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Raksha Bandhan 2026: भद्रा से मुक्त रक्षाबंधन, पूरे दिन बांध सकेंगी राखी; जानें शुभ मुहूर्त और ग्रहण का असर

Raksha Bandhan 2026 पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। जानें राखी बांधने के शुभ मुहूर्त, पूर्णिमा तिथि, चंद्रग्रहण और सूतक से जुड़ी पूरी जानकारी।

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Tejpratap
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Bihar News: भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का पर्व रक्षाबंधन इस बार बेहद खास संयोग में मनाया जा रहा है। सावन शुक्ल पूर्णिमा के दिन पड़ रहे रक्षाबंधन पर बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इस बार भद्रा रहित पूर्णिमा होने के कारण दिनभर राखी बांधने का अवसर रहेगा। यही वजह है कि पर्व को लेकर बाजारों में भी काफी उत्साह देखने को मिला और देर रात तक राखी व मिठाइयों की खरीदारी होती रही।


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रक्षाबंधन सिर्फ राखी बांधने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी के रिश्ते को मजबूत करने का पर्व है। बहन भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उसके सुख, स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना करती है। वहीं भाई बहन की सुरक्षा और हर परिस्थिति में उसका साथ देने का संकल्प लेता है।


पूरे दिन रहेगा रक्षाबंधन का मान

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सावन शुक्ल पूर्णिमा की तिथि शुक्रवार सुबह 9:27 बजे तक रहेगी। हालांकि पूर्णिमा उदया तिथि में होने के कारण पूरे दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन शतभिषा नक्षत्र का संयोग भी रहेगा। भद्रा नहीं होने के कारण राखी बांधने को लेकर इस बार विशेष सुविधा रहेगी।


रक्षाबंधन के दिन बहनें पूजा की थाली सजाकर भाई का तिलक करेंगी। थाली में रोली या चंदन, अक्षत, फूल, मिठाई और घी का दीपक रखकर विधि-विधान से पूजा की जाएगी। इसके बाद भाई की कलाई पर राखी बांधी जाएगी। भाई भी बहन को उपहार देकर उसके सुख-दुख में साथ खड़े रहने का संकल्प लेगा।


ये हैं राखी बांधने के शुभ मुहूर्त

रक्षाबंधन पर अलग-अलग शुभ समय बताए गए हैं। इनमें सुबह का चर-लाभ-अमृत मुहूर्त और दोपहर का अभिजित मुहूर्त विशेष माना जा रहा है।

- पूर्णिमा तिथि: सुबह 9:27 बजे तक

- चर-लाभ-अमृत मुहूर्त: सुबह 5:29 बजे से 10:15 बजे तक

- अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:25 बजे से दोपहर 12:16 बजे तक

- विशिष्ट शुभ मुहूर्त: सुबह 11:51 बजे से दोपहर 1:26 बजे तक


हालांकि पूरे दिन पूर्णिमा का मान होने के कारण बहनें सुविधानुसार भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं।


चंद्रग्रहण होगा, लेकिन भारत में असर नहीं

इस रक्षाबंधन पर चंद्रग्रहण का भी संयोग बन रहा है। शुक्रवार सुबह 8:04 बजे से 11:22 बजे तक खंडग्रास चंद्रग्रहण बताया गया है। आमतौर पर चंद्रग्रहण से पहले सूतक काल माना जाता है, लेकिन इस बार खास बात यह है कि ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए यहां सूतक मान्य नहीं होगा और रक्षाबंधन के धार्मिक आयोजन पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा।


भगवान को भी बांधी जाएगी राखी

रक्षाबंधन के अवसर पर सिर्फ भाई की कलाई ही नहीं, बल्कि कई घरों और मंदिरों में देवी-देवताओं को भी रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा है। श्रद्धालु अपने इष्टदेव और कुलदेवता के साथ भगवान शिव, गणेश, बजरंगबली, श्रीराम और लड्डू गोपाल को भी राखी अर्पित करेंगे। पूजा के बाद भगवान को मिठाई और पकवान का भोग लगाया जाएगा तथा आरती की जाएगी।


राशि के अनुसार चुन सकते हैं राखी का रंग

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार भाई की राशि के आधार पर राखी का रंग चुनना भी शुभ माना जाता है। मेष राशि वालों के लिए लाल, केसरिया या पीली राखी, वृषभ के लिए नीली या चांदी की, मिथुन के लिए हरी और कर्क राशि के लिए सफेद या मोती वाली राखी शुभ मानी गई है। सिंह राशि के लिए गुलाबी, लाल या केसरिया, कन्या के लिए सफेद या हरा, तुला के लिए फिरोजी या जमुनी, वृश्चिक के लिए लाल, धनु के लिए पीला, मकर के लिए गहरा लाल, कुंभ के लिए रुद्राक्ष और मीन राशि के लिए पीले या सफेद रंग की राखी का सुझाव दिया गया है।


इस तरह इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा की बाधा नहीं है और भारत में चंद्रग्रहण का सूतक भी मान्य नहीं होगा। ऐसे में भाई-बहन पूरे उत्साह और शुभ भावना के साथ रक्षा सूत्र के इस पर्व को मना सकते हैं।