पटना: बिहार में बाढ़, कटाव और गंगा के जल प्रबंधन को लेकर सियासत एक बार फिर तेज होने वाली है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने फरक्का जल संधि को लेकर बड़ा जन-जागरूकता अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि 5 सितंबर 2026 से ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम की शुरुआत बक्सर से की जाएगी, जिसका समापन कटिहार में होगा।
JDU का कहना है कि इस अभियान के जरिए गंगा किनारे बसे जिलों में जाकर लोगों को फरक्का बैराज, फरक्का जल संधि और इसके बिहार पर पड़े कथित प्रभावों की जानकारी दी जाएगी। पार्टी इस मुद्दे को केवल राजनीतिक बहस तक सीमित रखने के बजाय इसे जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है।
बक्सर से कटिहार तक चलेगा अभियान
JDU के प्रदेश अध्यक्ष के मुताबिक, बिहार में गंगा बक्सर से प्रवेश करती है और करीब 450 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद कटिहार के रास्ते पश्चिम बंगाल की ओर जाती है। इसी भौगोलिक स्थिति को देखते हुए पार्टी ने बक्सर से कटिहार तक अभियान चलाने का फैसला किया है।
इस दौरान गंगा किनारे के प्रमुख जिलों में पार्टी के नेता और कार्यकर्ता लोगों से संवाद करेंगे। अभियान में भोजपुर, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर और कटिहार को शामिल किया गया है। पार्टी का दावा है कि इन जिलों में स्थानीय लोगों, किसानों और बाढ़ प्रभावित परिवारों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को समझा जाएगा और उनके मुद्दों को व्यापक स्तर पर उठाया जाएगा।
फरक्का बैराज और जल संधि पर लोगों को बताएगी JDU
JDU के अनुसार, अभियान के दौरान जनता को यह समझाने की कोशिश की जाएगी कि आखिर फरक्का बैराज क्या है और भारत-बांग्लादेश के बीच गंगा जल के बंटवारे से जुड़ी फरक्का जल संधि क्या है। पार्टी का कहना है कि फरक्का बैराज का निर्माण पश्चिम बंगाल में हुआ और गंगा जल के बंटवारे को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच समझौता हुआ। अब जब इस समझौते के नवीनीकरण की चर्चा हो रही है, तब बिहार के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
JDU ने साफ किया है कि फरक्का जल संधि के नवीनीकरण से पहले बिहार के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। पार्टी का तर्क है कि किसानों, कृषि व्यवस्था, बाढ़, कटाव और जल प्रबंधन पर इसके प्रभाव का गंभीरता से आकलन होना जरूरी है।
बाढ़ और कटाव को लेकर केंद्र में रहेगा बिहार का सवाल
बिहार लंबे समय से बाढ़ और नदी कटाव की समस्या से जूझता रहा है। JDU ने इसी मुद्दे को फरक्का जल संधि की बहस से जोड़ते हुए सवाल उठाया है कि यदि किसी जल समझौते का प्रभाव बिहार की बाढ़ और जल निकासी व्यवस्था पर पड़ता है, तो समझौते के नवीनीकरण के समय बिहार की राय क्यों नहीं ली जानी चाहिए?
पार्टी के मुताबिक, बाढ़ के दौरान खेतों में पानी भरने, फसलों के बर्बाद होने और बड़े पैमाने पर भूमि कटाव से किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। कई क्षेत्रों में गाद जमा होने से नदियों की जलधारण क्षमता कम होने का भी दावा किया गया है।JDU का कहना है कि इस पूरे मामले पर अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर नुकसान का आकलन किया जाना चाहिए।
लालू-देवगौड़ा सरकारों पर भी उठाए सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में JDU ने पिछले दौर की सरकारों को भी निशाने पर लिया। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जिस समय बिहार में लालू प्रसाद यादव की सरकार थी और केंद्र में एच.डी. देवगौड़ा के नेतृत्व वाली सरकार थी, उस समय बिहार के हितों को लेकर पर्याप्त ठोस पहल नहीं हुई।JDU का कहना है कि इसका असर बिहार को लंबे समय तक भुगतना पड़ा। पार्टी अब पिछले कई दशकों के दौरान बाढ़, कटाव और जल प्रबंधन से हुए नुकसान का हिसाब जनता के सामने रखने की बात कह रही है।
‘सिर्फ राजनीति नहीं, बिहार के हित की लड़ाई’—JDU
JDU ने अपने अभियान को केवल राजनीतिक कार्यक्रम मानने से इनकार किया है। पार्टी का कहना है कि उसका उद्देश्य लोगों के बीच जागरूकता पैदा करना, प्रभावित लोगों की समस्याएं सुनना और बिहार के हित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाना है।पार्टी कार्यकर्ताओं को स्थानीय लोगों और प्रभावित परिवारों से संवाद करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। उनकी समस्याओं को एक मंच पर लाकर भविष्य की नीति और स्थायी समाधान की मांग को मजबूत करने की तैयारी है।
5 सितंबर को बक्सर से शुरू होने वाला ‘नीतीश संवाद’ अब बिहार की बाढ़ और गंगा जल प्रबंधन के मुद्दे को नई राजनीतिक बहस में बदल सकता है। बक्सर से कटिहार तक गंगा किनारे चलने वाला यह अभियान कितना असरदार साबित होता है और फरक्का जल संधि के मुद्दे पर बिहार की राजनीति को किस दिशा में ले जाता है, इस पर अब सभी की नजरें रहेंगी।





