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गांधी मैदान से CM सम्राट का ऐलान! रक्षाबंधन से स्कूल-कॉलेज के बाहर शुरू होगा ये काम, पंचायतों में भी होगा बड़ा बदलाव

15 अगस्त पर गांधी मैदान से CM सम्राट चौधरी ने सहयोग शिविर, शिकायतों के 30 दिन में समाधान, अधिकारियों पर कार्रवाई और पंचायत विकास दिवस की जानकारी दी।

गांधी मैदान से CM सम्राट का ऐलान! रक्षाबंधन से स्कूल-कॉलेज के बाहर शुरू होगा ये काम, पंचायतों में भी होगा बड़ा बदलाव
Tejpratap
Tejpratap
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पटना: 15 अगस्त के मौके पर पटना के गांधी मैदान में झंडोत्तोलन के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार के विकास और जनसेवा को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं का विस्तार से जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन सिर्फ स्वतंत्रता दिवस मनाने का नहीं, बल्कि विकसित भारत के निर्माण में बिहार की अग्रणी भूमिका का संकल्प लेने का भी दिन है। उन्होंने कहा कि बिहार सेवा, संकल्प और समर्पण की भावना के साथ आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब उन्हें बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में जनता की सेवा करने का अवसर मिला, तब उन्होंने यह संकल्प लिया था कि राज्य के प्रत्येक नागरिक को समान अवसर मिले। प्रशासनिक व्यवस्था पारदर्शी हो और हर व्यक्ति को सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिले। इसी सोच के तहत सरकार की ओर से कई नई पहल शुरू की गई हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, “बिहार की लगभग 85% आबादी गांवों में रहती है। इसलिए महीने के आखिरी रविवार को पंचायत दिवस कार्यक्रम शुरू कराया गया है, जिससे गांवों की समस्याओं का समाधान किया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं के लिए लगातार काम कर रही है। देश में सबसे अधिक महिला पुलिस बल बिहार में है। बिहार के स्कूल-कॉलेजों में ‘पुलिस दीदी’ की तैनाती की जाएगी। इसकी शुरुआत रक्षाबंधन से होगी। पुलिस दीदी छात्रों की सुरक्षा के लिए स्कूटी के साथ तैनात रहेंगी।”

जनता और प्रशासन के बीच सीधा संवाद बना ‘सहयोग शिविर’

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सहयोग शिविर को सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने की महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को आयोजित होने वाले सहयोग शिविर में आम नागरिक अपनी शिकायतें और समस्याएं सीधे प्रशासन के सामने रख सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि शिकायतों के निष्पादन के लिए 30 दिनों की समय-सीमा तय की गई है। अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने के लिए चरणबद्ध व्यवस्था बनाई गई है। यदि 10 दिनों के भीतर कोई आदेश पारित नहीं होता है तो पहला स्पष्टीकरण जारी किया जाता है। 20 दिनों तक काम नहीं होने पर दूसरा स्पष्टीकरण और 25 दिनों में भी कार्रवाई नहीं होने पर तीसरा नोटिस जारी होता है।

उन्होंने कहा कि इसके बाद भी यदि निर्धारित समय में शिकायत का समाधान नहीं होता है तो संबंधित पदाधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाती है। मुख्यमंत्री ने इसे प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम बताया।

6.46 लाख से ज्यादा आवेदन, 95 फीसदी का निष्पादन

मुख्यमंत्री ने सहयोग शिविर की प्रगति का आंकड़ा भी साझा किया। उन्होंने कहा कि अब तक करीब 6 लाख 46 हजार 181 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें लगभग 95 प्रतिशत आवेदनों का सफल निष्पादन किया जा चुका है।

उन्होंने बताया कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी सरकार की नजर है। अब तक करीब 17,773 अधिकारियों-कर्मचारियों को पहला नोटिस, 860 को दूसरा नोटिस और 25 दिन के बाद दिए जाने वाले 48 तीसरे नोटिस जारी किए गए हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ आवेदन लेना नहीं, बल्कि उसकी समयबद्ध तरीके से सुनवाई और समाधान सुनिश्चित करना है।

संतुष्ट नहीं हैं तो मुख्यमंत्री सचिवालय में भी सुनवाई

मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर किसी नागरिक को लगता है कि उसकी शिकायत का उचित समाधान नहीं हुआ है या उसे अपेक्षित आदेश नहीं मिला है, तो उसके लिए भी सरकार ने व्यवस्था की है।  उन्होंने बताया कि हर महीने के दूसरे मंगलवार को मुख्यमंत्री सचिवालय में सहयोग कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यहां ऐसे मामलों की समीक्षा की जाती है और संबंधित पदाधिकारियों को उचित निर्णय लेने के निर्देश दिए जाते हैं। इस व्यवस्था के जरिए सरकार अंतिम स्तर तक आम लोगों की शिकायतों को सुनने और उनका समाधान करने की कोशिश कर रही है।

अब हर महीने गांवों में होगा ‘पंचायत विकास दिवस’

गांवों के विकास पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार की बड़ी आबादी गांवों में रहती है। इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को सीधे प्रशासन तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले 26 जनवरी, 15 अगस्त और 2 अक्टूबर जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर पंचायत स्तर पर लोगों की समस्याएं सुनने की व्यवस्था की जाती थी। अब सरकार ने इसे और व्यापक रूप देते हुए हर महीने के अंतिम रविवार को पंचायत विकास दिवस आयोजित करने की शुरुआत की है।

इस दिन पंचायत स्तर पर बैठक होगी और ग्रामीण अपनी समस्याएं एवं विकास से जुड़ी जरूरतें सीधे सामने रख सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायत की समस्याओं की जानकारी स्वराज पोर्टल के माध्यम से जिला स्तर तक पहुंचेगी और राज्य स्तर पर भी इसकी निगरानी की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के जरिए गांव की आवाज को ऊपर तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर इसकी जानकारी केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री तक भी पहुंचाई जा सकेगी।

‘गांव की समस्या गांव में सुनी जाए’, सरकार का लक्ष्य, 10 चीनी मिलें चालू '

मुख्यमंत्री के संबोधन से साफ है कि सरकार प्रशासन को लोगों के दरवाजे तक ले जाने पर जोर दे रही है। सहयोग शिविर के जरिए जहां लोगों को अधिकारियों के सामने अपनी शिकायत रखने का मंच दिया गया है, वहीं पंचायत विकास दिवस के जरिए ग्रामीण विकास से जुड़ी समस्याओं को पंचायत स्तर से ही दर्ज करने और उनके समाधान की निगरानी करने की व्यवस्था की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा, “बिहार के जो भी लोग बाहर हैं, उनसे कहना चाहूंगा कि आप अपनी जन्मभूमि को अपनी कर्मभूमि बनाइए। बिहार आइए और यहां काम करिए। उन्होंने कहा, "बिहार में 10 चीनी मिलें चालू हो चुकी हैं। अगले 6 महीने में 5 और चीनी मिलें चालू करने का काम हम करेंगे।”


15 अगस्त के मंच से मुख्यमंत्री ने इन पहलों को बिहार को विकसित और जवाबदेह राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि सेवा, पारदर्शिता, जवाबदेही और गांवों का विकास बिहार की प्रगति के लिए सरकार के प्रमुख संकल्प हैं।