पटना: बिहार के प्रशासनिक तंत्र में वरिष्ठ अधिकारियों की कमी अब एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आती दिख रही है। बिहार कैडर के 36 IAS अधिकारी फिलहाल केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर तैनात हैं। दूसरी ओर राज्य में अपर मुख्य सचिव और प्रधान सचिव स्तर के अधिकारियों की संख्या सीमित होने के कारण कई महत्वपूर्ण विभागों का काम सचिव स्तर के अधिकारियों के भरोसे चल रहा है।
स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य सरकार के केवल छह विभागों में अपर मुख्य सचिव और छह विभागों में प्रधान सचिव स्तर के अधिकारी तैनात हैं। यानी बड़ी संख्या में विभागों का प्रशासनिक प्रभार सचिव स्तर के अफसरों के पास है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या वरिष्ठ अधिकारियों की कमी का असर सरकारी योजनाओं और नीतिगत फैसलों की रफ्तार पर भी पड़ रहा है?
दिल्ली में बिहार के 36 IAS अधिकारी
बिहार कैडर के 36 IAS अधिकारी इस समय केंद्र सरकार की अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। इनमें कुछ अधिकारी लंबे समय से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक कुछ अधिकारी 2014 और 2015 से ही केंद्र में तैनात हैं, जबकि 2018 के बाद केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का सिलसिला और तेज हुआ।
केंद्र में प्रतिनियुक्त बिहार कैडर के अधिकारी गृह मंत्रालय, मंत्रिमंडल सचिवालय, वाणिज्य एवं उद्योग समेत कई महत्वपूर्ण संस्थानों में जिम्मेदारी निभा रहे हैं। चार अधिकारी केंद्रीय मंत्रियों के निजी सचिव के तौर पर भी कार्यरत हैं। इसके अलावा कुछ अधिकारी सचिव, विशेष सचिव, संयुक्त सचिव, निदेशक और आयुक्त जैसे पदों पर तैनात हैं। बड़े शहरों के नगर निकायों और मुंबई पोर्ट ट्रस्ट जैसी संस्थाओं में भी बिहार कैडर के अधिकारियों को जिम्मेदारियां मिली हुई हैं।
बिहार में सिर्फ छह विभागों के पास अपर मुख्य सचिव
राज्य में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की स्थिति देखें तो अपर मुख्य सचिव स्तर पर अधिकारियों की संख्या काफी सीमित है। फिलहाल कैबिनेट, योजना एवं विकास, पर्यावरण एवं वन, पिछड़ा एवं अतिपिछड़ा वर्ग, श्रम संसाधन और ग्रामीण विकास विभाग अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारियों के जिम्मे हैं।
वहीं केवल छह अन्य विभागों में प्रधान सचिव स्तर के अधिकारी तैनात हैं। इसका मतलब यह है कि राज्य के दो-तिहाई से अधिक विभागों का प्रशासनिक प्रभार सचिव स्तर के अधिकारियों के पास है। कई जगह एक अधिकारी को एक से अधिक विभागों की जिम्मेदारी भी संभालनी पड़ रही है।
एक अफसर, कई विभाग… कितना बढ़ेगा काम का दबाव?
प्रशासनिक ढांचे में वरिष्ठ पदों का महत्व केवल पदनाम तक सीमित नहीं होता। बड़े विभागों में नीतिगत फैसलों, योजनाओं की निगरानी, विभागीय समन्वय और सरकार के स्तर पर महत्वपूर्ण प्रस्तावों को आगे बढ़ाने में इन अधिकारियों की अहम भूमिका होती है।
ऐसे में जब एक सचिव को एक से अधिक विभागों का अतिरिक्त प्रभार मिलता है तो स्वाभाविक रूप से जिम्मेदारियों का दायरा बढ़ जाता है। इसका असर फाइलों के निस्तारण, विभागीय समीक्षा और योजनाओं की मॉनिटरिंग पर पड़ सकता है। हालांकि किसी योजना या फैसले की गति केवल अधिकारियों की संख्या पर निर्भर नहीं करती। विभागीय संरचना, फाइलों की प्रक्रिया और राजनीतिक-प्रशासनिक प्राथमिकताएं भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
प्रतिनियुक्ति के नियम भी चर्चा में
IAS अधिकारियों की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति को लेकर कैडर रूल्स 1954 और सेंट्रल स्टाफिंग स्कीम में प्रावधान हैं। सामान्य तौर पर उप सचिव या अतिरिक्त सचिव स्तर पर केंद्र में प्रतिनियुक्ति की अवधि करीब 4 से 5 साल, जबकि निदेशक या संयुक्त सचिव स्तर पर यह अवधि करीब 5 से 7 साल तक हो सकती है।
सचिव स्तर पर प्रतिनियुक्ति की अवधि पांच साल या 60 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु तक निर्धारित हो सकती है। पदोन्नति के बावजूद लगातार प्रतिनियुक्ति की कुल अवधि सामान्य तौर पर सात साल से अधिक नहीं होनी चाहिए। हालांकि जनहित में कैबिनेट की नियुक्ति समिति यानी ACC विशेष परिस्थितियों में अवधि बढ़ा सकती है। यही वजह है कि लंबे समय से केंद्र में तैनात अधिकारियों को लेकर प्रतिनियुक्ति की अवधि और राज्य में उनकी उपलब्धता का मुद्दा भी चर्चा में है।
विकास योजनाओं पर क्या पड़ सकता है असर?
बिहार जैसे बड़े राज्य में प्रशासनिक मशीनरी पर लगातार नई योजनाओं और विभागीय जिम्मेदारियों का दबाव रहता है। ऐसे में वरिष्ठ अधिकारियों की सीमित उपलब्धता प्रशासन के लिए चुनौती बन सकती है। एक तरफ केंद्र में बिहार कैडर के अधिकारी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राज्य में कई विभाग सचिव स्तर के अधिकारियों के भरोसे चल रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में वरिष्ठ अधिकारियों की उपलब्धता, केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वापसी और विभागों में जिम्मेदारियों के संतुलन पर सरकार को विशेष ध्यान देना पड़ सकता है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब बिहार कैडर के 36 IAS अधिकारी केंद्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, तब राज्य के प्रशासनिक ढांचे में वरिष्ठ अधिकारियों की कमी को किस तरह संतुलित किया जाएगा?





