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IAS Deepak Kumar Mishra : सीवान से मुख्यमंत्री सचिवालय तक: IAS दीपक कुमार मिश्रा की सफलता की कहानी, बिहार के युवा अफसर को मिली बड़ी जिम्मेदारी

IAS दीपक कुमार मिश्रा, 2019 बैच के युवा अधिकारी, को बिहारशरीफ नगर आयुक्त से मुख्यमंत्री सचिवालय में संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई।

IAS Deepak Kumar Mishra : सीवान से मुख्यमंत्री सचिवालय तक: IAS दीपक कुमार मिश्रा की सफलता की कहानी, बिहार के युवा अफसर को मिली बड़ी जिम्मेदारी
Tejpratap
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IAS Deepak Kumar Mishra : बिहार प्रशासन में अपने काम से अलग पहचान बनाने वाले 2019 बैच के आईएएस अधिकारी दीपक कुमार मिश्रा एक बार फिर चर्चा में हैं। ईमानदार छवि, त्वरित निर्णय क्षमता और जनहित को प्राथमिकता देने वाले इस युवा अधिकारी को अब मुख्यमंत्री सचिवालय में संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। फिलहाल वे बिहारशरीफ नगर निगम के नगर आयुक्त के रूप में कार्यरत थे, जहां उनके कार्यकाल को प्रशासनिक सुधारों के लिए याद किया जाएगा।


सीवान से IIT दिल्ली तक की प्रेरक यात्रा

दीपक कुमार मिश्रा बिहार के सीवान जिले से ताल्लुक रखते हैं। सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT दिल्ली में दाखिला लिया और वहां से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने यह तय कर लिया था कि वे देश की सेवा प्रशासनिक अधिकारी बनकर करेंगे। साल 2018 में UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास कर उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 511 हासिल की और आईएएस अधिकारी बने। उनकी यह सफलता आज के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।


कॉर्पोरेट और रेलवे का अनुभव बना मजबूत आधार

आईएएस बनने से पहले दीपक मिश्रा ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) में सहायक प्रबंधक के रूप में कार्य किया। इसके अलावा उन्होंने भारतीय रेलवे में भी सेवाएं दीं। कॉर्पोरेट और रेलवे जैसे बड़े संस्थानों में काम करने का अनुभव उनके प्रशासनिक करियर में बेहद उपयोगी साबित हुआ। इन अनुभवों ने उन्हें प्रबंधन कौशल, समयबद्ध निर्णय लेने और जमीनी समस्याओं को व्यावहारिक दृष्टिकोण से समझने की क्षमता दी, जिसका असर उनके हर प्रशासनिक फैसले में साफ नजर आता है।


बिहारशरीफ में बदली प्रशासन की कार्यसंस्कृति

नगर आयुक्त के रूप में बिहारशरीफ में दीपक मिश्रा का कार्यकाल काफी प्रभावशाली रहा। उन्होंने स्वच्छता व्यवस्था, यातायात सुधार और नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता दी। नगर निगम की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए उन्होंने तकनीक और निगरानी तंत्र को मजबूत किया। आम नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए व्यवस्था बनाई गई, जिससे लोगों का प्रशासन पर भरोसा बढ़ा। वर्षों से अधूरे पड़े फ्लाईओवर परियोजना को उन्होंने गंभीरता से लिया और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर कार्य में तेजी लाई। इससे शहरवासियों को जाम से राहत मिलने की उम्मीद जगी है।


अंतरराष्ट्रीय आयोजन से बढ़ा नालंदा का गौरव

दीपक मिश्रा की कार्यकुशलता का बड़ा उदाहरण राजगीर खेल एकेडमी में आयोजित पुरुष हॉकी एशिया कप का सफल आयोजन रहा। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर का आयोजन था, जिसे लेकर प्रशासन पर बड़ी जिम्मेदारी थी।सटीक योजना, दिन-रात की मेहनत और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल के कारण यह प्रतियोगिता पूरी तरह सफल रही। आयोजन की प्रशंसा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई, जिससे राजगीर और नालंदा जिले को नई पहचान मिली।


चुनावी जिम्मेदारियों में भी साबित हुए कुशल

विधानसभा चुनाव के दौरान दीपक मिश्रा को कई विभागों का नोडल अधिकारी बनाया गया था। उनकी सक्रिय भूमिका और सख्त निगरानी के चलते चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हुई। मतदान प्रतिशत में बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसे प्रशासनिक सफलता के रूप में देखा गया। चुनाव आयोग और वरिष्ठ अधिकारियों ने भी उनके कार्य की सराहना की।


पारदर्शिता और ईमानदारी की मिसाल

बिहारशरीफ घंटाघर निर्माण से जुड़े मामले में जब सार्वजनिक जांच हुई, तब भी दीपक मिश्रा ने तथ्यों और नियमों के आधार पर अपनी भूमिका स्पष्ट की। इस पूरे मामले में उनकी पारदर्शिता और प्रशासनिक ईमानदारी साफ नजर आई। यही कारण है कि सरकार ने उन पर भरोसा जताते हुए मुख्यमंत्री सचिवालय में संयुक्त सचिव जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।


मुख्यमंत्री सचिवालय में नई चुनौती

मुख्यमंत्री सचिवालय में संयुक्त सचिव के रूप में दीपक कुमार मिश्रा की तैनाती यह संकेत देती है कि सरकार युवा, ईमानदार और परिणाम देने वाले अधिकारियों को आगे बढ़ाने के पक्ष में है।प्रशासनिक हलकों में उम्मीद जताई जा रही है कि अपने अनुभव, कार्यशैली और दूरदृष्टि के बल पर वे मुख्यमंत्री सचिवालय में भी प्रभावी भूमिका निभाएंगे और राज्य के विकास से जुड़े अहम फैसलों में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

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