सिन्हा ने कहा है कि जमीन से संबंधित मामलों में अगर किसी ने गलत या फर्जी दस्तावेज दिया तो उसे जेल भेजने का बंदोबस्त कर दिया जाये. डिप्टी सीएम ने कहा है कि भूमि से संबंधित मामलों में जाली और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खेल अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
एफआईआर दर्ज कर जेल भेजो
डिप्टी सीएम ने निर्देश जारी किया है कि जमीन के नामांतरण, दाखिल–खारिज या सरकारी जमीन के मामलों में अगर कहीं फर्जी कागजात सामने आता हो वैसे कागजात को जमा करने वाले व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई अनिवार्य रूप से करनी होगी. अब तक प्रावधान था कि फर्जी या गलत कागज पाये जाने पर आवेदन या दावा को खारिज कर दिया जाता था.
सीओ खुद दर्ज करायें एफआईआर
विजय सिन्हा ने अपने आदेश में कहा है कि ऐसे मामलों में अंचलाधिकारी स्वयं प्राथमिकी दर्ज कराएंगे, अगर उन्होंने फर्जी कागजात के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बरता या वैसे व्यक्ति को संरक्षण दिया तो ये गंभीर गड़बड़ी मानी जायेगी.
विभाग ने जारी किया पत्र
डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा के आदेश के बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव गोपाल मीणा ने सभी अंचलाधिकारियों को पत्र लिखा है. इसमें कहा गया है कि भू-राजस्व के किसी मामले में जाली, फर्जी या गलत दस्तावेज पेश किया जाता है तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 के प्रावधानों के तहत स्थानीय थाना में अनिवार्य रूप से प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई जाए.
जन कल्याण संवाद से मिले फीडबैक पर कार्रवाई
यह निर्देश उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा की पहल पर चल रहे भूमि सुधार जन कल्याण संवाद के दौरान प्रमंडलीय मुख्यालयों में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रमों में सामने आए तथ्यों के बाद जारी किया गया है। विभाग के अनुसार जमीन के मालिकाना हक में नामांतरण, दाखिल-खारिज, परिमार्जन प्लस, बंदोबस्ती, सीमांकन, भू-अर्जन तथा सार्वजनिक भूमि से जुड़े मामलों में कई बार फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत कर प्रशासन को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है, जो गंभीर आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है.
सचिव ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया है कि पूर्व की समीक्षात्मक बैठकों में ऐसे मामले सामने आने के बावजूद कई स्थानों पर अंचल स्तर से प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई, जिसे गंभीर लापरवाही माना गया है. विभाग के आदेश में कहा गया है कि सरकारी भूमि से जुड़े मामलों में संबंधित अंचलाधिकारी स्वयं स्थानीय थाना में प्राथमिकी दर्ज कराएंगे.
निजी या रैयती भूमि के विवाद में जांचोपरांत अंचलाधिकारी या राजस्व पदाधिकारी की अनुशंसा पर परिवादी के आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी. इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि जाली दस्तावेज के आधार पर कोई आदेश पारित नहीं किया जाए। यदि पूर्व में ऐसा कोई आदेश पारित हो चुका है, तो उसकी विधि-सम्मत समीक्षा कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
ऐसे मामलों में प्राथमिकी दर्ज नहीं कराना या मामले को दबाने का प्रयास कर्तव्य में घोर लापरवाही और कदाचार माना जाएगा। इसके लिए संबंधित अंचलाधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेवार होंगे. विभाग ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, समाहर्त्ताओं, वरीय पुलिस अधीक्षकों, पुलिस अधीक्षकों और भूमि सुधार उप समाहर्त्ताओं को भी इस आदेश की प्रतिलिपि भेजते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है.