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अब सिक्योरिटी पॉलिटिक्स: राबड़ी आवास से हटे सारे पुलिसवाले, गेट पर नहीं दिख रहे एक भी सुरक्षाकर्मी

राबड़ी देवी की सुरक्षा में कथित कटौती के बाद उन्होंने सरकारी सुरक्षा वापस कर दी। आवास से सुरक्षाकर्मियों के हटने पर बिहार की राजनीति गरमा गई है।

अब सिक्योरिटी पॉलिटिक्स: राबड़ी आवास से हटे सारे पुलिसवाले, गेट पर नहीं दिख रहे एक भी सुरक्षाकर्मी
Tejpratap
Tejpratap
4 मिनट

Bihar News: बिहार की राजनीति में सुरक्षा को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और राजद नेता Rabri Devi के सरकारी आवास पर शनिवार को असामान्य स्थिति देखने को मिली। आवास के मुख्य गेट पर तैनात रहने वाले पुलिसकर्मी और सुरक्षाकर्मी नजर नहीं आए। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया।


राजद की ओर से दावा किया गया है कि राज्य सरकार ने पहले राबड़ी देवी की सुरक्षा में कटौती की थी। इस फैसले से नाराज होकर राबड़ी देवी ने सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई सुरक्षा व्यवस्था को ही वापस कर दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह केवल सुरक्षा का मामला नहीं बल्कि राजनीतिक प्रतिशोध का उदाहरण है।


जानकारी के अनुसार, राबड़ी आवास के बाहर पहले की तरह पुलिस बल की मौजूदगी नहीं दिखी। गेट पर सुरक्षाकर्मियों के नहीं होने की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद विपक्ष ने इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया। राजद नेताओं का आरोप है कि विपक्षी नेताओं की सुरक्षा कम करके सरकार राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर रही है।


राजद प्रवक्ताओं ने कहा कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की सुरक्षा में कटौती करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उनका कहना है कि यदि सरकार सुरक्षा देने में राजनीति करेगी तो राजद के नेता जनता के बीच रहकर ही अपनी राजनीतिक लड़ाई लड़ेंगे। पार्टी ने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में अन्य नेता भी सरकारी सुरक्षा छोड़ने पर विचार कर सकते हैं।


दूसरी ओर, सत्ता पक्ष की ओर से अभी तक इस पूरे मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि सरकारी सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था का निर्धारण सुरक्षा एजेंसियों के आकलन और निर्धारित प्रोटोकॉल के आधार पर किया जाता है। इसमें किसी प्रकार की राजनीतिक भावना शामिल नहीं होती।


राजद समर्थकों का कहना है कि राबड़ी देवी बिहार की प्रमुख राजनीतिक हस्तियों में शामिल हैं और लंबे समय तक राज्य की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा को लेकर उठे सवाल स्वाभाविक रूप से राजनीतिक महत्व रखते हैं। वहीं विपक्षी दलों का आरोप है कि सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषय को राजनीतिक रंग देकर जनता के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है।


फिलहाल सबसे बड़ी चर्चा इस बात की है कि राबड़ी देवी द्वारा सुरक्षा लौटाने के फैसले के बाद आगे क्या कदम उठाए जाएंगे। यदि राजद इस मुद्दे को व्यापक राजनीतिक अभियान का रूप देता है तो आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में सुरक्षा बनाम राजनीति की बहस और तेज हो सकती है।


राबड़ी आवास से सुरक्षाकर्मियों के हटने की तस्वीरों ने राज्य की राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। अब सभी की नजर सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया और राजद की अगली रणनीति पर टिकी हुई है। सुरक्षा का यह विवाद आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है।