Panchayat Secretary Scam : बिहार पंचायत सचिव का बड़ा कारनामा, डकार गए 1 करोड़ से अधिक की सरकारी राशि; FIR दर्ज

मसौढ़ी प्रखंड के पंचायत सचिव रमाकांत गिरी पर 1 करोड़ 6 लाख रुपये से अधिक की सरकारी राशि गबन का आरोप लगा है। जिलाधिकारी की जांच के बाद मसौढ़ी थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sun, 08 Feb 2026 10:52:32 AM IST

Panchayat Secretary Scam : बिहार पंचायत सचिव का बड़ा कारनामा, डकार गए 1 करोड़ से अधिक की सरकारी राशि; FIR दर्ज

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Panchayat Secretary Scam : पटना जिले के मसौढ़ी प्रखंड से सरकारी राशि के गबन का एक गंभीर मामला सामने आया है। मसौढ़ी प्रखंड के पंचायत सचिव रमाकांत गिरी (पिता स्वर्गीय भागवत गिरी) पर एक करोड़ छह लाख 44 हजार 321 रुपये की सरकारी राशि के गबन का आरोप लगा है। इस मामले में मसौढ़ी थाने में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। यह कार्रवाई जिलाधिकारी पटना द्वारा कराई गई जांच के बाद की गई है।


जानकारी के अनुसार, यह मामला वित्तीय वर्ष 2020-21 से जुड़ा हुआ है, जब रमाकांत गिरी मोकामा प्रखंड में पंचायत सचिव के पद पर कार्यरत थे। उस समय उनके पास कुल 15 पंचायतों का प्रभार था। इन पंचायतों में 15वीं वित्त आयोग की योजनाओं के तहत नल-जल योजना, नाली-गली निर्माण, पंचायत सरकार भवन, स्वच्छता समेत कई महत्वपूर्ण विकास योजनाओं का संचालन किया जाना था।


जांच में सामने आया कि इन योजनाओं के अंतर्गत जारी की गई सरकारी राशि का न तो समुचित ऑडिट कराया गया और न ही किसी प्रकार का लेखा-जोखा विभाग को सौंपा गया। यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि किस योजना में कितनी राशि खर्च की गई, कार्य कहां और किस मद में कराया गया। इस गंभीर वित्तीय अनियमितता को लेकर जिलाधिकारी ने मामले की जांच के आदेश दिए थे।


जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट में अनुशासनहीनता, सरकारी दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही और वित्तीय अनियमितता की पुष्टि हुई। जांच में यह भी सामने आया कि पंचायत सचिव ने जांच प्रक्रिया में सहयोग नहीं किया और विभागीय दिशा-निर्देशों की अवहेलना की। इसके बाद जिलाधिकारी पटना ने मसौढ़ी के प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रभाकर कुमार को मसौढ़ी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया।


प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पंचायत सचिव रमाकांत गिरी पर सरकारी राशि के गबन, वित्तीय अनियमितता और कर्तव्य पालन में लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम पटना ने उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का भी आदेश दिया था।


हालांकि वर्तमान समय में रमाकांत गिरी मसौढ़ी प्रखंड के रेवां पंचायत में कार्यरत थे, लेकिन उनके खिलाफ मामला बख्तियारपुर प्रखंड से संबंधित है। बख्तियारपुर प्रखंड में भी 15वीं वित्त आयोग की योजनाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। वहां के बीडीओ द्वारा की गई जांच में नल-जल योजना, नाली-गली निर्माण और पंचायत सरकार भवन के निर्माण कार्यों में ऑडिट न कराए जाने की पुष्टि हुई है।


फिलहाल पुलिस पूरे मामले की छानबीन कर रही है। प्रशासन का कहना है कि दोषी पाए जाने पर आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला पंचायत स्तर पर वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।