1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 24, 2026, 8:27:26 AM
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TRE-3 Paper Leak : बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-3) पेपर लीक मामले में जांच कर रही आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को बड़ी सफलता हाथ लगी है। टीम ने राजधानी पटना के करबिगहिया इलाके में छापेमारी कर कुख्यात आरोपी प्रवीण कुमार सिन्हा उर्फ डब्लू मुखिया को गिरफ्तार किया है। डब्लू मुखिया को इस पूरे पेपर लीक गिरोह के सरगना संजीव मुखिया का करीबी सहयोगी बताया जा रहा है। उसकी गिरफ्तारी से इस हाई-प्रोफाइल मामले में कई अहम खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।
जांच एजेंसी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी लखीसराय जिले के मानिकपुर थाना क्षेत्र के कोनिपार गांव का निवासी है और लंबे समय से पेपर लीक नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। बताया जा रहा है कि वह पिछले करीब 10 वर्षों से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक कराने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। ईओयू की शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2024 में आयोजित बीपीएससी शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-3) का पेपर भी इसी गिरोह ने लीक किया था।
पूछताछ के दौरान डब्लू मुखिया ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उसने बताया कि पेपर लीक होने के बाद उम्मीदवारों को झारखंड के हजारीबाग स्थित एक होटल में इकट्ठा किया गया था, जहां उन्हें लीक हुए प्रश्नों के उत्तर रटवाए गए। डब्लू खुद 5 से 6 गाड़ियों में करीब 30 अभ्यर्थियों को लेकर वहां पहुंचा था। यह जानकारी जांच एजेंसी के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली स्पष्ट हो रही है।
सूत्रों के मुताबिक, परीक्षा से ठीक एक दिन पहले जब पुलिस ने हजारीबाग के होटल में छापेमारी की थी, तब डब्लू मौके से फरार हो गया था। इसके बाद वह लखीसराय लौटकर लगातार ठिकाने बदलते हुए छिपकर रह रहा था। हालांकि, ईओयू को गुप्त सूचना मिली, जिसके आधार पर पटना में उसकी मौजूदगी का पता चला और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
इस मामले में अब तक आर्थिक अपराध इकाई द्वारा 293 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। इनमें गिरोह के कई अहम सदस्य, बिचौलिए और लाभार्थी शामिल हैं। बावजूद इसके, अभी भी कई संदिग्ध फरार हैं, जिनकी तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है।
ईओयू अधिकारियों का कहना है कि डब्लू मुखिया से पूछताछ के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क की जड़ें किन-किन राज्यों तक फैली हुई हैं और इसमें किन प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता हो सकती है।
TRE-3 पेपर लीक कांड ने बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लाखों अभ्यर्थियों की मेहनत और भविष्य पर इस तरह के संगठित अपराध का सीधा असर पड़ता है। राज्य सरकार और जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इस नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना और दोषियों को सख्त सजा दिलाना है।
फिलहाल, डब्लू मुखिया की गिरफ्तारी को इस केस में एक बड़ी कड़ी माना जा रहा है। आने वाले दिनों में उससे पूछताछ के आधार पर और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है, जिससे इस पूरे पेपर लीक रैकेट की परतें खुल सकती हैं।