KOLKATA: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहे हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी राज्य के 9वें मुख्यमंत्री बन गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में 8 मई 2026 को कोलकाता में हुई भाजपा विधायक दल की बैठक में उन्हें सर्वसम्मति से नेता चुना गया। कल 9 मई को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में वे औपचारिक रूप से शपथ ग्रहण करेंगे।
इस तरह 15 साल तक चली ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार का अंत हो गया और बंगाल में पहली बार भाजपा की सरकार बनने जा रही है। शुभेंदु अधिकारी टीएमसी छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले 'गुड्डा मार्क्समैन' के रूप में मशहूर हैं, जिन्होंने दो बार ममता बनर्जी को हराकर साबित किया कि वे बंगाल की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बन चुके हैं।
कौन हैं शुभेंदु अधिकारी
शुभेंदु अधिकारी का जन्म 15 दिसंबर 1970 को पूर्व मेदिनीपुर जिले के कर्कुली गांव में हुआ था। उनके पिता शिशिर कुमार अधिकारी पूर्व सांसद और केंद्र की मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री रह चुके हैं। मां गायत्री अधिकारी हैं। उनके दो भाई हैं – दिब्येंदु अधिकारी (जो पहले टीएमसी में थे, बाद में भाजपा में शामिल हुए) और सौमेंदु अधिकारी।
अविवाहित हैं शुभेंदु
शुभेंदु अधिकारी अविवाहित हैं। उन्होंने नेताजी सुभाष ओपन यूनिवर्सिटी से स्नातकोत्तर (एमए) की डिग्री हासिल की है। पहले वे रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से जुड़े रहे। पेशे से व्यवसायी और सामाजिक कार्यकर्ता, शुभेंदु राजनीतिक परिवार से आते हैं, जिसने उनकी जड़ें बंगाल की ग्रामीण राजनीति में गहरी कर दी।
टीएमसी से भाजपा तक का सफर
शुभेंदु अधिकारी की राजनीतिक शुरुआत 1995 में कांग्रेस से हुई, जब वे कोंटाई नगरपालिका के पार्षद बने। 1998 में पिता के साथ वे ममता बनर्जी की नई पार्टी टीएमसी में शामिल हो गए। 2006 में वे कांथी दक्षिण सीट से विधायक चुने गए।2006-07 का नंदीग्राम आंदोलन उनके करियर का टर्निंग पॉइंट था। ममता बनर्जी के सबसे विश्वसनीय सहयोगी के रूप में उन्होंने उद्योग के लिए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व किया, जो वाम मोर्चा सरकार के पतन का कारण बना।
दो बार बने सांसद
शुभेंदु अधिकारी 2009 और 2014 में तमलुक से सांसद चुने गए। 2016 में टीएमसी सरकार में वे परिवहन, सिंचाई, जल संसाधन जैसे महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री बने।
अभिषेक बनर्जी से हुआ विवाद
दिसंबर 2020 में तृणमूल कांग्रेस में बड़े आंतरिक विवाद के बाद उन्होंने टीएमसी छोड़ दी और भाजपा जॉइन कर ली। इसका कारण पार्टी में ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी का बढ़ता प्रभाव और आंतरिक कलह बताया गया।
ममता को दो बार हराया
2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम से ममता बनर्जी को 1,956 वोटों से हराया। यह बंगाल राजनीति का सबसे चर्चित उलटफेर था। 2021-26 तक वे विपक्ष के नेता रहे और भाजपा को बंगाल में मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। 2026 के चुनाव में उन्होंने फिर इतिहास रचा और इस बार ममता बनर्जी को उनके गढ़ भवानीपुर से 15,105 वोटों के अंतर से हराया और नंदीग्राम से भी जीत दर्ज की। 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 294 सीटों वाली विधानसभा में 207 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया, जबकि टीएमसी मात्र 80 सीटों पर सिमट गई।
'मेंटर' को दोबारा हराया
2026 के चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने दो सीटों से लड़ाई लड़ी। नंदीग्राम में पूर्व सहयोगी पबित्र कर को और भवानीपुर में खुद ममता बनर्जी को हराया। भाजपा की इस भारी जीत को अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रणनीति का नतीजा माना जा रहा है। ममता बनर्जी ने चुनाव परिणाम को 'साजिश' बताते हुए इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था, लेकिन राज्यपाल आरएन रवि ने संवैधानिक प्रक्रिया पूरी कर दी।
आगे क्या करेंगे शुभेंदु
शुभेंदु अधिकारी बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री हैं। उनकी जीत सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि टीएमसी के 15 साल के 'परिवारवादी शासन' के अंत का प्रतीक है। वे ग्रामीण बंगाल, खासकर पूर्व मेदिनीपुर और पुरुलिया जैसे क्षेत्रों में भाजपा की पैठ बढ़ाने वाले किंगमेकर साबित हुए हैं।नए मुख्यमंत्री के रूप में उनकी प्राथमिकताएं बंगाल को 'सोनार बंगला' बनाने के लिए निवेश, रोजगार, बाढ़ नियंत्रण और कानून-व्यवस्था सुधार रहेगा। उन्होंने पहले ही 'जनता के सेवक' की छवि पेश की है।विपक्षी टीएमसी ने इस बदलाव को 'केंद्र की साजिश' करार दिया है, जबकि भाजपा इसे 'जनादेश' बता रही है।
