1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sat, 31 Jan 2026 06:48:45 AM IST
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Patna NEET student case : पटना के बहुचर्चित NEET छात्रा कांड की जांच का मामला पटना हाईकोर्ट पहुंच गया है। इस गंभीर मामले की CBI से जांच कराने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में बिहार पुलिस के कामकाज और उसकी SIT की जांच पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। यह याचिका आनंद लीगल एड फोरम ट्रस्ट की ओर से रिंकू रानी ने दाखिल किया है।
मामले की जांच CBI को सौंपने की मांग
याचिका में हाईकोर्ट से मांग की गई है कि नीट छात्रा की मौत को लेकर पटना के चित्रगुप्त नगर थाना में दर्ज FIR संख्या 14/2026 (दिनांक 09 जनवरी 2026) की जांच तत्काल CBI को सौंपी जाए। CBI इस मामले में नया केस दर्ज कर स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करे ताकि न्याय हो सके.
याचिका में कहा गया है कि पीड़िता 17 वर्ष 4 माह की नाबालिग NEET अभ्यर्थी थी। यह मामला केवल आत्महत्या का नहीं बल्कि गैंगरेप, हत्या और संगठित अपराध से जुड़ा हो सकता है। बिहार पुलिस की ओर से गठित SIT न तो स्वतंत्र है और न ही निष्पक्ष जांच कर पायी है।
पुलिस अधिकारियों पर आरोप
याचिका में कई पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक पदाधिकारियों पर लापरवाही और मिलीभगत के आरोप लगाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि जांच में आपराधिक लापरवाही (criminal negligence) और जांच में चूक हुई है. सबूतों से छेड़छाड़ (tampering of evidence) की आशंका है. अगर CCTV फुटेज को समय रहते जब्त नहीं किया गया तो सच सामने नहीं आयेगा. कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने जांच पूरी होने से पहले ही इसे आत्महत्या घोषित कर दिया, जो न्याय प्रक्रिया के खिलाफ है.
हाईकोर्ट से क्या है मांग
याचिका में हाईकोर्ट से कई अहम निर्देश देने की मांग की गई है. कोर्ट से अपील की गयी है कि वह इस मामले की CBI जांच का आदेश दे. जांच का नेतृत्व CBI के IG रैंक के अधिकारी करें. वहीं, जांच की निगरानी पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने की मांग भी की गयी है. याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से मांग की है कि वह सीबीआई को 6 महीने के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दे.
याचिका में यह भी कहा गया है कि CCTV और डिजिटल सबूत सुरक्षित रखें जायें. शंभू गर्ल्स हॉस्टल, सहज क्लिनिक (डॉ. सहजयानंद प्रसाद सिंह), प्रभात मेमोरियल अस्पताल और पटना रेलवे स्टेशन से हॉस्टल तक के रास्ते. इन सभी स्थानों के 5 जनरी से 11 जनवरी 2026 तक के CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश देने की मांग की गई हैय
SIT की जांच पर भी सवाल
याचिका में कहा गया है कि SIT का गठन 16 जनवरी 2026 को DGP के आदेश से किया गया. लेकिन यह SIT न तो स्वतंत्र है और न ही पारदर्शी. याचिका में SIT की कार्यप्रणाली को लेकर प्रशासनिक विफलता का भी आरोप लगाया गया है.
पीड़िता के साथ क्या हुआ
याचिका के अनुसार पीड़िता 5 जनवरी 2026 को जहानाबाद से पटना हॉस्टल पहुंची. उसी रात उसने अपने माता-पिता से फोन पर बात की लेकिन अगले दिन 6 जनवरी को वह बेहोश हालत में मिली. बिना परिजनों को सूचना दिए उसे निजी क्लिनिक (सहज क्लिनिक) ले जाया गया. यहीं से पूरे मामले पर संदेह और गहरा होता है. अब देखना है कि पटना हाईकोर्ट इस मामले में क्या फैसला सुनाती है. Photo बनाएं