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साइबर फ्रॉड पीड़ितों को बड़ी राहत: ठगी के बाद अब FIR और कोर्ट की जरूरत नहीं, बैंक ही लौटाएगा पैसा

साइबर ठगी के पीड़ितों के लिए राहत! अब 50 हजार तक की ठगी में FIR की जरूरत नहीं, बैंक खुद करेगा रिफंड। जानें पूरा नियम और प्रक्रिया।

साइबर फ्रॉड पीड़ितों को बड़ी राहत: ठगी के बाद अब FIR और कोर्ट की जरूरत नहीं, बैंक ही लौटाएगा पैसा
Tejpratap
Tejpratap
5 मिनट

PATNA: बिहार में हर रोज साइबर ठगों के शिकार बन रहे लोगों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर है. ठगी के शिकार बनने वालों को अब FIR दर्ज कराने और कोर्ट में मुकदमे के झमेले में नहीं फंसना होगा. अब बैंक से स्तर से ही उनकी शिकायत का निपटारा हो जाएगा.

साइबर क्राइम के शिकार लोगों के लिए आई-4C (Indian Cyber Crime Coordination Centre) ने नया SOP जारी कर दिया है. इसके अनुसार, अब साइबर फ्रॉड से जुड़े छोटे मामलों का निपटारा सीधे बैंक स्तर पर कर दिया जाएगा। इसके लिए सभी बैंकों को ‘प्रिवेंट रिफंड पोर्टल’ कि व्यवस्था की गई है, जहां शिकायत दर्ज होते ही कार्रवाई शुरू हो जाएगी.

50 हजार की ठगी के लिए नई व्यवस्था 

हालांकि ये व्यवस्था छोटी ठगी के शिकार लोगों के लिए की गई है.इसके लिए 50 हजार तक की राशि तय की गई है. यानि अब अगर किसी व्यक्ति के साथ 50 हजार रुपये से कम की साइबर ठगी होती है, तो उसे FIR दर्ज कराने या कोर्ट के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी।

नई व्यवस्था के तहत बैंक खुद पीड़ित का पैसा लौटाने की प्रक्रिया पूरी करेग. इस नई व्यवस्था का उद्देश्य पुलिस और कोर्ट पर बढ़ते बोझ को कम करना और पीड़ितों को जल्द राहत देना है.


कैसे मिलेगा पैसा वापस?

अब जानिए कि साइबर ठगों के शिकार बने लोगों को क्या करना होगा. साइबर ठगी के शिकार व्यक्ति को 2 घंटे के भीतर हेल्पलाइन नंबर 1930 या वेबसाइट cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करनी होगी.


शिकायत दर्ज होते ही बैंक संबंधित खाते को होल्ड करेगा. फिर इस मामले की जांच पड़ताल की जाएगी. जांच के बाद 3 महीने के भीतर पीड़ित को रिफंड मिल सकता है.


क्यों पड़ी इस व्यवस्था की जरूरत?

दरअसल साइबर ठगी के मामलों में भरी इजाफा हुआ है. हालत ये है कि पुलिस ऐसे मुकदमों के बोझ तले दब गई है. पटना साइबर थाना में एक-एक IO (इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर) पर करीब 250 केस का बोझ है, जिनमें लगभग 80% मामले लंबित हैं।


छोटी रकम के कारण बड़ी परेशानी:

आंकड़ों के मुताबिक, करीब 60% साइबर ठगी के मामले 50 हजार रुपये से कम के होते हैं। छोटी रकम होने के कारण लोग कानूनी प्रक्रिया में नहीं पड़ते और पैसा छोड़ देते हैं।

. रिकवरी में हो रही देरी

साइबर ठगी का मामला सामने आने और FIR दर्ज होने के बाद भी ठगी के पैसे की रिकवरी नहीं हो रही. 2025 में पटना में 75 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हुई, जिसमें से 19.90 करोड़ रुपये होल्ड किए गए, लेकिन सिर्फ 3.25 करोड़ रुपये ही वापस मिल सके.


जानिए कैसी है समस्या

साइबर ठगी के मामलों का हाल जानने के लिए पटना के दो मामलों को जानिए. बोरिंग रोड के एक प्रेम रंजन नाम के व्यक्ति से 4.59 लाख रुपये की ठगी हुई। इसमें 1.50 लाख रुपये होल्ड किए गए, लेकिन पुलिस रिपोर्ट में देरी के कारण पीड़ित को पैसा वापस नहीं मिल सका.


वहीं, पटना के ही पटेल नगर के प्रेम कुमार से 65 हजार रुपये की ठगी हुई। 38 हजार रुपये होल्ड किए गए, लेकिन कोर्ट में पुलिस रिपोर्ट समय पर नहीं पहुंचने के कारण रिफंड अटका रहा।


अभी भी सावधानी की जरूरत


सरकार ने इस नई व्यवस्था के जरिए प्रक्रिया को आसान जरूर बनाया है, लेकिन सावधानी बरतना अब भी बेहद जरूरी है. इसके तहत ठगी के तुरंत बाद शिकायत करना अनिवार्य है ठगी के बाद के ‘गोल्डन ऑवर’ यानी शुरुआती 2 घंटे सबसे महत्वपूर्ण हैं. इसी दौरान शिकायत करें. देर होने पर ठग पैसे को कई खातों में ट्रांसफर कर देते हैं, जिससे रिकवरी मुश्किल हो जाती है


इन बातों का रखें ध्यान

साइबर ठगी की शिकायत करते समय सभी ट्रांजैक्शन डिटेल्स सही दें. बैंक से होल्ड रिपोर्ट लेना न भूलें. हर हालात में संदिग्ध कॉल, लिंक और ऐप से बचें.


नई व्यवस्था से साइबर ठगी के छोटे मामलों में पीड़ितों को बड़ी राहत मिलेगी. अब लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचते हुए सीधे बैंक के माध्यम से पैसा वापस मिल सकेगा। हालांकि, समय पर शिकायत और सतर्कता ही इस व्यवस्था का सबसे अहम हिस्सा है.