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बांकीपुर की जीत के बाद PK का बड़ा दांव! 38 जिलों में दौड़ेंगे प्रशांत किशोर, अब पूरे बिहार में जन सुराज का मिशन

बांकीपुर उपचुनाव में जीत के बाद प्रशांत किशोर अब पूरे बिहार में जन सुराज को मजबूत करने की तैयारी में हैं। 15 सितंबर से 38 जिलों की यात्रा शुरू होने की संभावना है। संगठन विस्तार, सदस्यता अभियान और आगामी चुनावों की तैयारी पर रहेगा फोकस।

बांकीपुर की जीत के बाद PK का बड़ा दांव! 38 जिलों में दौड़ेंगे प्रशांत किशोर, अब पूरे बिहार में जन सुराज का मिशन
Tejpratap
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पटना: बांकीपुर उपचुनाव में मिली जीत के बाद प्रशांत किशोर अब सिर्फ एक विधानसभा सीट तक सीमित रहने के मूड में नहीं हैं। जन सुराज के पहले विधायक बनने के बाद उनका अगला निशाना पूरे बिहार में संगठन और जनाधार को मजबूत करना है। पार्टी के भीतर प्रशांत किशोर की नई बिहार यात्रा को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। माना जा रहा है कि 15 सितंबर से वे एक बार फिर बिहार की सियासी जमीन पर लंबा सफर शुरू कर सकते हैं।

इस बार यात्रा का दायरा भी छोटा नहीं होगा। प्रशांत किशोर का लक्ष्य बिहार के सभी 38 जिलों तक पहुंचने का है। यात्रा के दौरान गांवों और कस्बों में लोगों से संवाद, संगठन विस्तार, सदस्यता अभियान और आगामी चुनावों के लिए जमीन तैयार करने पर फोकस रहेगा।

3-4 जिलों के चरण में आगे बढ़ेगी यात्रा

जन सुराज की प्रस्तावित यात्रा को चरणबद्ध तरीके से आयोजित करने की तैयारी है। एक चरण में करीब 3 से 4 जिलों को शामिल किया जा सकता है। यात्रा की शुरुआत पश्चिमी चंपारण से होने की संभावना जताई जा रही है। पश्चिमी चंपारण से शुरुआत प्रशांत किशोर के लिए प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण होगी। यहीं के भितिहरवा गांधी आश्रम से उन्होंने 2 अक्टूबर 2022 को अपनी जन सुराज पदयात्रा की शुरुआत की थी। सभी जिलों का दौरा पूरा होने के बाद यात्रा का समापन पटना में किए जाने की संभावना है। हालांकि अंतिम कार्यक्रम पर जन सुराज की राष्ट्रीय कार्यकारिणी फैसला करेगी।

बांकीपुर की जीत ने बदल दिया माहौल

बांकीपुर उपचुनाव में जीत ने जन सुराज के भीतर नई ऊर्जा पैदा कर दी है। भाजपा के मजबूत गढ़ माने जाने वाले बांकीपुर में प्रशांत किशोर ने भाजपा उम्मीदवार को 19,324 वोटों के अंतर से हराया। इस जीत के साथ वह जन सुराज के पहले विधायक बने। यही वजह है कि पार्टी अब बांकीपुर की जीत को सिर्फ एक सीट की जीत के तौर पर नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में अपने विस्तार के संकेत के रूप में देख रही है। अब चुनौती यह है कि बांकीपुर में मिली राजनीतिक सफलता को राज्य के दूसरे हिस्सों तक कैसे पहुंचाया जाए।

MLC और पंचायत चुनाव पर भी नजर

प्रशांत किशोर की प्रस्तावित यात्रा का समय भी काफी अहम माना जा रहा है। नवंबर 2026 में बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक कोटे की 8 सीटों पर चुनाव प्रस्तावित हैं। इसके बाद 2027 में परिसीमन के बाद पंचायत चुनाव होने हैं। ऐसे में जन सुराज की कोशिश संगठन को सिर्फ विधानसभा क्षेत्रों तक सीमित रखने की नहीं, बल्कि पंचायत और बूथ स्तर तक मजबूत करने की होगी। यात्रा के दौरान स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के साथ नए चेहरों को संगठन से जोड़ने पर भी जोर दिया जा सकता है।

‘यात्रा’ जन सुराज की पुरानी रणनीति

जन सुराज की प्रवक्ता सोनाली आनंद के मुताबिक यात्रा पार्टी के लिए सिर्फ चुनावी कार्यक्रम नहीं है। लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनना और उनसे सीधा संवाद करना जन सुराज की शुरुआत से ही रणनीति रही है। यही वजह है कि बांकीपुर में चल रही आभार यात्रा को भी इसी अभियान की कड़ी माना जा रहा है। प्रशांत किशोर मतदाताओं का धन्यवाद करने के साथ-साथ इलाके की समस्याओं और लोगों की अपेक्षाओं को समझने की कोशिश कर रहे हैं।

2025 की हार के बाद अब नई चुनौती

2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में जन सुराज को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी। चुनावी हार के बाद संगठन के सामने कई सवाल भी खड़े हुए और कुछ नेताओं ने पार्टी से दूरी बना ली। लेकिन बांकीपुर की जीत ने पार्टी को नई राजनीतिक ऊर्जा दे दी है। अब प्रशांत किशोर के सामने दोहरी जिम्मेदारी है। एक तरफ उन्हें विधानसभा के भीतर अपनी राजनीतिक भूमिका मजबूत करनी होगी, तो दूसरी तरफ सड़क पर संगठन और जनाधार का विस्तार करना होगा।

सरकार पर हमले का भी बन सकता है मंच

बांकीपुर की जीत के बाद प्रशांत किशोर लगातार सरकार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निशाना साध रहे हैं। ऐसे में सितंबर से प्रस्तावित बिहार यात्रा के दौरान स्थानीय समस्याओं के साथ सरकार के कामकाज को लेकर भी सवाल उठाए जा सकते हैं।

गांवों-कस्बों में बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, पलायन, सड़क, प्रशासन और स्थानीय विकास जैसे मुद्दों को अभियान का हिस्सा बनाया जा सकता है। यानी यात्रा सिर्फ संगठन विस्तार तक सीमित रहेगी या सरकार के खिलाफ राजनीतिक माहौल बनाने का माध्यम भी बनेगी, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।

सदस्यता अभियान को भी मिलेगी रफ्तार

जन सुराज नए सिरे से सदस्यता अभियान को तेज करने की तैयारी में है। पार्टी को उम्मीद है कि प्रशांत किशोर की यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में लोग संगठन से जुड़ेंगे। पंचायत से लेकर बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं का नेटवर्क तैयार करना इस अभियान की बड़ी प्राथमिकता हो सकती है। अगर पार्टी इस नेटवर्क को मजबूत करने में सफल रहती है तो आने वाले MLC और पंचायत चुनावों में उसे इसका राजनीतिक फायदा मिल सकता है।

3,500 किलोमीटर की पदयात्रा कर चुके हैं PK

प्रशांत किशोर के लिए बिहार की सड़कों पर उतरना कोई नई बात नहीं है। 2022 में शुरू हुई जन सुराज पदयात्रा के दौरान उन्होंने बिहार के सभी 38 जिलों में करीब 3,500 किलोमीटर का सफर किया था। गांवों और कस्बों में लोगों से सीधे संवाद का यह अभियान बाद में जन सुराज को राजनीतिक दल के रूप में खड़ा करने की आधारभूमि बना। अब बांकीपुर की जीत के बाद प्रशांत किशोर फिर उसी मॉडल को नए राजनीतिक तेवर के साथ आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं।

यानी इस बार सवाल सिर्फ यह नहीं है कि PK कितने जिलों में जाएंगे, बल्कि असली सवाल यह है कि 38 जिलों की इस यात्रा से जन सुराज को कितने नए कार्यकर्ता, कितने नए समर्थक और कितनी मजबूत राजनीतिक जमीन मिलती है। बांकीपुर से विधानसभा तक पहुंच चुके प्रशांत किशोर अब बिहार के हर कोने तक अपनी राजनीतिक पहुंच बनाने की कोशिश में जुट गए हैं।