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Lalu Prasad Yadav : दिल्ली हाईकोर्ट में आज लालू प्रसाद यादव की याचिका पर अहम सुनवाई, IRCTC टेंडर और ‘लैंड फॉर जॉब’ मामले में कानूनी लड़ाई जारी

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की याचिका पर आज, 5 जनवरी 2026 को, दिल्ली हाईकोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है। लालू यादव ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है

Lalu Prasad Yadav : दिल्ली हाईकोर्ट में आज लालू प्रसाद यादव की याचिका पर अहम सुनवाई, IRCTC टेंडर और ‘लैंड फॉर जॉब’ मामले में कानूनी लड़ाई जारी
Tejpratap
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5 मिनट

Lalu Prasad Yadav : बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की याचिका पर आज, 5 जनवरी 2026 को, दिल्ली हाईकोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है। यह सुनवाई विशेष रूप से उनके खिलाफ दर्ज IRCTC टेंडर और ‘लैंड फॉर जॉब’ मामले से संबंधित है, जिसमें उन्हें और उनके परिवार के अन्य सदस्यों को गंभीर आरोपों का सामना करना पड़ रहा है।


लालू प्रसाद यादव ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनके खिलाफ आरोप तय किए गए थे। इस मामले में सुनवाई न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा की कोर्ट में होगी। बताया जा रहा है कि यह सुनवाई इस मामले की आगे की कानूनी दिशा तय करने में काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


मामला अक्टूबर 2025 का है, जब राउज़ एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) विशाल गोगने ने लालू यादव और उनके परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ आरोप तय किए थे। आरोपों में कहा गया कि लालू प्रसाद यादव ने अपने केंद्रीय रेल मंत्री के कार्यकाल के दौरान भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) से जुड़ी कुछ जमीनों और होटलों को नियमों की अनदेखी करते हुए निजी कंपनियों को पट्टे पर देने में कथित तौर पर भूमिका निभाई।


अदालत ने अपने आदेश में पाया कि लालू प्रसाद यादव इस साजिश और अनियमितताओं से पूरी तरह अवगत थे और उन्होंने निर्णय लेने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप किया। इसके परिणामस्वरूप सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। आरोप तय करते समय अदालत ने यह भी कहा कि लालू यादव ने भूमि निविदा प्रक्रिया में पात्रता शर्तों में कथित तौर पर हेरफेर कर सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग किया।


इस मामले में उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, और उनके बेटे एवं बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर भी आरोप हैं। आरोपों में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, और सरकारी प्रक्रिया में हस्तक्षेप जैसी गंभीर धाराएँ शामिल हैं।


IRCTC टेंडर और ‘लैंड फॉर जॉब’ मामले की पृष्ठभूमि यह है कि रेलवे में कथित अनियमित नियुक्तियों और जमीन के गलत उपयोग के मामले सामने आए थे। आरोप है कि रेलवे में नौकरियों के बदले जमीन ली गई और टेंडर प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन किया गया। यह मामला 2017 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज की गई FIR से जुड़ा है, जिसमें लालू प्रसाद यादव, उनके परिवार के सदस्य, IRCTC के अधिकारी और कुछ निजी कंपनियों के प्रतिनिधियों के खिलाफ जांच की गई।


साथ ही, प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले में अपने स्तर पर जांच कर रही है। एजेंसियों का दावा है कि टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई, जिससे कुछ निजी कंपनियों को अनुचित लाभ हुआ। इसके साथ ही आरोप है कि सरकारी नियमों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन करते हुए सरकारी जमीन का निजी उपयोग किया गया।


विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने आरोप तय करते समय कहा था कि लालू प्रसाद यादव ने केंद्रीय रेल मंत्री के पद का दुरुपयोग किया और यह मामला गंभीर भ्रष्टाचार का उदाहरण है। अदालत ने माना कि निर्णय प्रक्रिया में उनकी सक्रिय भागीदारी और कथित साजिश के कारण सरकारी हित को गंभीर नुकसान हुआ।


आज की सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे यह तय होगा कि निचली अदालत द्वारा तय आरोपों के खिलाफ उच्च न्यायालय किस प्रकार की कानूनी कार्रवाई करेगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस सुनवाई के बाद ही मामले की आगे की दिशा, जैसे आरोप तय करने की वैधता और कोर्ट में बहस की प्रकृति, स्पष्ट होगी।


राजनीतिक रूप से यह मामला काफी संवेदनशील भी है। लालू प्रसाद यादव भारतीय राजनीति में लंबे समय से प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं और उनके परिवार के सदस्य भी राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं। ऐसे में इस मामले की सुनवाई न केवल कानूनी दृष्टि से, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


इस मामले में आगे क्या होगा, यह आज की सुनवाई के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। अदालत के आदेश से यह तय होगा कि क्या आरोप तय करने का निर्णय बरकरार रहेगा या उसे चुनौती दी जा सकेगी। साथ ही, इस सुनवाई से लालू परिवार के खिलाफ चल रही CBI और ED की जांच की दिशा पर भी असर पड़ सकता है।


बहरहाल, 5 जनवरी की यह सुनवाई पूरे देश की निगाहों में है और इसे बड़े कानूनी और राजनीतिक महत्व के रूप में देखा जा रहा है। लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के लिए यह सुनवाई एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है।