ब्रेकिंग
बिहार पुलिस में बड़ा फेरबदल, पटना में 195 दारोगा का तबादला; शहरी क्षेत्र के 83 और ग्रामीण इलाके के 112 पुलिसकर्मी बदले, देखें पूरी लिस्ट..✦बिहार में 3 IPS अधिकारियों का तबादला, भानू प्रताप सिंह पुलिस मुख्यालय बुलाए गए, शैलेन्द्र सिंह बने खगड़िया SP✦बिहार विधान परिषद में बहाली में बड़ा खेल करके गये अवधेश बाबू! जांच में सनसनीखेज खुलासा, बड़े पैमाने पर रद्द हो सकती है नियुक्ति✦बिहार के रेल यात्रियों को राहत, पूर्व मध्य रेलवे ने 5 जोड़ी स्पेशल ट्रेनों का बढ़ाया परिचालन, देखें पूरा शेड्यूल✦भ्रष्ट इंजीनियर पर SVU का शिकंजा: 5 ठिकानों पर छापेमारी में मिले 31.42 लाख कैश, करोड़ों की जमीन-फ्लैट; 1 करोड़ से अधिक बैंक बैलेंस✦बिहार पुलिस में बड़ा फेरबदल, पटना में 195 दारोगा का तबादला; शहरी क्षेत्र के 83 और ग्रामीण इलाके के 112 पुलिसकर्मी बदले, देखें पूरी लिस्ट..✦बिहार में 3 IPS अधिकारियों का तबादला, भानू प्रताप सिंह पुलिस मुख्यालय बुलाए गए, शैलेन्द्र सिंह बने खगड़िया SP✦बिहार विधान परिषद में बहाली में बड़ा खेल करके गये अवधेश बाबू! जांच में सनसनीखेज खुलासा, बड़े पैमाने पर रद्द हो सकती है नियुक्ति✦बिहार के रेल यात्रियों को राहत, पूर्व मध्य रेलवे ने 5 जोड़ी स्पेशल ट्रेनों का बढ़ाया परिचालन, देखें पूरा शेड्यूल✦भ्रष्ट इंजीनियर पर SVU का शिकंजा: 5 ठिकानों पर छापेमारी में मिले 31.42 लाख कैश, करोड़ों की जमीन-फ्लैट; 1 करोड़ से अधिक बैंक बैलेंस

हाईकोर्ट ने नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव को किया तलब, पूछ दिया बड़ा सवाल

PATNA : पटना हाईकोर्ट ने बिहार के नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव को एक दिसंबर को तलब किया है। मामला राज्य के नगर निकायों में चुनाव में देरी और सरकार की तरफ से बहाल प्रशासकों का कार

हाईकोर्ट ने नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव को किया तलब, पूछ दिया बड़ा सवाल
First Bihar
3 मिनट

PATNA : पटना हाईकोर्ट ने बिहार के नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव को एक दिसंबर को तलब किया है। मामला राज्य के नगर निकायों में चुनाव में देरी और सरकार की तरफ से बहाल प्रशासकों का कार्यकाल खत्म होने से जुड़ा हुआ है। प्रधान सचिव को इस बात का जवाब देना होगा कि जब राज्य में नगर निकाय के विघटन की अवधि 6 महीने से अधिक हो गई है तो फिर किस कानून के तहत प्रशासक निकायों में काम कर रहे हैं। साथ ही उनसे ये भी जाना जाएगा कि प्रावधानों और कानूनों का उल्लंघन मान प्रशासक द्वारा किए जा रहे कार्यों पर रोक क्यों न लगा दी जाए। 



कल यानी गुरुवार को न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति सुनील दत्त मिश्रा की खंडपीठ ने दो अलग-अलग रिट याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। राज्य सरकार की तरफ से सरकारी वकील किंकर कुमार ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद डेडिकेटेड कमीशन का गठन कर दिया गया है। डेडिकेटेड कमीशन (अतिपिछड़ा वर्ग आयोग) की रिपोर्ट आते ही राज्य में नगर निकाय का चुनाव करा लिया जाएगा। राज्य के नगर निकायों में चुनाव में देरी और सरकार की तरफ से बहाल प्रशासकों का कार्यकाल खत्म होने के मामले में आवेदकों की ओर से कोर्ट को बताया गया कि संविधान के तहत 5 साल की अवधि खत्म होने के पहले नगर निकाय का चुनाव हर हाल में करा लेना है। लेकिन राज्य के नगर निकायों का चुनाव नहीं करा कर उसे विघटित कर दिया गया और प्रशासक की बहाली कर दी गई। एक साल से ज्यादा की अवधि बीत जाने के बावजूद नगर निकायों में प्रशासक काम कैसे कर रहे हैं। कोर्ट को बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे कार्यों को गैरकानूनी करार दिया है। जिस प्रकार पंचायतों में परामर्शदात्री समिति का गठन किया गया, उसी प्रकार नगर निकायों में भी परामर्शदात्री समिति का गठन किया जाए, ताकि नगर निकाय का कार्य सुचारू रूप से चुनाव खत्म होने तक हो सके।



वहीं, राज्य चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया है कि अतिपिछड़ा वर्ग आयोग गठन किया गया है। इसकी रिपोर्ट आने के बाद नगर निकाय चुनाव होगा। आपको बता दें, नगर निकाय की अवधि 3 सितंबर 2021 और 9 जून 2022 को पूरी होने के बाद वहां कार्य प्रशासकों की देखरेख में हो रहे हैं।

टैग्स