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Bihar News: राज्यसभा चुनाव नामांकन के बीच विधान परिषद की सीटों को लेकर भी चर्चा तेज, जानिए क्या है यहां का समीकरण

बिहार में 2026 के MLC चुनाव को लेकर सियासत तेज हो गई है। जून और नवंबर में कुल 17 सीटों पर चुनाव होंगे। जानें किस पार्टी को कितनी सीट मिलने की संभावना है और क्या है पूरा समीकरण।

Bihar News: राज्यसभा चुनाव नामांकन के बीच विधान परिषद की सीटों को लेकर भी चर्चा तेज, जानिए क्या है यहां का समीकरण
Tejpratap
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Bihar News: बिहार की सियासत में इस समय जहां राज्यसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज है, वहीं अब बिहार विधान परिषद् के चुनाव की आहट भी राजनीतिक गलियारों में गूंजने लगी है। वर्ष 2026 में विधान परिषद् की कुल 17 सीटों पर चुनाव होने हैं, जिसे लेकर सभी दलों ने अभी से अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है।


सबसे पहले जून 2026 की बात करें तो इस महीने परिषद् की 9 सीटें खाली होने जा रही हैं। इन सीटों का कार्यकाल 28 जून 2026 को समाप्त होगा। इनमें विभिन्न दलों का प्रतिनिधित्व है—राजद की 2, जदयू की 3, कांग्रेस की 1 और भाजपा की 1 सीट शामिल है, जबकि 2 सीटें पहले से ही रिक्त हैं। जिन नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है उनमें राजद से मोहम्मद फारूक और सुनील कुमार सिंह, जदयू से गुलाम गौस, भीष्म सहनी और कुमुद वर्मा, भाजपा से संजय मयूख और कांग्रेस से समीर कुमार सिंह शामिल हैं। इसके अलावा एक सीट पर उपचुनाव भी होगा, जो मंगल पांडेय के विधानसभा चुनाव जीतने के बाद खाली हुई है।


नवंबर 2026 में भी 8 सीटों पर चुनाव होना है। इनमें भाजपा की 2, कांग्रेस की 1, सीपीआई की 1, जदयू की 1 और निर्दलीय की 2 सीटें शामिल हैं। खास बात यह है कि ये सीटें स्नातक और शिक्षक कोटे से जुड़ी हुई हैं—4 स्नातक और 4 शिक्षक कोटे की सीटें। स्नातक कोटे में निर्दलीय बंशीधर ब्रजवासी और सर्वेश कुमार, जदयू के नीरज कुमार और भाजपा के नरेंद्र कुमार का कार्यकाल समाप्त होगा। वहीं शिक्षक कोटे में भाजपा के नंद किशोर यादव, कांग्रेस के मदन मोहन झा, जनसुराज के अफाक अहमद और सीपीआई के संजय कुमार सिंह की सीटें खाली होंगी।


जून में होने वाले चुनाव को लेकर संभावना जताई जा रही है कि अप्रैल के अंत तक चुनाव का नोटिफिकेशन जारी हो सकता है। हालांकि, राजनीतिक दलों ने अभी से ही जोड़-तोड़ और समीकरण बैठाने शुरू कर दिए हैं। गणित के अनुसार 9 सीटों के लिए एक उम्मीदवार को जीत दिलाने के लिए करीब 25 विधायकों का समर्थन जरूरी होगा। ऐसे में बड़े दलों को इसका सीधा फायदा मिलने वाला है।


राजनीतिक समीकरणों पर नजर डालें तो एक सीट राजद के खाते में जाना लगभग तय माना जा रहा है, जबकि एक सीट लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) को मिलने की चर्चा है। वहीं जनता दल (यूनाइटेड) और भारतीय जनता पार्टी के बीच सीटों का बंटवारा राज्यसभा चुनाव के समझौते से जुड़ा हुआ है।


सूत्रों के मुताबिक, राज्यसभा की एक अतिरिक्त सीट भाजपा को दिए जाने के कारण एमएलसी चुनाव में जदयू को चार और भाजपा को तीन सीटें मिल सकती हैं। हालांकि यदि जदयू राज्यसभा की तीसरी सीट पर दावा करता है, तो समीकरण बदल सकते हैं और एमएलसी चुनाव में भाजपा चार तथा जदयू तीन सीटों पर चुनाव लड़ सकती है।


इसी बीच, मंगल पांडेय के विधानसभा में जाने से खाली हुई सीट पर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भाजपा सूत्रों के अनुसार, इस सीट पर उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र और पंचायत राज मंत्री दीपक प्रकाश को भेजे जाने की चर्चा जोरों पर है। यदि ऐसा होता है, तो यह एनडीए के भीतर सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने की एक बड़ी रणनीति मानी जाएगी।


कुल मिलाकर, बिहार में एमएलसी चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। राज्यसभा चुनाव के साथ-साथ अब विधान परिषद् चुनाव भी सत्ता संतुलन तय करने में अहम भूमिका निभाने जा रहा है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन-सा दल किस रणनीति के तहत इन सीटों पर अपना कब्जा जमाने में सफल होता है।