Patna High Court : पटना हाईकोर्ट 15 साल के नाबालिग को 2 महीने जेल में रखने पर हुआ सख्त, सरकार को दिया यह आदेश

पटना हाईकोर्ट ने मधेपुरा में 15 साल के नाबालिग छात्र की अवैध गिरफ्तारी और दो माह जेल में रहने के मामले में राज्य सरकार को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mon, 12 Jan 2026 01:20:52 PM IST

Patna High Court : पटना हाईकोर्ट 15 साल के नाबालिग को 2 महीने जेल में रखने पर हुआ सख्त, सरकार को दिया यह आदेश

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Patna High Court : पटना हाईकोर्ट ने एक नाबालिग छात्र की पुलिस द्वारा अवैध रूप से गिरफ्तारी और दो माह जेल में रखने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद की खंडपीठ ने छात्र के परिजनों द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई करते हुए इस गिरफ्तारी को असंवैधानिक करार दिया और राज्य सरकार को पांच लाख रुपये मुआवजा पीड़ित छात्र को देने का निर्देश दिया।


मामला मधेपुरा जिले का है, जहां दो समूहों के बीच हुई मारपीट के सिलसिले में 23 अक्टूबर 2025 को पुलिस ने नाबालिग छात्र को गिरफ्तार किया। एफआईआर में पुलिस ने उसकी उम्र 19 साल बताई थी, जबकि वास्तविकता में वह मात्र 15 साल का था। गिरफ्तारी के बाद छात्र को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया। दो महीने तक जेल में रहने के बावजूद उसके खिलाफ न तो कोई ठोस सबूत मिले और न ही चार्जशीट दाखिल की गई।


कोर्ट ने कहा कि यह गिरफ्तारी और जेल में रखना संविधान और नाबालिगों के अधिकारों का उल्लंघन है। अदालत ने स्पष्ट किया कि “अदालत संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और वह मूक दर्शक नहीं रह सकती। यह स्पष्ट है कि अधिकारियों ने अपनी शक्ति का दुरुपयोग किया है।”


कोर्ट ने पांच लाख रुपये मुआवजे का आदेश दिया और कहा कि यह राशि दोषी अधिकारियों से वसूल की जाए। इसके अतिरिक्त, मुकदमे के खर्च के रूप में 15,000 रुपये याचिकाकर्ता को देने का भी निर्देश दिया गया। अदालत ने छह महीने के भीतर मुआवजा और खर्च वसूलने का समय तय किया।


सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मधेपुरा जिला के पुलिस अधिकारियों और मजिस्ट्रेट की भूमिका पर भी सवाल उठाए। न्यायालय ने कहा कि मजिस्ट्रेट भी छात्र की स्वतंत्रता की रक्षा करने में विफल रहे, जिससे छात्र को दो माह से अधिक समय तक जेल में रह कर मानसिक और शारीरिक कष्ट झेलना पड़ा।


कोर्ट ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया कि इस मामले की पूरी जांच कर लापरवाह अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही, राज्य सरकार को भी निर्देश दिए गए कि नाबालिग की अवैध गिरफ्तारी को अन्याय मानते हुए पीड़ित परिवार को मुआवजा दिया जाए।


इस आदेश के बाद कानून और मानवाधिकार विशेषज्ञों ने इसे बच्चों और नाबालिगों के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उनका कहना है कि इस प्रकार के आदेश न केवल पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाते हैं, बल्कि भविष्य में अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारियों के प्रति सतर्क भी करते हैं।


कोर्ट ने जोर देकर कहा कि बच्चों और युवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना हर सरकारी अधिकारी की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नाबालिगों के अधिकार का उल्लंघन केवल कानूनी अपराध नहीं, बल्कि नैतिक अपराध भी है। पटना हाईकोर्ट का यह फैसला न केवल नाबालिग छात्र के लिए न्याय दिलाने वाला है, बल्कि पूरे राज्य में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के लिए चेतावनी भी है कि वे अपने अधिकारों का दुरुपयोग न करें।