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गया–सासाराम–डीडीयू रेलखंड पर ‘सुरक्षा कवच’ का सफल ट्रायल, 160 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ी ट्रेन

Railway safety Kavach: गया–डीडीयू रेलखंड पर ‘सुरक्षा कवच’ का ट्रायल रहा. 160 किमी/घंटा की रफ्तार से चली ट्रेन ने रेड सिग्नल पर स्वतः रफ्तार घटाई और खुद रूक गई.

Railway safety Kavach
प्रतिकात्मक तस्वीर
© Google
Mukesh Srivastava
3 मिनट

Railway safety Kavach: गया–सासाराम–डीडीयू रेलखंड पर शुक्रवार से ‘सुरक्षा कवच’ प्रणाली का अंतिम चरण का ट्रायल शुरू किया गया। इस परीक्षण के दौरान 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही ट्रायल ट्रेन ने अचानक खतरे की स्थिति में स्वतः अपनी गति नियंत्रित कर ली, जिससे एक बड़ा रेल हादसा टल गया।


ट्रायल के दौरान डीडीयू की ओर तेज गति से जा रही ट्रेन सैयदराजा–चंदौली स्टेशन के बीच गेट संख्या-75 पर रेड सिग्नल पर पहुंची। इसी दौरान ट्रेन को कर्मनाशा स्टेशन के लूप लाइन में प्रवेश करना पड़ा। संभावित खतरे को देखते हुए ‘सुरक्षा कवच’ प्रणाली ने तुरंत हस्तक्षेप किया और ट्रेन की गति को घटाकर मात्र 15 किलोमीटर प्रति घंटा कर दिया, जिससे स्थिति पूरी तरह नियंत्रित हो गई।


इस महत्वपूर्ण ट्रायल में पूर्व मध्य रेलवे, डीडीयू रेल मंडल और रेलवे बोर्ड के विशेषज्ञ शामिल रहे। शुक्रवार को एलएचबी रेक के साथ परीक्षण सफल रहा और शनिवार को भी ट्रायल जारी रखा गया। अधिकारियों के अनुसार यह अंतिम चरण का परीक्षण है और इसके परिणाम के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।


रेलवे ट्रैफिक इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार के अनुसार, ‘सुरक्षा कवच’ एक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है, जो ट्रेनों की गति और दूरी पर लगातार नजर रखती है। खतरे की स्थिति में यह खुद ही ब्रेक लगाकर दुर्घटना रोक देती है और लोको पायलट को समय-समय पर सतर्क भी करती है।


बता दें कि ‘सुरक्षा कवच’ भारत में विकसित एक ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है, जो ट्रेन, ट्रैक और सिग्नल सिस्टम के बीच लगातार संपर्क बनाए रखता है। इसमें लगे RFID और रेडियो उपकरण रियल टाइम डेटा शेयर करते हैं, जिससे ट्रेन की स्पीड, लोकेशन और सिग्नल की स्थिति लगातार मॉनिटर होती रहती है। यदि लोको पायलट गलती से रेड सिग्नल पार करता है, तो यह सिस्टम तुरंत ऑटोमैटिक ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक देता है। रेलवे का यह प्रयास यात्रियों की सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। आने वाले समय में इस तकनीक के लागू होने से हाई-स्पीड ट्रेनों का संचालन और अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद होने की उम्मीद है।

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Mukesh Srivastava

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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