पटना: बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन दूसरे सत्र में बिहार भूमि दाखिल-खारिज संशोधन विधेयक को लेकर सदन में जोरदार बहस देखने को मिली। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल जब सदन में विधेयक पेश कर रहे थे, उसी दौरान विपक्ष की ओर से इस पर चर्चा का प्रस्ताव लाया गया। चर्चा के दौरान राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के विधायकों ने सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार का खजाना खाली हो गया है, इसलिए दाखिल-खारिज प्रक्रिया पर शुल्क लगाने जैसा कदम उठाया जा रहा है।
RJD विधायक का सरकार पर तीखा हमला
विधेयक पर चर्चा के दौरान RJD विधायक ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि अब आम लोगों से भी पैसा वसूलने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि सरकार को पैसे की इतनी ही जरूरत है तो "जनता के शरीर का चमड़ा खींचकर उसका जूता बनाकर बेच देना चाहिए।" विपक्ष के इस बयान के बाद सदन का माहौल काफी गर्म हो गया। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने इस टिप्पणी का कड़ा विरोध किया और इसे अमर्यादित बताते हुए आपत्ति जताई।
दिलीप जायसवाल ने दिया करारा जवाब
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि विपक्ष के नेताओं को "खजाना खाली होने का फोबिया" हो गया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार यही प्रचार करने में लगा रहता है कि सरकार के पास पैसे नहीं हैं, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। मंत्री ने सदन में कहा, "विपक्ष के सदस्यों को इन दिनों एक फोबिया हो गया है कि बिहार सरकार का खजाना खाली है। यह बीमारी काफी खतरनाक है, लेकिन इसका इलाज भी हमारे पास है।" उन्होंने आगे कहा कि यदि सरकार का खजाना खाली होता तो राज्य में लगातार विकास कार्य कैसे हो रहे होते। उन्होंने विपक्ष से सवाल करते हुए कहा कि क्या उन्होंने कभी सोचा था कि बिहार में विकास की रफ्तार इतनी तेज होगी।
विकास कार्यों का दिया हवाला
दिलीप जायसवाल ने कहा कि राज्य सरकार लगातार सड़क, पुल, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार आर्थिक रूप से कमजोर होती तो इतने बड़े स्तर पर विकास योजनाओं को लागू करना संभव नहीं होता। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके शासनकाल में बिहार को विकास की बजाय पिछड़ेपन की ओर धकेला गया था। मंत्री ने कहा, "चरवाहा विद्यालय की राजनीति करने वालों ने बिहार को दुर्गति की ओर ले जाने का काम किया। आज वे विकास पर सवाल उठा रहे हैं। उन्हें बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।"
गरीबों पर नहीं पड़ेगा अतिरिक्त बोझ
विपक्ष की ओर से यह भी कहा गया कि दाखिल-खारिज पर शुल्क बढ़ने से गरीबों पर आर्थिक बोझ पड़ेगा। इस पर मंत्री दिलीप जायसवाल ने स्पष्ट किया कि सरकार का यह प्रावधान गरीबों को प्रभावित नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि सरकार भूमिहीन परिवारों को तीन डिसमिल जमीन उपलब्ध कराती है और उस जमीन के मामले में किसी प्रकार का म्यूटेशन शुल्क लागू नहीं होता। इसलिए गरीबों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। मंत्री ने कहा, "गरीब जमीन खरीदने नहीं जाता। भूमिहीन परिवारों को सरकार तीन डिसमिल जमीन देती है, जिसका किसी तरह का म्यूटेशन नहीं होता।"
जमीन खरीदने वालों के लिए 200 रुपये कोई बड़ी राशि नहीं
दिलीप जायसवाल ने कहा कि यह शुल्क उन लोगों पर लागू होगा जो लाखों और करोड़ों रुपये खर्च कर जमीन खरीदते हैं। ऐसे लोगों के लिए दाखिल-खारिज प्रक्रिया में 200 रुपये का शुल्क कोई बड़ी बात नहीं है। उन्होंने कहा, "जो व्यक्ति लाखों और करोड़ों रुपये लगाकर जमीन खरीदता है, उसे 200 रुपये देने में कोई परेशानी नहीं होगी।"
सदन में जारी रही बहस
विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच काफी देर तक बहस चली। विपक्ष ने सरकार पर आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ाने का आरोप लगाया, जबकि सरकार का कहना है कि यह संशोधन प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से लाया गया है।
अब इस विधेयक पर सदन में आगे भी चर्चा होने की संभावना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भूमि दाखिल-खारिज संशोधन विधेयक आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है, क्योंकि विपक्ष इसे जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बता रहा है, जबकि सरकार इसे प्रशासनिक सुधार और राजस्व व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में आवश्यक कदम बता रही है।




