Bihar Assembly News : बैठक में सीनियर अफसरों की गैरहाज़िरी पर हथ्थे से उखड़ गए विधानसभा अध्यक्ष, ऑफिसर को दे दी सख्त चेतावनी

बजट सत्र के दौरान छात्र से जुड़े एक अहम मुद्दे पर बुलाई गई बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थिति को लेकर विधानसभा अध्यक्ष ने कड़ी नाराज़गी जाहिर की है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sat, 31 Jan 2026 07:24:33 AM IST

Bihar Assembly News : बैठक में सीनियर अफसरों की गैरहाज़िरी पर हथ्थे से उखड़ गए विधानसभा अध्यक्ष, ऑफिसर को दे दी सख्त चेतावनी

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Bihar Assembly News : बिहार विधानसभा बजट सत्र शुरू होने के पहले बीते शाम एक अहम बैठक बुलाई गई। लेकिन इस बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थिति को लेकर विधानसभा अध्यक्ष खासे नाराज़ नजर आए। बैठक में सीनियर स्तर के पदाधिकारियों के मौजूद नहीं रहने पर अध्यक्ष ने कड़ी आपत्ति जताते हुए नाराज़गी जाहिर की और भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न करने की सख्त चेतावनी दी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आगे से इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना कार्यशैली को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


विधानसभा अध्यक्ष ने बैठक के दौरान कहा कि विधानमंडल की समितियों और महत्वपूर्ण बैठकों को हल्के में लेना बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने निर्देश दिया कि भविष्य में विधानसभा की सभी समितियों की बैठकों में अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव या सचिव स्तर के अधिकारी की उपस्थिति अनिवार्य होगी। अध्यक्ष ने दो टूक कहा कि किसी भी विभाग की ओर से जूनियर या अनधिकृत अधिकारी को भेजना अब स्वीकार नहीं किया जाएगा।


अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि विधानमंडल की समितियाँ लोकतंत्र का अहम हिस्सा हैं और इनके माध्यम से जनहित से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा होती है। ऐसे में वरिष्ठ अधिकारियों की गैरमौजूदगी न सिर्फ व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि सदन की गरिमा को भी ठेस पहुंचाती है। उन्होंने कहा कि अधिकारी यह समझें कि समिति की बैठक कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने का संवैधानिक मंच है।


इस दौरान संसदीय कार्य विभाग के मंत्री विजय चौधरी ने सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट करते हुए भरोसा दिलाया कि सरकार विधानमंडल के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को लेकर पूरी तरह गंभीर और प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार का यह प्रयास रहता है कि सभी विभाग सदन और समितियों के कार्यों में सक्रिय सहयोग करें।


विजय चौधरी ने विभिन्न विभागों द्वारा प्रतिनियुक्त किए गए नोडल पदाधिकारियों को भी निर्देश दिया कि वे अपने दायित्वों को गंभीरता से निभाएं। उन्होंने कहा कि कई बार लापरवाही या संवाद की कमी के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है, जिसे भविष्य में टालने की जरूरत है।


मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन अधिकारियों ने किसी अपरिहार्य कारण से बैठक में हिस्सा नहीं लिया, उनके द्वारा संबंधित विभाग के योग्य और सक्षम अधिकारी को विधिवत प्राधिकृत कर बैठक में भेजा गया था। हालांकि, उन्होंने माना कि इस तरह की महत्वपूर्ण बैठकों में वरिष्ठ स्तर की उपस्थिति अधिक प्रभावी और आवश्यक होती है।


विजय चौधरी ने आगे कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में किसी विशेष परिस्थिति को छोड़कर इस तरह की अहम बैठकों में वरिष्ठ अधिकारी स्वयं उपस्थित रहें। उन्होंने कहा कि विधानसभा की समितियों की बैठकों में भी प्रमुख सचिव, प्रधान सचिव या सचिव स्तर के अधिकारी की उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी, ताकि विषयों पर गंभीर और सार्थक चर्चा हो सके।


इस पूरे घटनाक्रम के बाद स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि अब विधानसभा अध्यक्ष और सरकार दोनों ही विधानमंडल की बैठकों और समितियों की कार्यप्रणाली को लेकर सख्त रुख अपनाने के मूड में हैं। माना जा रहा है कि इस चेतावनी के बाद भविष्य में अधिकारियों की लापरवाही पर लगाम लगेगी और विधानमंडल की कार्यवाही अधिक प्रभावी और जिम्मेदार बनेगी।