1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 04, 2026, 10:34:20 PM
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Bihar News : बिहार की राजनीति इन दिनों एक बड़े बदलाव के संकेत दे रही है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि भारतीय जनता पार्टी की ओर से राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। पार्टी का इतिहास रहा है कि वह ऐसे फैसलों में आखिरी समय तक सस्पेंस बनाए रखती है और अक्सर ऐसा नाम सामने लाती है जिसकी पहले ज्यादा चर्चा नहीं होती।
हाल के वर्षों में राजस्थान, मध्यप्रदेश और ओडिशा में मुख्यमंत्री चयन के दौरान भी यही पैटर्न देखने को मिला। वहां ऐसे चेहरे सामने आए जिनकी पहले मुख्यधारा में चर्चा तक नहीं थी। यही कारण है कि बिहार को लेकर भी कोई स्पष्ट दावा करना मुश्किल हो गया है।
अब तक बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार का दबदबा रहा है, भले ही बीजेपी गठबंधन में मजबूत स्थिति में रही हो। लेकिन अब संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी खुद मुख्यमंत्री पद अपने पास रखना चाहती है और सत्ता परिवर्तन की पटकथा लगभग तैयार मानी जा रही है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि होली के बाद बड़ा फैसला सामने आ सकता है।
अगर संभावित चेहरों की बात करें तो सबसे आगे नाम उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का लिया जा रहा है। उनके पास गृह मंत्रालय जैसा अहम विभाग है और संगठन में भी उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। इसके अलावा दूसरे उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा भी एक विकल्प के तौर पर देखे जा रहे हैं।
जातीय समीकरण बिहार की राजनीति में हमेशा निर्णायक भूमिका निभाता रहा है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि अगर नेतृत्व बदलाव होता है तो मुख्यमंत्री किसी पिछड़ी जाति से ही हो सकता है। कुर्मी नेतृत्व के बाद कोइरी (कुशवाहा) समुदाय से चेहरा सामने लाने की चर्चा तेज है, जिससे सामाजिक संतुलन साधा जा सके।
इसी क्रम में पटना के दीघा से विधायक संजीव चौरसिया का नाम भी राजनीतिक गलियारों में उभर रहा है। हालांकि यह चर्चा अभी शुरुआती स्तर पर ही है। वहीं, केंद्र सरकार में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय का नाम भी जोर पकड़ रहा है। वे यादव समुदाय से आते हैं और संगठन के भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कई मंचों से नित्यानंद राय को बड़ी जिम्मेदारी देने के संकेत दे चुके हैं। ऐसे में उनके नाम को पूरी तरह खारिज भी नहीं किया जा सकता।
हालांकि बीजेपी की कार्यशैली को देखते हुए यह भी संभव है कि पार्टी किसी ऐसे चेहरे को आगे कर दे जो अभी चर्चा में ही न हो। पार्टी “सरप्राइज फैक्टर” के लिए जानी जाती है और यही उसकी रणनीतिक ताकत भी मानी जाती है। कुछ राजनीतिक विश्लेषक यह भी मानते हैं कि सामाजिक समीकरण साधने के लिए पार्टी किसी दलित या अन्य पिछड़े वर्ग से नया चेहरा सामने ला सकती है।
फिलहाल स्थिति यह है कि कई नाम चर्चा में हैं, लेकिन किसी पर मुहर नहीं लगी है। बीजेपी नेतृत्व का अंतिम फैसला ही तय करेगा कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। इतना जरूर तय माना जा रहा है कि राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव अब दूर नहीं है। होली का रंग पूरी तरह फीका भी नहीं पड़ा है और सत्ता परिवर्तन की चर्चा अपने चरम पर पहुंच चुकी है।