1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mon, 12 Jan 2026 11:08:57 AM IST
- फ़ोटो
Bihar Politics : बिहार की राजनीति में एक बार फिर अटकलों का दौर तेज हो गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और जेडीयू के कद्दावर नेता रह चुके आरसीपी सिंह के हालिया बयान ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। खासकर तब, जब उन्होंने जेडीयू में वापसी को लेकर पूछे गए सवाल पर सीधे इनकार या स्वीकार करने के बजाय सिर्फ इतना कहा— “आपको पता चलेगा।”
दरअसल, एक कार्यक्रम के दौरान संवाददाताओं से बातचीत में आरसीपी सिंह ने पहले अपने पुराने राजनीतिक रिश्तों पर बात की। उन्होंने कहा,“आपको कहां से लगता है कि हम लोग दो हैं। हम उनके साथ 25 वर्षों से रहे हैं। जितना हम उनको जानते हैं और जितना वह मुझे जानते हैं, उतना कोई दूसरा जानता है क्या?”इस बयान को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनके संबंधों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
खरमास के बाद क्या बदलेगा सियासी समीकरण?
जब पत्रकारों ने आरसीपी सिंह से सीधा सवाल किया कि क्या खरमास के बाद वे जेडीयू ज्वाइन करेंगे, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया— “आपको पता चलेगा।”राजनीति में ऐसे जवाब अक्सर बड़े संकेत माने जाते हैं। न ‘हां’ कहा गया और न ‘ना’, लेकिन बयान इतना जरूर है कि राजनीतिक चर्चाओं को नई दिशा दे गया है।
जन सुराज पार्टी से जुड़ाव और चुनावी झटका
फिलहाल आरसीपी सिंह जन सुराज पार्टी के सदस्य हैं। प्रशांत किशोर के नेतृत्व में बनी इस पार्टी से उन्होंने नए सियासी सफर की शुरुआत की थी। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी ने भी किस्मत आजमाई, लेकिन पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा।
खास बात यह रही कि इस चुनाव में आरसीपी सिंह की बेटी को भी जन सुराज पार्टी की ओर से विधानसभा का टिकट दिया गया, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इतना ही नहीं, पार्टी इस चुनाव में अपना खाता तक नहीं खोल पाई। चुनावी नतीजों के बाद यह साफ हो गया कि जन सुराज को अभी लंबा सियासी संघर्ष करना होगा।
जेडीयू से पुराने रिश्ते, नई संभावनाएं
आरसीपी सिंह कभी जेडीयू के सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते थे। वे नीतीश कुमार के बेहद करीबी माने जाते रहे हैं और लंबे समय तक पार्टी की रणनीति और संगठन में अहम भूमिका निभाते रहे। हालांकि बाद में मतभेद सामने आए और उन्हें पार्टी छोड़नी पड़ी। अब, जब जन सुराज के साथ उनका सियासी प्रयोग सफल नहीं हो पाया और उन्होंने नीतीश कुमार से रिश्तों पर भावनात्मक बयान दिया है, तो जेडीयू में वापसी की अटकलें और तेज हो गई हैं।
बिहार की राजनीति में क्यों अहम है यह बयान?
आरसीपी सिंह का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार की राजनीति पहले से ही नए समीकरणों की तलाश में है। जेडीयू लगातार संगठन को मजबूत करने में जुटी है और पुराने अनुभवी नेताओं की वापसी पार्टी के लिए फायदेमंद मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर आरसीपी सिंह की जेडीयू में वापसी होती है, तो यह न सिर्फ पार्टी के लिए बल्कि बिहार की राजनीति के लिए भी एक बड़ा घटनाक्रम होगा।
आगे क्या?
फिलहाल आरसीपी सिंह ने अपने पत्ते पूरी तरह नहीं खोले हैं। लेकिन इतना साफ है कि उनका यह बयान महज एक सामान्य टिप्पणी नहीं है। अब सबकी निगाहें खरमास के बाद होने वाले घटनाक्रम पर टिकी हैं। क्या आरसीपी सिंह एक बार फिर नीतीश कुमार के साथ सियासी पारी शुरू करेंगे या कोई नया रास्ता चुनेंगे— इसका जवाब आने वाले दिनों में सामने आ सकता है।