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UPSC success story अंकुर त्रिपाठी-कृतिका मिश्रा बने IAS 'पॉवर कपल', जानिए महाकुंभ में कैसे लगी मोहब्बत की डुबकी?

UPSC success story : मिडिल क्लास परिवार से आने वाली कृतिका ने अपने दूसरे प्रयास में न केवल यूपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल की, बल्कि ऑल इंडिया 66वीं रैंक प्राप्त कर हिंदी माध्यम की टॉपर भी बनीं।

UPSC success story अंकुर त्रिपाठी-कृतिका मिश्रा बने IAS 'पॉवर कपल', जानिए महाकुंभ में कैसे लगी मोहब्बत की डुबकी?
Tejpratap
Tejpratap
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UPSC success story : यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। इसमें सफलता पाना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। और जब बात हिंदी माध्यम की होती है, तो यह चुनौती और भी बढ़ जाती है। कानपुर की कृतिका मिश्रा ने इन चुनौतियों को पार करते हुए साबित कर दिया कि भाषा कभी भी प्रतिभा और काबिलियत के रास्ते में बाधा नहीं बन सकती। मिडिल क्लास परिवार से ताल्लुक रखने वाली कृतिका ने अपने दूसरे प्रयास में न केवल यूपीएससी परीक्षा पास की, बल्कि ऑल इंडिया 66वीं रैंक हासिल कर हिंदी माध्यम की टॉपर भी बनीं।


आईएएस कृतिका मिश्रा की कहानी केवल कठिन मेहनत की नहीं है, बल्कि धैर्य, सही रणनीति और परिवार के सहयोग की भी मिसाल है। कॉलेज लेक्चरर की बेटी होने के नाते कृतिका के घर में हमेशा पढ़ाई का माहौल रहा। लेकिन अंग्रेजी माध्यम के दबदबे के बीच अपनी पहचान बनाना आसान नहीं था। कृतिका की सफलता के पीछे उनकी बेहतरीन तैयारी, खुद पर अटूट विश्वास और परिवार का सहयोग रहा। इन दिनों उनकी सफलता की कहानी के साथ-साथ उनके और आईएएस अंकुर त्रिपाठी की लव स्टोरी भी चर्चित हो रही है।


कृतिका मिश्रा का जन्म कानपुर में हुआ और उनकी शुरुआती पढ़ाई भी यहीं हुई। उनके पिता दिवाकर मिश्रा बिशंभर नाथ सनातन धर्म इंटर कॉलेज, चुन्नीगंज, कानपुर में लेक्चरर हैं। छोटी बहन मुदिता मिश्रा हिंदी साहित्य में पीएचडी कर रही हैं। कृतिका ने कानपुर यूनिवर्सिटी के पंडित पृथ्वी नाथ कॉलेज से हिंदी साहित्य में ग्रेजुएशन किया। सिविल सेवा की राह चुनने पर कई लोगों ने उन्हें अंग्रेजी माध्यम अपनाने की सलाह दी, लेकिन कृतिका ने हिंदी का दामन नहीं छोड़ा।


कृतिका को अपने पहले प्रयास में यूपीएससी परीक्षा में सफलता नहीं मिली थी। लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी कमजोरियों का विश्लेषण किया। इसके बाद उन्होंने मुख्य परीक्षा की उत्तर लेखन शैली पर विशेष ध्यान दिया और हिंदी साहित्य को अपना वैकल्पिक विषय चुना। मेहनत और सही रणनीति के बल पर कृतिका ने यूपीएससी 2022 की परीक्षा में ऑल इंडिया 66वीं रैंक हासिल की और हिंदी माध्यम की टॉपर बनीं।


कृतिका मिश्रा की सफलता जितनी चर्चा में रही, उतनी ही सुर्खियां उनकी और आईएएस अंकुर त्रिपाठी की लव स्टोरी ने भी बटोरीं। दोनों की मुलाकात प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के दौरान हुई थी। इससे पहले दोनों मसूरी स्थित LBSNAA में फाउंडेशन कोर्स के दौरान भी मिल चुके थे। 2022 की परीक्षा पास करने के बाद अंकुर त्रिपाठी को IPS बनने का मौका मिला और फाउंडेशन ट्रेनिंग कृतिका के साथ ही हुई। 2024 की परीक्षा में अंकुर ने 50वीं रैंक हासिल कर आईएएस अफसर बनने का सपना पूरा किया।


आईएएस कृतिका मिश्रा हिंदी माध्यम के उम्मीदवारों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनका मानना है कि कंटेंट की कमी के डर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। अलग-अलग लेखकों की किताबों को पढ़ने के बजाय चुनिंदा किताबों को बार-बार पढ़ना, उत्तर लेखन में अपनी अभिव्यक्ति की क्षमता सुधारना और नियमित अभ्यास करना सफलता की कुंजी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि खुद को अंग्रेजी माध्यम वालों से पीछे न समझें और इस डर को पार करके ही आप सफलता हासिल कर सकते हैं।


कृतिका मिश्रा की कहानी यह दर्शाती है कि सही दिशा, मेहनत और आत्मविश्वास से कोई भी चुनौती पार की जा सकती है। उनकी उपलब्धि न केवल हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह साबित करती है कि प्रतिबद्धता और धैर्य के साथ हर मुश्किल राह आसान हो सकती है।