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पटना में जजों की अनोखी शादी: सात फेरे और सिंदूरदान की जगह ली गयी संविधान की शपथ

PATNA: पटना के आम्रपाली रेस्टोरेंट में बिहार के जजों की अनोखी शादी हुई। इस शादी में ना तो बैंड बाजा था और ना ही बाराती। बिना सिंदूरदान और अग्नि के सात फेरे के ही यह विवाह संपन

पटना में जजों की अनोखी शादी: सात फेरे और सिंदूरदान की जगह ली गयी संविधान की शपथ
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

PATNA: पटना के आम्रपाली रेस्टोरेंट में बिहार के जजों की अनोखी शादी हुई। इस शादी में ना तो बैंड बाजा था और ना ही बाराती। बिना सिंदूरदान और अग्नि के सात फेरे के ही यह विवाह संपन्न हुई। संविधान की शपथ लेते ही वर-वधू विवाह के बंधन में बंध गये। खगड़िया सिविल कोर्ट के जज आदित्य प्रकाश और पटना सिविल कोर्ट की जज आयुषी कुमारी की शादी बिना दान दहेज और बिना किसी परंपरा के सोमवार को संपन्न हुई। 


आयुषी पूर्णेन्दू नगर फुलवारीशरीफ की रहने वाली हैं वही आदित्य प्रकाश हाजीपुर के युसूफपुर के रहने वाले हैं। इसे अनोखी शादी इसलिए कह सकते है क्योंकि यह शादी बिल्कुल अलग अंदाज में दिन में संपन्न हुई। इस शादी में ना तो सिंदूरदान की परंपरा हुई और ना ही अग्नि के सात फेरे ही लिए गये। यही नहीं यह विवाह बिना बैंड बाजा और बाराती के ही एक घंटे के भीतर संपन्न हो गयी। इस शादी का निमंत्रण पत्र भी अनोखा था जिसे शपथ पत्र को ध्यान में रखते हुए छपवाया गया था। संविधान की शपथ लेकर दोनों विवाह के बंधन में बंध गये। 


पटना के आम्रपाली रेस्टोरेंट में शादी समारोह का आयोजन हुआ था। इस अनोखे विवाह समारोह में वर और कन्या पक्ष से महज 100 लोग शामिल हुए। जिनके लिए खाने की भी व्यवस्था की गयी थी। जयमाला के बाद दूल्हे ने यह शपथ ली- 'मैं अपनी पत्नी को अधिकार देता हूं कि वह अब सिंदूर का इस्तेमाल सौंदर्य प्रसाधन के रूप में करेगी।' दूल्हे ने जब शपथ लिया तब दुल्हन ने भी शपथ पत्र को पढ़ा। जिसके बाद दोनों एक दूसरे के हो गये। 


पटना में जजों की अनोखी शादी: सात फेरे और सिंदूरदान की जगह ली गयी संविधान की शपथ


ज्यादातर शादियों में लोग डेकोरेशन,लाइटिंग,बैंड बाजा,ऑर्केस्ट्रा या डीजी के साथ-साथ कई तरह के खर्च करते हैं ताकि शादी को यादगार बनाया जा सके। ऐसी व्यवस्था करने के लिए कभी-कभी वधू पक्ष के लोगों को कर्ज लेकर बेटी की शादी का इंतजाम तक करना पड़ जाता है। लेकिन बिहार के जजों की शादी दो परिवार की आपसी सहमति से कम से कम खर्च पर दिन में ही संपन्न हो गयी। वर-वधू ने सादगी की जो मिसाल पेश की है इससे समाज में अच्छा संदेश जाएगा। लोग बिना दहेज की शादी के लिए प्रेरित होंगे और फिजुलखर्ची भी रुकेगी।



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