RJD Bihar : बिहार की सियासत में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा अगर किसी पार्टी के अंदरूनी हालात को लेकर हो रही है, तो वह है राष्ट्रीय जनता दल यानी राष्ट्रीय जनता दल। पार्टी के भीतर बढ़ती खींचतान और संगठनात्मक अनुशासन को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। खबर है कि प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल अपनी ही पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं की कार्यशैली से बेहद नाराज चल रहे हैं। मामला इतना बढ़ गया है कि अब इसे आरजेडी के भीतर चल रहे अंदरूनी घमासान के तौर पर देखा जा रहा है।
सूत्रों की मानें तो विवाद की शुरुआत उस समय हुई, जब पार्टी के कई बड़े कार्यक्रम बिना प्रदेश अध्यक्ष की जानकारी और मंजूरी के तय किए जाने लगे। बताया जा रहा है कि हाल ही में देशभर में चर्चा में रहे NEET पेपर लीक मामले को लेकर पटना में आयोजित विरोध प्रदर्शन की जानकारी तक प्रदेश अध्यक्ष को समय रहते नहीं दी गई। पार्टी कार्यालय में मौजूद होने के बावजूद उन्हें इस कार्यक्रम की भनक तक नहीं लग सकी।
आरजेडी के अंदर बढ़ते मतभेद की असली तस्वीर उस अहम बैठक में सामने आई, जो नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के कार्यक्रमों और दौरों के लिए नया प्रोटोकॉल तय करने के उद्देश्य से बुलाई गई थी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में कई वरिष्ठ नेताओं के बीच तीखी बहस और नोकझोंक हुई। कहा जा रहा है कि बैठक के दौरान कुछ नेताओं ने संगठनात्मक व्यवस्था और नेतृत्व को लेकर खुलकर असहमति जताई, जिससे माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में हुई इस तनातनी से प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल खुद को असहज और अपमानित महसूस कर रहे थे। पार्टी के भीतर गुटबाजी की चर्चा भी तेज हो गई। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष ने मामले को गंभीर मानते हुए आंतरिक जांच का फैसला लिया। उन्होंने पार्टी के पांच वरिष्ठ नेताओं की एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की, ताकि बैठक में हुई कथित अनुशासनहीनता और विवाद की पूरी जांच की जा सके।
इस विशेष जांच समिति में पार्टी के कई बड़े नेताओं को शामिल किया गया। इनमें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उदय नारायण चौधरी, बीनू यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष तनवीर हसन और रणविजय साहू जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष ने इस कमेटी को निर्देश दिया था कि तय समय सीमा के भीतर पूरी जांच कर रिपोर्ट सौंपी जाए, ताकि दोषी नेताओं पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सके। हालांकि , इसको लेकर जब रणविजय साहू से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसको लेकर किसी तरह की कोई जानकारी नहीं है, यहाँ तक की कमिटी बनने की जानकारी नहीं हैं। वह इस मामले में खुलकर बोलने से बचते नजर आए।
लेकिन पार्टी के भीतर नाराजगी का स्तर इस बात से समझा जा सकता है कि निर्धारित समय बीत जाने के बावजूद कमेटी अपनी रिपोर्ट जमा नहीं कर सकी। इस देरी को लेकर प्रदेश अध्यक्ष ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने कमेटी के सदस्यों को दोबारा पत्र लिखकर जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। नए निर्देश में साफ कहा गया है कि हर हाल में 7 जून 2026 तक जांच रिपोर्ट जमा करनी होगी।
बताया जा रहा है कि रिपोर्ट नहीं मिलने से प्रदेश अध्यक्ष खुद को कमजोर महसूस कर रहे हैं, क्योंकि उनके आदेशों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। यही वजह है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर समय रहते स्थिति नहीं संभाली गई, तो इसका असर आने वाले चुनावी समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
इधर, राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या आरजेडी के भीतर नेतृत्व को लेकर नई लड़ाई शुरू हो चुकी है, या फिर यह सिर्फ संगठनात्मक अनुशासन का मामला है। आने वाले दिनों में जांच कमेटी की रिपोर्ट और पार्टी नेतृत्व की अगली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।




