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Bihar Expressway News : वाराणसी से कोलकाता तक का सफर होगा आसान, लेकिन अभी क्यों रुका काम? जानिए पूरी वजह

वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे के चौथे पैकेज को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। केंद्र सरकार ने नए सिरे से प्रस्ताव मांगा है, जिसमें मेंटेनेंस प्लान भी शामिल होगा।

Bihar Expressway News : वाराणसी से कोलकाता तक का सफर होगा आसान, लेकिन अभी क्यों रुका काम? जानिए पूरी वजह
Tejpratap
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Bihar Expressway News : बिहार में बुनियादी ढांचे को मजबूती देने वाली महत्वाकांक्षी परियोजना वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे को लेकर एक अहम अपडेट सामने आया है। इस एक्सप्रेसवे के चौथे पैकेज की मंजूरी फिलहाल अटक गई है, क्योंकि केंद्र सरकार ने नए सिरे से विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा है। खास बात यह है कि इस बार केवल सड़क निर्माण ही नहीं, बल्कि ऑपरेशन और मेंटेनेंस (O&M) की पूरी योजना और उसकी लागत का ब्योरा भी मांगा गया है।


क्यों मांगा गया नया प्रस्ताव?

सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार इस परियोजना की गुणवत्ता को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए गंभीर है। अक्सर देखा गया है कि सड़क बनने के बाद उसकी देखरेख में कमी आ जाती है, जिससे कुछ वर्षों में ही सड़क की हालत खराब होने लगती है। इसी को ध्यान में रखते हुए अब सरकार चाहती है कि निर्माण एजेंसी पहले से ही मेंटेनेंस की पूरी रणनीति और खर्च का स्पष्ट विवरण दे।


नया प्रस्ताव तैयार होने के बाद ही इसे केंद्रीय वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग के सचिव की अध्यक्षता में गठित पीपीपीएसी (Public Private Partnership Appraisal Committee) के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही चौथे पैकेज पर आगे काम शुरू हो सकेगा।


किन जिलों से गुजरेगा चौथा फेज?

बिहार में इस एक्सप्रेसवे का चौथा फेज करीब 41 किलोमीटर लंबा होगा। यह हिस्सा रोहतास और कैमूर जिलों से होकर गुजरेगा। इस रूट को रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह क्षेत्र उत्तर प्रदेश और झारखंड के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा।


इस फेज का निर्माण हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) के तहत किया जाएगा। इसके तहत निर्माण एजेंसी कुल लागत का 60 प्रतिशत हिस्सा खुद वहन करेगी, जबकि शेष 40 प्रतिशत सरकार देगी। एजेंसी को अपनी लागत की वसूली टोल के जरिए करने की अनुमति होगी।


बिहार में कुल लंबाई और रूट

पूरे एक्सप्रेसवे का बिहार में करीब 159 किलोमीटर हिस्सा पड़ेगा। यह सड़क राज्य के चार प्रमुख जिलों—रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद और गया—से होकर गुजरेगी। फिलहाल रोहतास जिले में निर्माण कार्य जारी है, जबकि कैमूर जिले में भी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अन्य जिलों में भूमि अधिग्रहण और प्रारंभिक कार्य तेजी से आगे बढ़ाए जा रहे हैं।


13 फेज में होगा पूरा निर्माण

वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे का निर्माण कुल 13 फेज में किया जाना है। इस परियोजना की कुल लंबाई लगभग 610 किलोमीटर होगी। यह सिक्सलेन एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के वाराणसी से शुरू होकर बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को आपस में जोड़ेगा। सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को साल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इसके पूरा होने के बाद पूर्वी भारत में आवागमन बेहद आसान और तेज हो जाएगा।


आर्थिक विकास को मिलेगा बढ़ावा

इस एक्सप्रेसवे के निर्माण से न केवल यात्रा का समय घटेगा, बल्कि औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। खासकर बिहार और झारखंड के पिछड़े इलाकों में निवेश बढ़ने की संभावना है।कुल मिलाकर, चौथे पैकेज के लिए नया प्रस्ताव मांगे जाने से परियोजना में थोड़ी देरी जरूर हो सकती है, लेकिन इससे सड़क की गुणवत्ता और दीर्घकालिक मेंटेनेंस सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।