Patna hostel murder : एक सुलझा नहीं दूसरा उलझा : NEET केस के बीच एक और छात्रा की हत्या ! परिजनों ने मुसाहीद रेजा और मुकर्रम रेजा पर लगाए गंभीर आरोप; ‘क्या छात्राएं हॉस्टल में सुरक्षित नहीं?

पटना में नीट छात्रा केस अभी शांत भी नहीं हुआ था कि राजधानी के एक और हॉस्टल कांड ने सनसनी फैला दी। औरंगाबाद की 15 वर्षीय छात्रा की डेड बॉडी 6 जनवरी को पटना के एग्जिबिशन रोड स्थित “परफेक्ट गर्ल्स पी.जी. हॉस्टल” में मिली।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mon, 19 Jan 2026 03:29:06 PM IST

Patna hostel murder : एक सुलझा नहीं दूसरा उलझा :  NEET केस के बीच एक और छात्रा की हत्या ! परिजनों ने मुसाहीद रेजा और मुकर्रम रेजा पर लगाए गंभीर आरोप; ‘क्या छात्राएं हॉस्टल में सुरक्षित नहीं?

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Patna hostel murder : पटना में नीट छात्रा केस का मामला अभी पूरी तरह सुलझा भी नहीं था कि राजधानी के एक और हॉस्टल में एक और छात्रा की हत्या की सनसनीखेज घटना सामने आई है। यह मामला औरंगाबाद की 15 वर्षीय छात्रा की है, जिसकी डेड बॉडी 6 जनवरी को पटना के एग्जिबिशन रोड स्थित “परफेक्ट गर्ल्स पी.जी. हॉस्टल” में मिली। परिजनों ने इस घटना को साजिश के तहत हत्या करार दिया है और हॉस्टल संचालक व अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।


इस मामले ने फिर से एक बार पटना के हॉस्टल्स की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभी नीट छात्रा के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले की जांच चल ही रही थी कि एक और छात्रा की हत्या ने सबको हिलाकर रख दिया है।


परिजनों ने एफआईआर में क्या-क्या आरोप लगाए?

परिजनों की ओर से दर्ज एफआईआर में कई नाम शामिल किए गए हैं। आरोप के अनुसार, मुसाहीद रेजा, मुकर्रम रेजा (हॉस्टल के संचालक), वार्डेन खुशबू कुमारी (हॉस्टल की इंचार्ज), और छात्रा की एक सहेली समेत अन्य अज्ञात लोगों को शामिल किया गया है।


एफआईआर में यह भी उल्लेख किया गया है कि छात्रा की डेड बॉडी को पुलिस और परिजनों की मौजूदगी के बिना ही उसके बिस्तर पर रखा गया। जब पुलिस मौके पर पहुंची, तब उसे पुलिस वाहन से पीएमसीएच (पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल) ले जाया गया। परिजनों का दावा है कि उन्होंने छात्रा की बॉडी और वीडियो रिकॉर्डिंग देखकर यह सुनिश्चित कर लिया कि उनकी बेटी की हत्या साजिश के तहत की गई है। इसलिए उन्होंने पुलिस से इस मामले की कड़ी जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।


क्या पटना में छात्राएं हॉस्टल में सुरक्षित नहीं?

पटना में पिछले कुछ महीनों में छात्राओं के साथ लगातार ऐसे गंभीर घटनाक्रम सामने आ रहे हैं कि लोगों के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या छात्राएं हॉस्टल में सुरक्षित नहीं हैं। नीट छात्रा केस भी एक हॉस्टल से जुड़ा हुआ था और अब यह दूसरा मामला भी हॉस्टल में ही सामने आया है। इससे यह आशंका और भी मजबूत हो गई है कि हॉस्टल्स में सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर केवल दिखावा हो रहा है।


सुरक्षा का प्रश्न

छात्राओं को पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों में आना पड़ता है, लेकिन यहां उन्हें सुरक्षा की कमी के कारण अपनी जान गंवानी पड़ रही है। यह स्थिति न सिर्फ परिजनों के लिए चिंता का कारण बन रही है, बल्कि समाज में भी गहरा आक्रोश पैदा कर रही है। परिजनों का आरोप है कि हॉस्टल संचालक, वार्डेन और अन्य लोगों की मिलीभगत से यह घटना हुई है। यदि यह सच साबित होता है, तो यह सीधे तौर पर हॉस्टल प्रबंधन की जिम्मेदारी और जवाबदेही पर सवाल उठाता है।


कानूनी कार्रवाई और जांच का दबाव

नीट छात्रा मामले में अभी एसआईटी जांच कर रही है और विपक्ष भी न्याय की मांग कर रहा है। इसी बीच एक और छात्रा की हत्या की घटना ने प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है कि वह मामले को गंभीरता से लें और जल्द से जल्द आरोपियों को पकड़े। परिजनों का कहना है कि वे इस मामले में न्याय चाहते हैं और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।


समाज में बढ़ती चिंता और सरकार की भूमिका

इन दोनों मामलों ने पटना के हॉस्टल्स और छात्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। क्या हॉस्टल संचालक छात्रों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठा रहे हैं? क्या हॉस्टल में कैमरे, सुरक्षा गार्ड, प्रवेश-नियंत्रण और छात्रों की जांच जैसी व्यवस्थाएं हैं?क्या सरकार और प्रशासन हॉस्टल रजिस्ट्रेशन, नियमित निरीक्षण और सुरक्षा मानकों को लागू कर रहे हैं? इन सवालों के जवाब अब जरूरी हो गए हैं।


पटना में छात्राओं के साथ हो रही इन घटनाओं ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा के नाम पर शहर में आने वाली छात्राओं की सुरक्षा को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। हॉस्टल प्रबंधन, प्रशासन और पुलिस को मिलकर ऐसी व्यवस्था बनानी होगी कि छात्राओं को न सिर्फ पढ़ाई का माहौल मिले, बल्कि उन्हें जीवन और सुरक्षा का भरोसा भी मिले।यदि यही हाल रहा, तो सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि कई छात्राओं की जान खतरे में होगी। इसलिए इस मामले में त्वरित और निष्पक्ष जांच के साथ कड़े कदम उठाना अब प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी बन चुकी है।