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सावधान! पटना में काम कर रहा जमीन कब्जा और फर्जी रजिस्ट्री का संगठित नेटवर्क, 5 साल में बढ़े मामले; निशाने पर बुजुर्ग और प्रवासी

Patna Land Mafia: पटना में जमीन कब्जा और फर्जी रजिस्ट्री के मामलों में बड़ा खुलासा हुआ है। पिछले 5 वर्षों में 136% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसमें साइबर तकनीक, फर्जी दस्तावेज और संगठित गिरोहों की भूमिका सामने आई है।

Patna Land Mafia
प्रतिकात्मक तस्वीर
© AI
Mukesh Srivastava
3 मिनट

Patna Land Mafia: राजधानी पटना में जमीन कब्जा और फर्जी रजिस्ट्री का खेल अब केवल दबंगई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह साइबर तकनीक और डिजिटल रिकॉर्ड के सहारे चलने वाला एक संगठित अपराध बन चुका है। जांच में सामने आया है कि भू-माफियाओं ने जाली पहचान पत्र, ऑनलाइन रिकॉर्ड और साइबर तकनीक का इस्तेमाल कर एक बड़ा नेटवर्क तैयार कर लिया है।


पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त जांच के अनुसार वर्ष 2021 की तुलना में 2025 तक जमीन से जुड़े अपराधों में 136 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक पटना में हत्या के कई मामलों की जड़ भी जमीन विवाद ही पाया गया है। जांच रिपोर्ट बताती है कि भू-माफियाओं का सबसे आसान निशाना वे संपत्तियां हैं जिनके मालिकों की मृत्यु हो चुकी है, या जो अकेले रह रहे बुजुर्गों और बाहर रहने वाले प्रवासियों की हैं।


वर्ष 2021 में मृत व्यक्तियों की जमीन से जुड़े 11 मामले थे, जो 2025 में बढ़कर 39 हो गए। यह 254 प्रतिशत की वृद्धि है। कुल 312 मामलों में से 118 मामले (37.8%) सीधे तौर पर मृत व्यक्तियों की जमीन हड़पने से जुड़े हैं, जिनमें फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और नकली वारिस तैयार करने जैसे मामले शामिल हैं।


60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों से जुड़े मामलों में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 2021 में 9 मामले थे, जो 2025 में बढ़कर 25 हो गए, यानी 177 प्रतिशत की वृद्धि। कुल मामलों में बुजुर्गों की हिस्सेदारी 27.5 प्रतिशत रही। वहीं दूसरे राज्यों या शहरों में रहने वाले प्रवासी परिवारों के 74 मामले (23.7 प्रतिशत) ऐसे पाए गए, जिनकी जमीन की नियमित देखरेख नहीं हो पाती।


जांच में यह भी सामने आया है कि भूमि सर्वे, ऑनलाइन खाता-खेसरा और नगर निगम टैक्स रिकॉर्ड जैसे डिजिटल डेटा अब अपराधियों के लिए बड़ा हथियार बन चुके हैं। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार साइबर अपराधियों और भू-माफियाओं के बीच सीधा गठजोड़ बन गया है। डेटा लीक और साइबर सेंधमारी के जरिए जमीन से जुड़ी जानकारी हासिल की जा रही है।


पांच वर्षों में 47 मामलों में फर्जी आधार कार्ड, 29 मामलों में नकली पैन कार्ड और 63 मामलों में फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी का इस्तेमाल कर जमीन ट्रांसफर की कोशिश की गई। वहीं मोबाइल नंबर और ओटीपी से जुड़े साइबर मामलों में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जमीन की बढ़ती कीमतों ने पटना के बाहरी इलाकों को अपराधियों के लिए सबसे आकर्षक बना दिया है।


कंकड़बाग: 41 मामले

दानापुर: 38 मामले

बिहटा: 34 मामले

फुलवारीशरीफ: 29 मामले

संपतचक: 24 मामले

इसके अलावा शहर के बाहरी क्षेत्रों में खाली पड़े प्लॉटों पर कब्जे के 52 मामले दर्ज किए गए हैं। 

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता