पटना : भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर विपक्ष के सवालों पर जोरदार पलटवार किया है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और सांसद संजय जायसवाल ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनावी हार के बाद अब संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि SIR, EVM और चुनाव प्रक्रिया को लेकर लगातार भ्रम फैलाया जा रहा है, जिससे लोकतंत्र और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत पटना में आयोजित प्रेस वार्ता में संजय जायसवाल ने कहा कि विपक्ष को अगर चुनाव प्रक्रिया पर सवाल है तो उसे आरोप लगाने के बजाय ठोस प्रमाण सामने रखना चाहिए। उनके मुताबिक, विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस के कई दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बैलेट पेपर की मांग पर भी कांग्रेस को घेरा
संजय जायसवाल ने कांग्रेस की उस मांग का जिक्र किया, जिसमें पार्टी लंबे समय से बैलेट पेपर से चुनाव कराने की बात करती रही है। उन्होंने कहा कि विधान परिषद चुनाव में प्रेफरेंशियल वोटिंग के कारण बैलेट पेपर का इस्तेमाल होता है। इसके बावजूद 28 सीटों के चुनाव में कांग्रेस को केवल एक सीट मिली।
उन्होंने कर्नाटक के चुनाव परिणाम का भी उदाहरण दिया और दावा किया कि वहां कांग्रेस चारों सीटों पर चुनाव हार गई। जायसवाल ने कहा कि अगर बैलेट पेपर से चुनाव होने के बावजूद परिणाम कांग्रेस के पक्ष में नहीं आया, तो चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने की राजनीति पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
SIR पर बोले- चुनाव आयोग को संविधान से मिला अधिकार
भाजपा सांसद ने SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भी विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को दुरुस्त करने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आती है और यह व्यवस्था संविधान के तहत है। जायसवाल के मुताबिक, वर्ष 1950 से SIR की प्रक्रिया अपनाई जाती रही है और अब तक कई बार इसका इस्तेमाल किया जा चुका है। उन्होंने दावा किया कि पिछली बार बिहार में SIR के दौरान करीब 47 लाख मतदाताओं के नामों में सुधार किया गया। इनमें मृत व्यक्तियों, दूसरे स्थान पर चले गए लोगों और एक से अधिक जगह दर्ज नामों से जुड़ी प्रविष्टियां शामिल थीं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया से किसी योग्य नागरिक का नाम प्रभावित हुआ है तो वह संबंधित अधिकारियों के सामने अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है। ऐसे में पूरी प्रक्रिया को ही कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है।
घुसपैठियों के मुद्दे पर भी विपक्ष को घेरा
संजय जायसवाल ने कहा कि भारत में मतदान का अधिकार भारतीय नागरिकों को प्राप्त है। उन्होंने कहा कि नागरिकता, निर्धारित आयु और संबंधित क्षेत्र में पात्रता जैसी शर्तों को पूरा करने वाले व्यक्ति ही मतदाता सूची में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि वहां फर्जी दस्तावेजों के जरिए बांग्लादेशी नागरिकों को बसाने और मतदाता सूची में शामिल कराने की कोशिशें हुई हैं। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्याओं को मतदान का अधिकार नहीं दिया जा सकता।
जायसवाल ने कहा कि भारत सभी धर्मों के नागरिकों का देश है, लेकिन मतदाता सूची में अपात्र लोगों की मौजूदगी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। उनके मुताबिक SIR का उद्देश्य ऐसी प्रविष्टियों की पहचान कर मतदाता सूची को अधिक शुद्ध और विश्वसनीय बनाना है।
मनोज शर्मा ने भी विपक्ष पर बोला हमला
प्रेस वार्ता में भाजपा के वरिष्ठ नेता और अरवल विधायक मनोज शर्मा ने भी विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में ‘एक नागरिक, एक मत’ का सिद्धांत महत्वपूर्ण है और मतदाता सूची इसी आधार पर तैयार की जाती है।
मनोज शर्मा ने संविधान के अनुच्छेद 324 का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयोग को चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की संवैधानिक जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाने के बजाय राजनीतिक दलों को इसमें सहयोग करना चाहिए।
भाजपा नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए केवल योग्य नागरिकों का नाम मतदाता सूची में होना जरूरी है। उनका कहना है कि विपक्ष को चुनाव आयोग और SIR पर आरोप लगाने के बजाय यदि कोई ठोस गड़बड़ी सामने दिखती है तो उसके प्रमाण सार्वजनिक करने चाहिए।





