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पाटलिपुत्र टाउनशिप में जमीन जाने से गुस्साएं दिव्यांग ने कर दी मांग, हमको नीतीश कुमार की ही सरकार चाहिए

दिव्यांग युवक ने कहा कि मेरी जमीन पाटलिपुत्र सैटेलाइट टाउनशिप में चली गयी है। इस गम में हम सात दिन से खाना तक नहीं खाये हैं। मेरी जमीन को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अडाणी के हाथों में बेच दिया है। हमको नीतीश कुमार की सरकार चाहिए।

बिहार न्यूज
'जान दे देंगे लेकिन किसी भी कीमत पर जमीन नहीं देंगे'
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
8 मिनट

PATNA: पटना में छात्र संगठनों के विरोध प्रदर्शन के बीच पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के खिलाफ में भी बड़ी संख्या में किसान सड़क पर उतर गये। पुनपुन, नौबतपुर समेत आसपास के इलाकों से पहुंचे किसान गांधी मैदान से मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए निकल पड़े। किसानों और छात्रों की भीड़ में एक दिव्यांग भी किसी तरह चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मिलने के लिए पटना पहुंच गया। जमीन टाउनशिप में जाने से वो टेंशन में दिख रहा था। 


किसानों के मार्च में शामिल दिव्यांग पर जब मीडिया कर्मियों की नजर गई तो उन्होंने भीड़ में शामिल दिव्यांग से सवाल किया कि आप क्यों भीड़ में शामिल हैं? तब दिव्यांग युवक ने कहा कि मेरी जमीन पाटलिपुत्र सैटेलाइट टाउनशिप में चली गयी है। इस गम में हम सात दिन से खाना तक नहीं खाये हैं। जमीन सरकार ले लिया है, जमीन पर मकान बना रहे थे तब सरकार ने उस पर रोक लगा दिया है। जमीन मेरा है ना कि सरकार का, मेरी जमीन को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अडाणी के हाथों में बेच दिया है। दिव्यांग का पेंशन भी सरकार ने रोक दिया था। कर्ज लेकर चार पांच महीना पर तो पेंशन दिया है। दिव्यांग ने कहा कि हमको नीतीश कुमार की सरकार चाहिए। सम्राट चौधरी की सरकार नहीं चाहिए। यह सरकार चलने वाली नहीं है।


वही पाटलिपुत्र सैटेलाइट टाउनशिप में जमीन जाने से गुस्साएं अन्य किसानों ने कहा कि अभी ना तो सम्राट चौधरी को उतनी समझ है ना ही मिथिलेश तिवारी और नरेंद्र मोदी को उतनी समझ है। समझ नीतीश कुमार में थी, जिनको इन लोगों ने साईड कर दिया है। हम लोग चाहते हैं कि वापस उनको लाया जाए और नीतीश कुमार को फिर से मुख्यमंत्री बनाया जाए। कैबिनेट में जो भी लोग बैठा हुआ है सब अनपढ हैं, इन लोगों को समझ में नहीं आ रहा कि कि वो शिक्षा मंत्री है या स्वास्थ्य मंत्री या फिर झाड़ फूंक वाला मंत्री हैं। वही एक अन्य किसान का कहना था कि तीन भाई में पन्द्रह कट्ठा जमीन पिपरा थाना में है, सब जमीन टाउनशिप में चला गया है। हमको पैसा नहीं चाहिए ना ही जमीन बेचना है। हमको सिर्फ अपनी जमीन चाहिए। 


किसानों का कहना था कि 22 तारीख को नगर विकास मंत्री से बात हुई थी। हमने कहा था कि बिहार सरकार ने जो अधिनियम बदल दिया है, उसको बहाल किजीए। एक अन्य किसान ने कहा कि मेरा 22 बिगहा जमीन टाउनशिप में जा रहा है। तीन गो अधिनियम है उसको वापस लेने को कह रहे हैं। जान दे देंगे लेकिन अपनी जमीन किसी भी कीमत पर हम सरकार को नहीं देंगे। बता दें कि सम्राट चौधरी पुनपुन, नौबतपुर, फतुहा, मसौढ़ी सहित पटना के कई इलाकों में पाटलिपुत्र सैटेलाइट टाउनशिप डवलप करने जा रही है। जिसमें इन सभी किसानों की जमीन जा रही है, इसलिए वो पटना में प्रोटेस्ट करने के लिए पहुंचे हैं। कह रहे हैं कि हम लोग से जमीन छीनकर सरकार सैटेलाइट टाउनशिप बसाना चाहती है, हम अपनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देंगे। 


किसानों का कहना था कि सरकार और प्रशासन तानाशाही रवैय्या अपना रही है। हम लोग का सारा जमीन जा रही है। सरकार जबरदस्ती लाठीचार्ज करके हमलोगों से जमीन छीन लेना चाहती है। ऐसा हम हरगीज नहीं होने देंगे। सरकार के खिलाफ लोगों ने मोर्चा खोला और विरोध में जमकर नारेबाजी की। कहा कि सरकार अपने आदमी से बैरिकेटिंग तोड़वाई है, और हम लोगों पर ईंट पत्थर चलवाई है। सरकार हम लोगों को डराना और धमकाना चाहती है। लेकिन हमलोग डरने वाले किसान नहीं है। इसी जमीन पर हम खेती करते हैं, जिससे घर चलता है। यही रोजी रोटी का साधन है। सरकार ऐसा करके हमलोगों को बेरोजगार कर देना चाहती है। हमलोगों का रोटी रोजी छीनना चाहती है। इसलिए हमलोगों ने मन बना लिया है कि अपनी जमीन हम किसी भी कीमत पर सरकार को टाउनशिप बसाने के लिए नहीं देंगे। 


प्रदर्शनकारी किसान प्रस्तावित टाउनशिप के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर नाराज हैं। उनका कहना है कि उनकी जमीन खेती योग्य है और इसी से परिवार की आजीविका चलती है। किसानों ने साफ कहा कि वे किसी भी कीमत पर अपनी खेती की जमीन सरकार को नहीं देना चाहते। किसानों का कहना था कि पाटलिपुत्र सैटेलाइट सिटी नहीं बनना चाहिए, क्योंकि उस खेत से हम एक साल में तीन फसल उगाते हैं। यह हमारी जमीन है, जिसे बेचकर बेटी की शादी करते हैं और बेटे को पढ़ाते हैं। इसलिए यह जमीन सरकार को नहीं देंगे। प्रदर्शन के दौरान किसान प्रतिनिधियों से बातचीत के लिए पटना के डीएम, एसएसपी और एसपी भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसान प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए समझाने का प्रयास किया। एक किसान नेता ने कहा कि उनका प्रदर्शन छात्रों के आंदोलन में शामिल होने के लिए नहीं है। किसान अपनी जमीन और प्रस्तावित टाउनशिप से जुड़ी मांगों को लेकर अलग से प्रदर्शन कर रहे हैं। एक ही दिन कई संगठनों के मार्च होने के कारण सभी प्रदर्शन एक जगह जुट गए हैं।


बिहार सरकार ने राज्य में 12 सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने का निर्णय लिया है। इनमें पाटलिपुत्र टाउनशिप भी शामिल है। प्रस्तावित योजना को लेकर जमीन अधिग्रहण और किसानों की सहमति का मुद्दा सामने आया है। सरकार का कहना है कि वह किसानों और भू-स्वामियों के हितों को ध्यान में रखते हुए बीच का रास्ता निकालने का प्रयास कर रही है। पाटलिपुत्र टाउनशिप को करीब 30 सेक्टर में विकसित करने का प्रस्ताव है। जमीन की व्यवस्था के लिए चार मॉडल पर विचार किया जा रहा है—लैंड पूलिंग, आपसी समझौता, हाइब्रिड मॉडल और भूमि खरीद/अधिग्रहण।


बता दें कि प्रस्तावित पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप का क्षेत्र करीब 81,730 एकड़ में फैला होगा। योजना के दायरे में नौ प्रखंडों के कुल 273 गांव शामिल हैं। इनमें पुनपुन, नौबतपुर, मसौढ़ी, फतुहा, संपतचक, पटना ग्रामीण, धनरुआ, दनियावां और फुलवारी प्रखंड के क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा विशेष क्षेत्र के तहत दो शहरी क्षेत्र भी प्रस्तावित हैं। इनमें नौबतपुर नगर पंचायत का आंशिक क्षेत्र और पुनपुन नगर पंचायत का पूरा क्षेत्र शामिल है। टाउनशिप के भीतर करीब 3,008 एकड़ का कोर एरिया प्रस्तावित है, जिसमें पुनपुन प्रखंड के 19 गांव शामिल होंगे। 


सरकार का मानना है कि पाटलिपुत्र टाउनशिप के विकास से सार्वजनिक और निजी क्षेत्र से बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित हो सकता है। नए शहरी क्षेत्र में आवास, व्यवसाय, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, बाजार और सेवा क्षेत्र के विस्तार से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सरकार इस ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप को बिहार में भविष्य के शहरी विकास के मॉडल के रूप में विकसित करना चाहती है। हालांकि, इन विकास योजनाओं के बीच किसानों की जमीन को लेकर विरोध जारी है। अब सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच बातचीत से यह तय होगा कि प्रस्तावित टाउनशिप को लेकर दोनों पक्षों के बीच सहमति कैसे बनती है।

पटना से साहिल लिंगम की रिपोर्ट