NEET student death case : हत्या या साजिश ! नीट छात्रा के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, आखिर किसके दवाब में बिना प्रूफ पुलिस ने दिया सुसाइड करार ? अब उठ रहे गंभीर सवाल

पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की मौत पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। शरीर पर जख्म और नाखून के निशान मिलने के बाद आत्महत्या के दावे पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Fri, 16 Jan 2026 08:21:11 AM IST

NEET student death case : हत्या या साजिश !  नीट छात्रा के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, आखिर किसके दवाब में बिना प्रूफ पुलिस ने दिया सुसाइड करार ? अब उठ रहे गंभीर सवाल

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NEET student death case : चित्रगुप्त नगर स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की मौत अब एक रहस्यमय आत्महत्या नहीं, बल्कि संभावित दुष्कर्म और सुनियोजित हत्या की ओर इशारा कर रही है। पीएमसीएच के मेडिकल बोर्ड द्वारा की गई पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद इस पूरे मामले ने नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। रिपोर्ट में छात्रा के शरीर पर 10 से अधिक गंभीर जख्म, अंदरूनी हिस्सों में चोट, गर्दन, कंधे और अन्य अंगों पर नाखून से खरोंच के स्पष्ट निशान पाए गए हैं। ये निशान इस बात की ओर संकेत करते हैं कि छात्रा ने हमले से बचने के लिए भरपूर संघर्ष किया


पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अहम खुलासे

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, छात्रा के शरीर पर पाए गए जख्म सामान्य गिरने या दुर्घटना से मेल नहीं खाते। नाखून के निशान और अंदरूनी चोटें इस आशंका को और मजबूत करती हैं कि छात्रा के साथ जबरन हिंसा की गई। इसके साथ ही यह भी आशंका जताई गई है कि घटना से पहले छात्रा को नशे की सुई या कोई नशीला पदार्थ दिया गया हो, जिससे वह अचेत हो गई और विरोध करने की स्थिति में नहीं रही।


डॉक्टरों की रिपोर्ट और पुलिस का इनकार

अस्पताल सूत्रों का दावा है कि जिन अस्पतालों में छात्रा का इलाज हुआ, वहां के डॉक्टरों ने शरीर पर नाखून के निशान और चोटों की जानकारी लिखित रूप में पुलिस को दी थी। इसके बावजूद पुलिस ने लंबे समय तक इस तथ्य से इनकार किया। इस बीच, पुलिस अधिकारी द्वारा मीडिया को दिया गया बयान भी सवालों के घेरे में है। अधिकारी ने कहा था कि “नशे में गिरने के कारण छात्रा को चोट लगी होगी।” इस बयान के बाद पुलिस की मंशा और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।


इलाज में लापरवाही या साजिश?

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के बाद अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या छात्रा की मौत एक सुनियोजित साजिश का परिणाम है। सवाल यह भी उठ रहा है कि छात्रा को अचेत अवस्था में किसी बड़े और बेहतर अस्पताल में क्यों नहीं ले जाया गया।आरोप है कि पास में मौजूद बड़े अस्पतालों के बजाय छात्रा को ऐसे निजी अस्पताल में ले जाया गया, जहां गायनी या संबंधित विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं थे। इलाज के दौरान उसकी हालत बिगड़ती चली गई और अंततः उसकी मौत हो गई।


परिजनों से मिलने से रोका गया

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि निजी अस्पताल में इलाज के दौरान परिजनों को छात्रा से मिलने तक नहीं दिया गया। इससे संदेह और गहरा हो गया है कि कहीं सबूत छिपाने या सच्चाई दबाने की कोशिश तो नहीं की गई। परिजनों का आरोप है कि अगर समय रहते सही इलाज और पारदर्शिता होती, तो शायद छात्रा की जान बचाई जा सकती थी।


पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पहले आत्महत्या का दावा

मामले की शुरुआत में पुलिस ने छात्रा की मौत को आत्महत्या करार दिया था। पुलिस का दावा था कि छात्रा ने नींद की गोलियां खाकर जान दी, और मौके से भारी मात्रा में नींद की गोलियां बरामद होने की बात भी कही गई थी। यहां तक कि पुलिस ने यह भी कहा कि छात्रा के मोबाइल फोन में आत्महत्या से जुड़ी बातें सामने आई हैं। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद यह दावा अब कमजोर पड़ता दिख रहा है।


आंदोलन के बाद बदली पुलिस की चाल

सोमवार को पीएमसीएच में मेडिकल बोर्ड द्वारा पोस्टमार्टम किए जाने के बाद जब रिपोर्ट के संकेत बाहर आए, तब परिजन और परिचित सड़क पर उतर आए। विरोध प्रदर्शन तेज होने के बाद ही पुलिस ने प्रारंभिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए पहले दुष्कर्म की बात से इनकार किया था। लेकिन अब मेडिकल रिपोर्ट के तथ्यों ने पुलिस के शुरुआती बयान पर सवालिया निशान लगा दिया है।


पोस्टमार्टम रिपोर्ट से उठे 8 बड़े सवाल

  1. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने से पहले ही पुलिस ने मौत को आत्महत्या क्यों बताया?

  2. दुष्कर्म के बाद हत्या की आशंका के बावजूद परिजनों के आरोपों की गंभीर जांच क्यों नहीं हुई?

  3. अचेत अवस्था में छात्रा को किसी बड़े और बेहतर अस्पताल में क्यों नहीं ले जाया गया?

  4. राजेंद्र नगर स्थित अस्पताल में इलाज के दौरान परिजनों को छात्रा से मिलने क्यों नहीं दिया गया?

  5. शरीर पर जख्म और नाखून के निशानों को पुलिस ने शुरुआत में क्यों नजरअंदाज किया?

  6. मेडिकल बोर्ड की पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर पुलिस अब भी असमंजस में क्यों है?

  7. जब हॉस्टल में सब कुछ सामान्य बताया जा रहा था, तो अब सबूत मिटाने के आरोप में गिरफ्तारी क्यों हुई?

  8. बिना पुलिस को सूचना दिए हॉस्टल संचालक ने दरवाजा तोड़कर छात्रा को अस्पताल क्यों पहुंचाया?


निष्पक्ष जांच की मांग

पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद छात्रा की मौत अब केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल बन चुकी है। परिजन और सामाजिक संगठन इस मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को सख्त सजा मिल सके। अब निगाहें प्रशासन और जांच एजेंसियों पर टिकी हैं कि क्या इस मामले में सच सामने आएगा, या फिर यह भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।