सड़क दुर्घटना पीड़ितों की मदद करें और पाएं 25 हजार रुपये का इनाम, राह-वीर योजना को लेकर जागरूकता अभियान

बिहार में सड़क दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने पर राह-वीर योजना के तहत 25 हजार रुपये का इनाम मिलेगा। परिवहन विभाग ने वाहन चालकों को सुरक्षित ड्राइविंग और गुड सेमेरिटन कानून की जानकारी दी।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Wed, 07 Jan 2026 04:26:47 PM IST

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25 हजार रुपये का पाएं ईनाम - फ़ोटो social media

PATNA: वाहन चालकों को सुरक्षित वाहन चालन प्रशिक्षण के दौरान सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों की सहायता करने के प्रावधानों के बारे में भी विशेष रूप से जागरूक किया गया। पटना में आयोजित कार्यक्रम में यह बताया गया कि राह-वीर योजना के तहत सड़क दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने वाले व्यक्ति को सम्मान स्वरूप 25  हजार रुपये ईनाम का प्रावधान किया गया है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन करीब 224 वाहन चालकों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। गुरुवार को पटना के ऑटो चालकों को सुरक्षित वाहन चालन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।


सड़क सुरक्षा के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने और वाहन चालकों में जिम्मेदार व्यवहार विकसित करने के उद्देश्य से बुधवार को दूसरे दिन भी परिवहन विभाग, बिहार सड़क सुरक्षा परिषद् द्वारा 224 वाहन चालकों को सुरक्षित वाहन चालन का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वाहन चालकों ने भाग लिया और सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत जानकारी प्राप्त की। गुरुवार को  ऑटो चालकों को सुरक्षित वाहन चालन का प्रशिक्षण दिया जायेगा। इसके बाद बस एवं ट्रक चालक, ओला-उबर जैसे एग्रीगेटर सेवाओं से जुड़े चालकों को भी प्रशिक्षण दिया जायेगा। 


प्रशिक्षण के दौरान चालकों को सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों की सहायता करने के महत्व पर विशेष रूप से जागरूक किया गया। उन्हें बताया गया कि गुड सेमेरिटन (राह वीर ) प्रावधान के तहत दुर्घटना पीड़ित की मदद करने वाले व्यक्ति को सम्मान और कानूनी संरक्षण प्राप्त है। यह संदेश प्रमुखता से दिया गया कि सड़क दुर्घटना पीड़ितों की मदद करें, पीछे नहीं हटें। सरकार और प्रशासन आपके साथ है। साथ ही यह भी कहा गया कि मानवता का पालन करते हुए समय पर मदद किसी की जान बचा सकती है और ऐसे नेक कार्य करने वाले नागरिक समाज के नायक हैं।


परिवहन सचिव श्री राज कुमार ने बताया कि सड़क दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने में वाहन चालकों की अहम भूमिका हो सकती है। अधिकतर मामलों में दुर्घटना के समय वाहन चालक ही सबसे पहले मौके पर उपस्थित होते हैं, इसलिए उनकी तत्परता और मानवीय संवेदनशीलता किसी की जान बचाने में निर्णायक साबित हो सकती है।


उन्होंने कहा कि दुर्घटना देखकर पीछे हटने के बजाय मदद के लिए आगे बढ़ना चालक समुदाय का सामाजिक और मानवीय दायित्व है। यदि वाहन चालक साहसपूर्वक पीड़ितों की सहायता करें, तो वे सही मायने में ‘राहवीर’ बन सकते हैं।परिवहन सचिव ने बताया कि यातायात नियमों का पालन, सुरक्षित गति से वाहन चलाना, सीट बेल्ट और हेलमेट का प्रयोग तथा वाहन चलाते मोबाइल का उपयोग न करना, ये सभी आदतें आपकी और दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं। हमारा लक्ष्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना और सुरक्षित एवं जिम्मेदार परिवहन व्यवस्था स्थापित करना है। इसके लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आगे भी निरंतर चलाए जाएंगे।


कार्यक्रम में वाहन चालकों को यातायात के सामान्य नियमों, सड़क संकेतों, लेन अनुशासन, ओवरस्पीडिंग से बचाव, सीट बेल्ट एवं हेलमेट के अनिवार्य उपयोग, मोबाइल का प्रयोग न करने तथा थकान में वाहन न चलाने संबंधी विस्तृत जानकारी दी गई। चालकों को यह भी बताया गया कि नियमों का पालन केवल दंड से बचने के लिए नहीं, बल्कि स्वयं और दूसरों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।