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Patna News : पटना में 60 साल पुरानी लीज खत्म! 432 एकड़ जमीन होगी फ्री-होल्ड, हजारों लोगों को मिलेगा मालिकाना हक?

Patna News: पटना नगर निगम की विशेष बैठक में 432 एकड़ पुरानी लीज संपत्तियों को फ्री-होल्ड करने के प्रस्ताव पर चर्चा। मूल आवंटी को 10% और दूसरे आवंटी को 12% शुल्क देना पड़ सकता है।

Patna News : पटना में 60 साल पुरानी लीज खत्म! 432 एकड़ जमीन होगी फ्री-होल्ड, हजारों लोगों को मिलेगा मालिकाना हक?
Tejpratap
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6 मिनट

Patna News :  राजधानी पटना में दशकों पुरानी लीज संपत्तियों को लेकर आज बड़ा फैसला हो सकता है। पटना नगर निगम बोर्ड की विशेष बैठक में शहर के नौ प्रमुख इलाकों की करीब 432 एकड़ लीज भूमि को फ्री-होल्ड करने के प्रस्ताव पर चर्चा होगी। यदि बोर्ड से प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है और बाद में राज्य सरकार व कैबिनेट की स्वीकृति मिल जाती है, तो हजारों संपत्ति धारकों के लिए मालिकाना हक पाने का रास्ता साफ हो सकता है।

इस फैसले का असर राजेंद्रनगर, कंकड़बाग, बुद्ध कॉलोनी, दीघा, मौर्यालोक, श्रीकृष्णापुरी और मीठापुर जैसे पटना के प्रमुख इलाकों पर पड़ सकता है। कई इलाकों में करीब छह दशक पहले लोगों को फ्लैट, प्लॉट, दुकान और मकान लीज पर आवंटित किए गए थे। अब इन्हें फ्री-होल्ड करने की दिशा में बड़ी पहल की जा रही है।

60 साल पुरानी लीज व्यवस्था बदलने की तैयारी

पटना में बड़ी संख्या में ऐसी संपत्तियां हैं, जिन्हें वर्षों पहले पटना सुधार न्यास और बाद में पटना क्षेत्रीय विकास प्राधिकार (PRDA) के माध्यम से लीज पर आवंटित किया गया था। समय के साथ इन संपत्तियों का प्रशासनिक नियंत्रण पटना नगर निगम के पास आ गया, लेकिन बड़ी संख्या में लीज संपत्तियां आज भी फ्री-होल्ड नहीं हो सकी हैं।

इस वजह से संपत्ति धारकों को दाखिल-खारिज, हस्तांतरण, बिक्री और पूर्ण मालिकाना हक से जुड़े मामलों में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता रहा है। अब नगर निगम इन पुरानी लीज संपत्तियों को फ्री-होल्ड करने के लिए नई नीति पर आगे बढ़ रहा है।

इन 9 इलाकों की करीब 432 एकड़ जमीन पर फैसला

नगर निगम प्रशासन ने नौ प्रमुख इलाकों की लीज संपत्तियों का आकलन किया है। इनमें कुल करीब 432 एकड़ भूमि शामिल है। सबसे बड़ा हिस्सा राजेंद्रनगर योजना संख्या-1 का है।

प्रमुख इलाकों में शामिल जमीन का विवरण इस प्रकार है—

  • राजेंद्रनगर योजना संख्या-1 – 198 एकड़

  • कंकड़बाग, PIT कॉलोनी – 5.50 एकड़

  • मौजा दुजरा, बुद्ध कॉलोनी – 27.70 एकड़

  • चितकोहरा, मईचक, बेडर व हरनीचक – 18.03 एकड़

  • दीघा, गंगा किनारे – 13 एकड़

  • मौर्यालोक व्यावसायिक परिसर – 7.21 एकड़

  • श्रीकृष्णापुरी आवासीय कॉलोनी – 64 एकड़

  • मीठापुर – 59.69 एकड़

  • जकरियापुर – 38.94 एकड़

इन इलाकों में केवल आवासीय संपत्तियां ही नहीं, बल्कि दुकान और अन्य व्यावसायिक संपत्तियां भी शामिल हैं। ऐसे में फ्री-होल्ड की नीति लागू होने से बड़ी संख्या में लोगों को फायदा मिलने की संभावना है।

मूल आवंटी को 10%, दूसरे आवंटी को 12% शुल्क का प्रस्ताव

विशेष बैठक में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा फ्री-होल्ड के लिए तय किए जाने वाले शुल्क का होगा। प्रस्ताव के अनुसार, मूल आवंटी से वर्तमान सर्किल रेट यानी एमबीआर का 10 प्रतिशत शुल्क लिया जा सकता है। वहीं, संपत्ति के दूसरे आवंटी को 12 प्रतिशत शुल्क देना पड़ सकता है।

शुल्क जमा करने के बाद संबंधित लीज धारक को संपत्ति पर फ्री-होल्ड मालिकाना हक देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो दशकों से लीज पर रह रहे लोगों को अपनी संपत्ति पर अधिक स्पष्ट और मजबूत मालिकाना अधिकार मिल सकता है।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद बदला रुख

इस पूरे मामले में अदालत का एक पुराना आदेश भी अहम माना जा रहा है। 20 अगस्त 2024 को हाईकोर्ट ने फ्री-होल्ड प्रक्रिया में निगम द्वारा 50 प्रतिशत लाभांश की मांग को अवैध बताते हुए उसे खारिज कर दिया था। इसके बाद फ्री-होल्ड के लिए शुल्क को अपेक्षाकृत कम रखने की दिशा में विचार शुरू हुआ। अब मूल आवंटी के लिए 10 प्रतिशत और द्वितीय आवंटी के लिए 12 प्रतिशत शुल्क का प्रस्ताव सामने आया है। माना जा रहा है कि इससे वर्षों से फ्री-होल्ड की प्रक्रिया का इंतजार कर रहे संपत्ति धारकों को राहत मिल सकती है।

नगर निगम को भी मिल सकता है 200 करोड़ तक का राजस्व

फ्री-होल्ड नीति से केवल संपत्ति मालिकों को ही फायदा नहीं होगा, बल्कि पटना नगर निगम के खजाने में भी बड़ी राशि आ सकती है। नगर निगम प्रशासन का अनुमान है कि इन लीज संपत्तियों को फ्री-होल्ड करने की प्रक्रिया से करीब 150 से 200 करोड़ रुपये तक का राजस्व प्राप्त हो सकता है।

अदालती विवाद और लंबे समय से चल रही मुकदमेबाजी के कारण नगर निगम को राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में बिहार राज्य आवास बोर्ड और BIADA की तर्ज पर लीज संपत्तियों को फ्री-होल्ड करने की नीति अपनाने पर विचार किया जा रहा है।

बोर्ड की मंजूरी के बाद भी बाकी है लंबी प्रक्रिया

हालांकि, आज होने वाली विशेष बैठक में नगर निगम बोर्ड की मंजूरी अंतिम फैसला नहीं होगी। बोर्ड से प्रस्ताव पारित होने के बाद इसे राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा। इसके बाद कैबिनेट की मंजूरी मिलने पर ही फ्री-होल्ड की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा सकेगा। नगर निगम की पिछली बोर्ड बैठक में लीज संपत्तियों का पूरा ब्योरा संलेख में शामिल नहीं होने पर पार्षदों ने आपत्ति जताई थी। इसी कारण अब विशेष बैठक बुलाकर पूरे प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की जा रही है।

यदि प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो पटना की हजारों पुरानी संपत्तियां करीब छह दशक पुरानी लीज व्यवस्था से निकलकर फ्री-होल्ड मालिकाना हक की दिशा में बढ़ सकती हैं। खासकर संपत्ति के हस्तांतरण, बिक्री और दाखिल-खारिज से जुड़े मामलों में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर, आज की बैठक पटना के नौ प्रमुख इलाकों में फैली करीब 432 एकड़ लीज संपत्ति के भविष्य के लिए बेहद अहम साबित हो सकती है। नगर निगम बोर्ड की मुहर और उसके बाद राज्य सरकार की मंजूरी मिलने पर राजधानी के हजारों लोगों की वर्षों पुरानी मालिकाना हक की समस्या दूर हो सकती है।