1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 04, 2026, 7:13:30 PM
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Bihar Politics : बिहार की सियासत में इस वक्त हलचल तेज है। चर्चा है कि मुख्यमंत्री Nitish Kumar गुरुवार को राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव तय माना जा रहा है। ऐसी स्थिति में एनडीए को नया मुख्यमंत्री चुनना होगा। पिछले साल नवंबर में एनडीए को नीतीश कुमार के नेतृत्व में बड़ी जीत मिली थी, लेकिन अब सवाल उठ रहा है कि अगर वे राज्यसभा जाते हैं तो बिहार की कमान किसके हाथ में होगी?
सम्राट चौधरी सबसे मजबूत दावेदार
अगर मुख्यमंत्री पद खाली होता है तो Samrat Choudhary की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है। बीजेपी के 89 विधायक हैं, जो एनडीए में सबसे बड़ा दल है। सम्राट चौधरी वर्तमान में वित्त, स्वास्थ्य, शहरी विकास और गृह जैसे अहम विभाग संभाल रहे हैं। वे बीजेपी विधायक दल के नेता भी हैं, जिससे उनकी स्थिति और मजबूत हो जाती है।
जनवरी 2024 में वे नीतीश सरकार में डिप्टी सीएम बने थे और 2025 के चुनाव के बाद भी इस पद पर बने रहे। गृह विभाग मिलना बीजेपी के लिए रणनीतिक तौर पर अहम माना गया। सम्राट चौधरी राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी सात बार विधायक और सांसद रहे। वे 1999 में आरजेडी से राजनीति में आए, बाद में जेडीयू और फिर बीजेपी में शामिल हुए। 2023 में वे बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भी बने।
विजय कुमार सिन्हा भी रेस में
सीएम पद की दौड़ में Vijay Kumar Sinha भी पीछे नहीं हैं। हालांकि बीजेपी विधायक दल के नेता होने के कारण सम्राट चौधरी को बढ़त मानी जाती है, लेकिन विजय सिन्हा अपनी आक्रामक राजनीतिक शैली के लिए जाने जाते हैं। वे लगातार विपक्ष के नेता Tejashwi Yadav पर हमलावर रहे हैं।
विजय कुमार सिन्हा 2005 से लखीसराय से विधायक हैं। वे पेशे से सिविल इंजीनियर रहे हैं और आरएसएस-एबीवीपी पृष्ठभूमि से आते हैं। छात्र राजनीति से आगे बढ़ते हुए वे 2020 से 2022 तक विधानसभा अध्यक्ष और फिर नेता प्रतिपक्ष रहे। भ्रष्टाचार और माफिया के खिलाफ सख्त रुख उनकी पहचान मानी जाती है।
निशांत कुमार का नाम भी चर्चा में
मुख्यमंत्री पद की चर्चा में Nishant Kumar का नाम भी सामने आ रहा है, हालांकि उनकी संभावना फिलहाल कमजोर मानी जा रही है। उन्हें डिप्टी सीएम की रेस में जरूर आगे बताया जा रहा है। निशांत को राजनीति में नया चेहरा माना जाता है और अभी तक उनका कोई स्वतंत्र चुनावी आधार नहीं है।
हाल के दिनों में जेडीयू के पोस्टर, 1 अणे मार्ग पर होली कार्यक्रम और कुछ नेताओं के समर्थन से उनके सक्रिय राजनीति में आने के संकेत जरूर मिले हैं। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर अपने पिता नीतीश कुमार का समर्थन किया था और उन्हें एनडीए का सीएम चेहरा बताया था। हालांकि वे अभी तक आक्रामक राजनीतिक भूमिका में नजर नहीं आए हैं।
क्या होगा आगे?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं तो बीजेपी अपने मजबूत संगठन और विधायक संख्या के आधार पर सम्राट चौधरी को आगे कर सकती है। हालांकि अंतिम फैसला एनडीए नेतृत्व और केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर होगा। बिहार की राजनीति आने वाले दिनों में और दिलचस्प मोड़ ले सकती है।