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गंगा में अतिक्रमण को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बिहार को 12 हफ्ते की मोहलत; यूपी समेत कई राज्यों को निर्देश

Bihar News: गंगा नदी के किनारे अतिक्रमण और बाढ़ क्षेत्र में अवैध निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने बिहार समेत संबंधित राज्यों को अतिक्रमण हटाने और नदी के बाढ़ क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

Bihar News
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Mukesh Srivastava
4 मिनट

Bihar News: गंगा नदी के किनारे अतिक्रमण और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अवैध निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने संबंधित राज्यों को नदी के बाढ़ क्षेत्र में मौजूद अनधिकृत निर्माण और अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं। बिहार के मामले में बाढ़ और नदी में भारी जलप्रवाह को देखते हुए अतिक्रमण हटाने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है।



सुप्रीम कोर्ट ने गंगा की स्थिति और नदी के किनारों पर अतिक्रमण को लेकर चिंता जताई। अदालत ने संबंधित प्रशासन को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि गंगा के किनारे अनधिकृत निर्माण और कब्जे न हों तथा पहले से मौजूद अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की जाए। पटना में गंगा के बाढ़ क्षेत्र में अतिक्रमण का मामला पहले से सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है। अदालत के निर्देशों के बाद बिहार सरकार और जिला प्रशासन की ओर से इस क्षेत्र में सर्वे और अतिक्रमण की पहचान का काम भी किया गया है।



बिहार सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि गंगा का जलस्तर बढ़ने और बाढ़ जैसी स्थिति के कारण कुछ इलाकों में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई प्रभावित हुई। इसके बाद अदालत ने बिहार को निर्देशों के अनुपालन के लिए अतिरिक्त समय दिया। हालिया आदेश में अदालत ने अंतिम अवसर के तौर पर आठ सप्ताह का समय दिया था और अनुपालन नहीं होने पर मुख्य सचिव समेत अधिकारियों को तलब करने की चेतावनी दी थी।



सुप्रीम कोर्ट पहले ही पटना में गंगा के बाढ़ क्षेत्र में अनधिकृत संरचनाओं और निर्माण को हटाने के संबंध में निर्देश जारी कर चुका है। अदालत ने नदी के प्राकृतिक प्रवाह को प्रभावित करने वाले निर्माण को लेकर भी चिंता जताई है। इस मामले में बिहार प्रशासन ने गंगा किनारे अतिक्रमण की पहचान के लिए राजस्व रिकॉर्ड और पुराने सर्वे मानचित्रों के आधार पर सर्वे कराया है। पटना में दीघा घाट से नौजर घाट तक के क्षेत्र में भी सर्वे और मापी की प्रक्रिया की गई थी।



गंगा से जुड़े मामलों में अदालत ने नदी के किनारों और बाढ़ क्षेत्रों में अतिक्रमण तथा निर्माण की स्थिति को लेकर संबंधित राज्यों से रिपोर्ट मांगी है। इसका उद्देश्य नदी के बाढ़ क्षेत्र की पहचान, सीमांकन और वहां अनधिकृत निर्माण को नियंत्रित करना है। गंगा की सफाई और नदी के संरक्षण के मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले भी यह स्पष्ट कर चुका है कि केवल अतिक्रमण हटाना पर्याप्त नहीं है। नदी और उसके किनारों को प्रदूषण तथा प्लास्टिक कचरे से बचाने के लिए भी संबंधित अधिकारियों को प्रभावी कदम उठाने होंगे।



मामले से जुड़े केंद्र सरकार के हलफनामे में उत्तराखंड की अलकनंदा और भागीरथी नदी घाटियों में जलविद्युत परियोजनाओं को लेकर सरकार का रुख भी सामने आया है। सरकार ने पहले से स्वीकृत परियोजनाओं के अलावा नई जलविद्युत परियोजनाओं के संबंध में अपनी स्थिति अदालत के समक्ष रखी है। 

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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता