Patna News: बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज से संबद्ध पारा-मेडिकल, नर्सिंग एवं फार्मेसी महाविद्यालयों के संचालकों की एक महत्वपूर्ण बैठक पटना में आयोजित की गई। बैठक में विश्वविद्यालय से जुड़े विभिन्न महाविद्यालयों के छात्रों की समस्याओं, परीक्षा परिणाम, शैक्षणिक सत्र में हो रही देरी तथा परीक्षा संचालन की व्यवस्था को लेकर गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया। संचालकों ने कहा कि छात्रों का शैक्षणिक भविष्य किसी भी परिस्थिति में प्रभावित नहीं होना चाहिए और उनकी समस्याओं का समयबद्ध, पारदर्शी एवं निष्पक्ष समाधान आवश्यक है।
बैठक में हाल में जारी परीक्षा परिणाम में बड़ी संख्या में छात्रों के अनुत्तीर्ण होने के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया। संचालकों ने कहा कि परीक्षा परिणाम को लेकर कई महाविद्यालयों के छात्रों में असंतोष है। छात्रों की ओर से परिणाम की समीक्षा और उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन की मांग सामने आ रही है। कुछ स्थानों पर छात्रों द्वारा विरोध एवं आंदोलन भी किए जाने की जानकारी बैठक में दी गई। संचालकों ने माना कि छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से सुनना और तथ्यों के आधार पर उनका समाधान करना विश्वविद्यालय एवं संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि छात्रों की समस्याओं को लेकर महाविद्यालय संचालकों का एक प्रतिनिधिमंडल बिहार के मुख्यमंत्री तथा बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के कुलपति एवं अन्य संबंधित अधिकारियों से मुलाकात करेगा। प्रतिनिधिमंडल विश्वविद्यालय के समक्ष परीक्षा परिणाम की समीक्षा कराने, संभावित मूल्यांकन अथवा तकनीकी त्रुटियों की जांच करने तथा जरूरत पड़ने पर छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन की मांग रखेगा। संचालकों का कहना है कि यदि किसी स्तर पर गलती सामने आती है तो उसे शीघ्र सुधारते हुए प्रभावित छात्रों को उचित राहत दी जानी चाहिए।
बैठक में परीक्षा संचालन में हो रही देरी और इसके कारण प्रभावित हो रहे शैक्षणिक सत्र पर भी चिंता व्यक्त की गई। संचालकों ने कहा कि परीक्षा समय पर नहीं होने और परिणाम जारी होने में देरी के कारण छात्रों की आगे की पढ़ाई प्रभावित होती है। इसका असर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, उच्च शिक्षा में प्रवेश तथा रोजगार के अवसरों पर भी पड़ सकता है। पारा-मेडिकल, नर्सिंग और फार्मेसी जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में समय पर परीक्षा और परिणाम का विशेष महत्व है, क्योंकि इन पाठ्यक्रमों के बाद छात्रों को आगे की पढ़ाई, प्रशिक्षण एवं रोजगार के लिए निर्धारित समय-सीमा का पालन करना पड़ता है।
संचालकों ने कहा कि छात्रों और महाविद्यालयों के बीच किसी प्रकार का भ्रम या असंतोष लंबे समय तक बना रहना उचित नहीं है। इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों की शिकायतों की सुनवाई के लिए प्रभावी व्यवस्था करनी चाहिए। परीक्षा परिणाम से संबंधित आपत्तियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत स्वीकार कर उनकी जांच की जाए और वास्तविक स्थिति छात्रों के सामने स्पष्ट की जाए। उनका कहना था कि पारदर्शी प्रक्रिया से ही छात्रों का विश्वविद्यालय और परीक्षा व्यवस्था के प्रति विश्वास मजबूत होगा।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि यदि परीक्षा परिणाम में किसी प्रकार की तकनीकी, प्रशासनिक या मूल्यांकन संबंधी त्रुटि प्रमाणित होती है तो उसे प्राथमिकता के आधार पर दूर कराया जाएगा। संचालकों ने कहा कि उनकी पहल का उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था या विश्वविद्यालय का विरोध करना नहीं है, बल्कि छात्रों के हितों की रक्षा करना है। वे चाहते हैं कि सभी निर्णय नियमों एवं तथ्यों के आधार पर हों और किसी भी योग्य छात्र के भविष्य के साथ अन्याय न हो।
महाविद्यालय संचालकों ने यह भी कहा कि परीक्षा एवं परिणाम से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन, महाविद्यालयों और छात्रों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। इससे भविष्य में परीक्षा संचालन, मूल्यांकन और परिणाम प्रकाशन से संबंधित समस्याओं को कम किया जा सकेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री एवं विश्वविद्यालय के कुलपति एवं अन्य संबंधित अधिकारियों से छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए उचित कार्रवाई के लिए आवश्यक निर्देश देंगे।
बैठक में विभिन्न पारा-मेडिकल, नर्सिंग एवं फार्मेसी महाविद्यालयों के संचालक एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने छात्रों के शैक्षणिक हितों की रक्षा के लिए एकजुट होकर प्रयास करने तथा सक्षम अधिकारियों के समक्ष उनकी मांगों को मजबूती से रखने का निर्णय लिया। संचालकों ने कहा कि छात्रों का भविष्य सर्वोच्च प्राथमिकता है और पुनर्मूल्यांकन सहित परीक्षा परिणाम से जुड़ी उनकी जायज मांगों पर सकारात्मक एवं निष्पक्ष निर्णय होना चाहिए।





