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patna train accident : पटना-दीनदयाल उपाध्याय रेलखंड पर दर्दनाक हादसा: ट्रेन की चपेट में आए तीन मजदूर, मौके पर मौत

“पटना-दीनदयाल उपाध्याय रेलखंड पर तीन मजदूर ट्रेन की चपेट में आ गए। जयनाथ साहनी, गुलशन राम और पप्पू सिंह की मौके पर मौत, पावर प्लांट में शोक की लहर। पूरी खबर पढ़ें।”

patna train accident : पटना-दीनदयाल उपाध्याय रेलखंड पर दर्दनाक हादसा: ट्रेन की चपेट में आए तीन मजदूर, मौके पर मौत
Tejpratap
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patna train accident : पटना-दीनदयाल उपाध्याय रेलखंड पर एक दर्दनाक रेल हादसे में तीन मजदूरों की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, तीनों मजदूर उत्तर प्रदेश से बिहार लौट रहे थे और रेलवे ट्रैक के रास्ते घर की ओर जा रहे थे। इसी दौरान इंदौर-पटना एक्सप्रेस की चपेट में आने से तीनों की मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा गहमर और बारा कलां हाल्ट के बीच पोल संख्या 678/28 के पास हुआ।


मृतकों में मुजफ्फरपुर जिले के केरमा-डीह निवासी 32 वर्षीय जयनाथ साहनी, 35 वर्षीय गुलशन राम और वैशाली जिले के 35 वर्षीय पप्पू सिंह शामिल हैं। सभी तीनों मजदूर चौसा पावर प्लांट की एक कंपनी में कार्यरत थे। घटना के समय ये निजी काम से उत्तर प्रदेश गए हुए थे और वापस लौट रहे थे।


ट्रैक पर हुए इस भीषण हादसे के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई। पटना-दीनदयाल उपाध्याय रेलखंड की राजकीय रेल पुलिस (आरपीएफ) और स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची। शवों को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया गया और मृतकों की पहचान आधार कार्ड के माध्यम से की गई।


हादसे की खबर मिलते ही मृतकों के परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों के अनुसार, तीनों मजदूर परिवारों के मुख्य सहारा थे। उनके अचानक चले जाने से घर पर मातम पसरा है। वहीं चौसा पावर प्लांट में काम करने वाले सभी मजदूरों में गहरा शोक व्याप्त हो गया। सोमवार को प्लांट परिसर में सन्नाटा पसरा रहा और कामकाज भी प्रभावित हुआ।


मजदूर नेता और इंटक के प्रदेश महासचिव रामप्रवेश सिंह यादव ने इस घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने बताया कि हादसे के बाद पावर प्लांट में काम करने वाले सभी मजदूरों में दुख और भय का माहौल बना हुआ है। रामप्रवेश सिंह ने परिवारों के प्रति हर संभव मदद का आश्वासन भी दिया।


स्थानीय पुलिस ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में रेलवे ट्रैक पर चलने की वजह से इस हादसे की आशंका जताई जा रही है। रेलवे प्रशासन ने लोगों से रेलवे ट्रैक पर चलने से बचने की चेतावनी दी है और इस तरह की घटनाओं से बचाव के लिए सतर्क रहने की अपील की है।


विशेषज्ञों का कहना है कि गहमर और बारा कलां इलाके में यह हादसा उन ट्रैक क्षेत्रों की चेतावनी है, जहां पैदल चलने वालों के लिए कोई सुरक्षित मार्ग नहीं है। ऐसे में राहगीरों और मजदूरों को रेलवे ट्रैक के रास्ते यात्रा करने से बचना चाहिए।


पावर प्लांट में काम करने वाले मजदूरों का कहना है कि तीनों मृतक मेहनती और ईमानदार थे। उनकी मौत से प्लांट में काम का माहौल प्रभावित हुआ है और मजदूर मानसिक रूप से दुखी हैं। इस घटना ने स्थानीय प्रशासन, मजदूर संगठनों और ग्रामीण समाज को भी स्तब्ध कर दिया है।


इस हादसे ने एक बार फिर रेलवे ट्रैक पर चलने की खतरनाक प्रवृत्ति को उजागर किया है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि लोग ट्रेन की गति और ट्रैक की सुरक्षा को नजरअंदाज करेंगे, तो ऐसे हादसे भविष्य में भी हो सकते हैं।


रेलवे और स्थानीय पुलिस ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। साथ ही लोगों को रेल ट्रैक के पास चलने से रोकने और जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। परिवारों के साथ मजदूर संगठन लगातार संपर्क में हैं और उन्हें हर संभव सहायता देने की कोशिश कर रहे हैं।


इस घटना ने चौसा और आसपास के क्षेत्रों में शोक और चिंता का माहौल बना दिया है। मृतकों के परिजन और उनके सहकर्मी अब हादसे से उबरने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इस दर्दनाक घटना का असर लंबे समय तक महसूस किया जाएगा।

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