पटना: प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का दायरा अब और व्यापक होने जा रहा है। अब उन गरीब परिवारों को भी योजना का लाभ मिल सकेगा, जिनके पास मोटरसाइकिल है या फिर पांच एकड़ तक असिंचित और ढाई एकड़ तक सिंचित जमीन है। अब केवल मोटरसाइकिल या सीमित कृषि भूमि होने के आधार पर किसी परिवार को पक्के घर की योजना से बाहर नहीं रखा जाएगा।केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को पटना के बापू सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इसकी घोषणा की। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभुकों को नए पक्के मकानों की चाबी भी सौंपी गई।
अब बाइक और जमीन नहीं बनेंगे आवास योजना में बाधा
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के नियमों में बदलाव के बाद बड़ी संख्या में ऐसे परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो अब तक कुछ संपत्ति होने के कारण योजना की पात्रता को लेकर असमंजस में रहते थे। केंद्रीय मंत्री ने साफ किया कि मोटरसाइकिल रखने वाले परिवार और पांच एकड़ असिंचित अथवा ढाई एकड़ सिंचित भूमि वाले जरूरतमंद परिवार भी अब योजना के लाभ के दायरे में आएंगे। इस फैसले का सीधा फायदा उन ग्रामीण परिवारों को हो सकता है, जिनके पास खेती के लिए सीमित जमीन है, लेकिन वे अभी भी कच्चे या जर्जर मकानों में रहने को मजबूर हैं।
बिहार को मार्च तक मिलेंगे 9,402 करोड़ रुपये
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ग्रामीण विकास योजनाओं के लिए बिहार को वित्तीय वर्ष 2026-27 में मार्च तक 9,402 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद करीब 10,800 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि भी मिलने की बात कही गई है।
इस राशि से पंचायतों में विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। औसतन प्रत्येक पंचायत को करीब 5.84 करोड़ रुपये तक की राशि उपलब्ध हो सकती है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस निवेश से केवल पंचायतों का ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार का विकास तेजी से होगा।
11 लाख से अधिक नए घरों का लक्ष्य
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिहार में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत 11 लाख 18 हजार 937 मकान बनाने का लक्ष्य पत्र मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को सौंपा। इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से 13,427 करोड़ रुपये की सहायता राशि दी जाएगी।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि पक्का मकान सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि गरीब परिवार के लिए सुरक्षा, सम्मान और आत्मविश्वास का आधार है। उन्होंने कहा कि राज्य में जरूरतमंद परिवारों को तेजी से पक्के घर उपलब्ध कराने का काम किया जा रहा है।
गरीबों को पक्का घर देने की रफ्तार हुई तेज
मुख्यमंत्री ने आवास निर्माण की रफ्तार को लेकर भी आंकड़े पेश किए। उन्होंने कहा कि 1986 से 2014 तक इंदिरा आवास योजना के तहत बिहार में करीब 30 लाख पक्के मकान बनाए गए थे, जिनमें कई आवास अधूरे भी रह गए।वहीं, 2014 से 2026 के बीच बिहार में करीब 50 लाख पक्के मकानों का आवंटन किया जा चुका है। पहले जहां औसतन हर साल करीब 1.07 लाख घर बनते थे, वहीं अब यह रफ्तार बढ़कर करीब 4.17 लाख मकान प्रति वर्ष तक पहुंच गई है।
2.35 लाख लाभुकों को मिला नए घर का तोहफा
कार्यक्रम में वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान पूरे किए गए 2 लाख 35 हजार आवासों के कुछ लाभुकों को सांकेतिक रूप से घर की चाबी सौंपी गई।इस मौके पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव, ग्रामीण कार्य मंत्री सुनील कुमार और अन्य मंत्री व अधिकारी मौजूद रहे।
फसल बीमा योजना पर भी बड़ा दावा
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा कि बिहार में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू की गई है। इसके तहत सूखा, बाढ़, आग या अन्य कारणों से फसल को नुकसान होने पर किसानों को नुकसान की भरपाई का लाभ मिल सकेगा। बिहार सरकार के 2018 के सर्वे में करीब 19 लाख परिवार पक्के मकान से वंचित पाए गए थे। ऐसे में प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता का दायरा बढ़ने से अब और अधिक जरूरतमंद परिवारों को पक्के घर का सपना पूरा होने की उम्मीद है।





