Nursing admission scam : "ससुराल में रहो, पढ़-लिखकर क्या करोगी?" नर्सिंग एडमिशन के नाम पर 70 हजार की ठगी, मास्टरमाइंड गिरफ्तार; जानिए फिर भी क्यों पुलिस पर उठे सवाल

कटिहार में नर्सिंग एडमिशन के नाम पर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। फर्जी ट्रस्ट के जरिए एक गरीब परिवार से 70 हजार रुपये वसूले गए। मामले में मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के बाद अब स्थानीय पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sun, 08 Feb 2026 11:30:53 AM IST

Nursing admission scam : "ससुराल में रहो, पढ़-लिखकर क्या करोगी?" नर्सिंग एडमिशन के नाम पर 70 हजार की ठगी, मास्टरमाइंड गिरफ्तार; जानिए फिर भी क्यों पुलिस पर उठे सवाल

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Nursing admission scam : कटिहार जिले के मनिहारी क्षेत्र में नर्सिंग की पढ़ाई के नाम पर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्था और स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फर्जी ‘गैप इंस्टीट्यूट एंड टेक्नोलॉजी वेलफेयर ट्रस्ट’ की आड़ में युवाओं को झांसे में लेकर ठगी करने वाले आरोपी मो. फंटूश उर्फ आर्यन सिंह को पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गठित एसआईटी ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। हालांकि मामले के कई पहलू अभी भी सामने आ रहे हैं, जिससे इस गिरोह की जड़ें गहरी होने की आशंका जताई जा रही है।


ताजा मामले में गोविंदपुर दीरा निवासी नागेश्वर मंडल ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी जुली कुमारी को नर्सिंग कोर्स में दाखिले का झांसा देकर 70 हजार रुपये ठग लिए गए। पीड़ित के मुताबिक उनकी बेटी फलका स्थित केवाईसी सेंटर में कंप्यूटर सीखने जाती थी, जहां शिक्षक कृष्ण कुमार ने ही उसे नर्सिंग कोर्स में दाखिले का सपना दिखाया और आरोपी आर्यन सिंह से मिलवाया। इसके बाद आर्यन सिंह और उसके सहयोगी आशीष पंडित ने मिलकर अलग-अलग किस्तों में पीड़ित परिवार से पैसे वसूल लिए।


पीड़ित परिवार ने ट्रांजैक्शन के पुख्ता सबूत भी पेश किए हैं। जानकारी के अनुसार 5 नवंबर 2024 को 20 हजार रुपये यूपीआई के माध्यम से लिए गए। इसके बाद 9 अप्रैल 2025 को 28 हजार रुपये नकद और 2 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए लिए गए। फिर 23 अप्रैल 2025 को 10 हजार और 3 मई 2025 को 10 हजार रुपये की वसूली की गई। इस तरह कुल 70 हजार रुपये ठग लिए गए। पैसे लेने के बावजूद आरोपियों ने नर्सिंग कोर्स में दाखिला नहीं कराया।


जब पीड़ित परिवार ने पैसे वापस मांगे या पढ़ाई शुरू कराने की बात कही तो आरोपियों ने कथित तौर पर धमकी दी। पीड़ित के अनुसार आरोपियों ने उनकी बेटी से कहा कि अब उसकी शादी हो चुकी है और उसे पढ़ाई करने की जरूरत नहीं है। इस बयान ने आरोपी गिरोह की मानसिकता को उजागर कर दिया है।


मामले का सबसे चिंताजनक पहलू फलका पुलिस की भूमिका को लेकर सामने आया है। नागेश्वर मंडल ने 21 जुलाई 2025 को साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई थी, जहां से जांच कर विधि सम्मत कार्रवाई का निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद फलका पुलिस ने कथित रूप से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिससे स्थानीय स्तर पर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती तो पीड़ित परिवार को राहत मिल सकती थी।


हालांकि पुलिस अधीक्षक शिखर चौधरी द्वारा मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी को बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है, लेकिन पीड़ित परिवार अभी भी न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है। परिवार का कहना है कि उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक पीड़ा भी झेलनी पड़ी है। अब लोगों की नजर प्रशासन पर टिकी है कि बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।