Bihar Politics : बड़े बेआबरू होकर जन सुराज से निकले रितेश पांडे, बोले – किसी राजनीतिक दल का सक्रिय सदस्य रहकर काम करना बेहद मुश्किल

भोजपुरी सिंगर और करगहर विधानसभा सीट से जन सुराज के उम्मीदवार रहे रितेश पांडे ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा कि किसी राजनीतिक दल का सक्रिय सदस्य रहकर काम करना बेहद मुश्किल है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mon, 12 Jan 2026 01:51:12 PM IST

Bihar Politics : बड़े बेआबरू होकर जन सुराज से निकले रितेश पांडे, बोले – किसी राजनीतिक दल का सक्रिय सदस्य रहकर काम करना बेहद मुश्किल

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Bihar Politics : भोजपुरी संगीत जगत के लोकप्रिय युवा गायक और जन सुराज पार्टी के टिकट पर करगहर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके रितेश पांडे ने आज पार्टी से इस्तीफा देकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर एक भावनात्मक पोस्ट साझा करते हुए रितेश पांडे ने जन सुराज पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा की और इसके पीछे की वजह भी खुलकर बताई।


रितेश पांडे ने अपने पोस्ट में लिखा कि एक जिम्मेदार भारतीय नागरिक होने के नाते उन्होंने जन सुराज पार्टी से जुड़कर लोकतंत्र के महापर्व में भाग लिया। उन्होंने कहा कि चुनावी परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहे, लेकिन उन्हें इसका कोई अफसोस नहीं है क्योंकि उन्होंने पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ अपना दायित्व निभाया। उनके अनुसार राजनीति में उतरना उनके लिए एक सीख भरा अनुभव रहा और इस दौरान जनता से मिला प्रेम और सहयोग उनके लिए सबसे बड़ी पूंजी है।


अपने इस्तीफे की वजह बताते हुए रितेश पांडे ने लिखा कि अब वह उसी काम के माध्यम से जनता की सेवा जारी रखना चाहते हैं, जिसके जरिए लोगों ने उन्हें पहचान दी और सम्मान दिया। उन्होंने खुद को एक “मामूली किसान परिवार का लड़का” बताते हुए कहा कि जनता के प्यार, दुलार और आशीर्वाद ने ही उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। रितेश ने साफ शब्दों में कहा कि किसी राजनीतिक दल का सक्रिय सदस्य रहकर उस सेवा को पूरी ईमानदारी से जारी रखना उनके लिए मुश्किल हो रहा है, इसलिए उन्होंने जन सुराज पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा देने का फैसला लिया है।


रितेश पांडे का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब बिहार की राजनीति में नए प्रयोगों और वैकल्पिक राजनीति को लेकर चर्चाएं तेज हैं। जन सुराज पार्टी से जुड़कर चुनाव लड़ना उनके लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा था। युवा, लोकप्रिय और खासकर ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले मतदाताओं में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती थी। चुनावी प्रचार के दौरान भी रितेश पांडे ने जनता से सीधे संवाद किया और अपने सादे, जमीन से जुड़े अंदाज के कारण चर्चा में रहे।


हालांकि चुनाव में उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली, लेकिन रितेश पांडे लगातार यह कहते रहे कि राजनीति में आना उनके लिए सत्ता की चाह नहीं बल्कि समाज और जनता के लिए कुछ करने की इच्छा का परिणाम था। उनके इस्तीफे के बाद यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि क्या वह भविष्य में किसी अन्य राजनीतिक दल से जुड़ सकते हैं या पूरी तरह से राजनीति से दूरी बनाकर फिर से अपने संगीत करियर पर फोकस करेंगे।


रितेश पांडे भोजपुरी इंडस्ट्री का जाना-पहचाना नाम हैं। “हैलो कौन”, “लहंगा लखनऊआ”, “कमरिया दुखाता ए राजा जी” जैसे कई सुपरहिट गानों से उन्होंने खासकर युवाओं के बीच जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की है। उनकी बड़ी फैन फॉलोइंग है और सोशल मीडिया पर भी वह काफी सक्रिय रहते हैं। यही वजह है कि उनके राजनीति में आने और अब इस्तीफा देने की खबर ने उनके प्रशंसकों को भी चौंका दिया है।


राजनीतिक जानकारों का मानना है कि रितेश पांडे का यह कदम उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने के बजाय और मजबूत कर सकता है, क्योंकि उन्होंने अपनी सीमाओं और प्राथमिकताओं को खुले तौर पर स्वीकार किया है। जनता से जुड़ाव और ईमानदारी का संदेश उनके पोस्ट में साफ झलकता है। फिलहाल रितेश पांडे ने अपने इस्तीफे के बाद किसी नए राजनीतिक कदम के संकेत नहीं दिए हैं।


उन्होंने कम शब्दों में अपनी बात रखने की कोशिश की और यह उम्मीद जताई कि लोग उनके फैसले को समझेंगे। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में रितेश पांडे किस रास्ते पर आगे बढ़ते हैं—राजनीति में किसी नए रूप में वापसी करते हैं या फिर पूरी तरह से संगीत और सामाजिक कार्यों के जरिए जनता से जुड़े रहते हैं।