Bihar Vigilance Bureau Scam : ' ACP बोल रहा हूं...', निगरानी ट्रैपिंग के नाम पर ठगी, CDPO से 15 लाख की डिमांड; अब हुआ FIR

बिहार में निगरानी ट्रैपिंग के नाम पर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने सरकारी महकमे में भी चिंता बढ़ा दी है। पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया प्रखंड में पदस्थापित सीडीपीओ को खुद को निगरानी विभाग का एसीपी बताने वाले एक शातिर ठग ने फोन कर 15 लाख र

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sun, 04 Jan 2026 10:44:19 AM IST

 Bihar Vigilance Bureau Scam :  ' ACP बोल रहा हूं...', निगरानी ट्रैपिंग के नाम पर ठगी, CDPO से 15 लाख की डिमांड; अब हुआ FIR

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Bihar Vigilance Bureau Scam : बिहार में निगरानी ट्रैपिंग के नाम पर ठगी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस बार ठगों ने सरकारी अफसर को ही निशाना बनाया और खुद को निगरानी विभाग का एसीपी बताकर 15 लाख रुपये की डिमांड कर डाली। मामला पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया प्रखंड से जुड़ा है, जहां की सीडीपीओ (बाल विकास परियोजना पदाधिकारी) रूपम रानी से फोन पर धमकी और पैसे की मांग की गई। पीड़िता की लिखित शिकायत पर केसरिया थाना में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और पुलिस पूरे मामले की छानबीन में जुट गई है।


जानकारी के अनुसार, यह घटना 2 जनवरी की है। केसरिया की सीडीपीओ रूपम रानी के मोबाइल फोन पर एक कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने अपना नाम हर्षित कुमार बताया और खुद को बिहार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो का एसीपी बताया। फोन करने वाले ने बेहद आत्मविश्वास के साथ बात करते हुए सीडीपीओ को यह कहकर डराने की कोशिश की कि 19 दिसंबर को निगरानी विभाग द्वारा की गई एक ट्रैपिंग कार्रवाई में पकड़ी गई एलएस (संभावित रूप से किसी कर्मी या बिचौलिये) ने जांच के दौरान उनका नाम लिया है। उसने दावा किया कि इसी आधार पर सीडीपीओ के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया जा रहा है।


फोन पर बातचीत के दौरान आरोपी ने सीडीपीओ को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। उसने कहा कि यदि वे चाहें तो अपने और अपने कार्यालय के कर्मियों के नाम को इस निगरानी ट्रैपिंग केस से हटवा सकती हैं, लेकिन इसके बदले उन्हें 15 लाख रुपये देने होंगे। आरोपी ने यह भी धमकी दी कि अगर रुपये नहीं दिए गए तो न सिर्फ उनका, बल्कि उनके पूरे कार्यालय के स्टाफ का नाम निगरानी के ट्रैपिंग केस में डाल दिया जाएगा, जिससे सभी को कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।


सरकारी अफसर होने के बावजूद इस तरह की धमकी से सीडीपीओ कुछ समय के लिए परेशान जरूर हुईं, लेकिन उन्होंने सूझबूझ का परिचय दिया। उन्होंने बिना किसी को बताए सीधे निगरानी विभाग के एक डीएसपी से संपर्क किया और पूरे मामले की जानकारी दी। निगरानी विभाग के अधिकारी ने साफ तौर पर बताया कि हर्षित कुमार नाम का कोई भी व्यक्ति निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में कार्यरत नहीं है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि जिस मोबाइल नंबर से कॉल आया था, वह भी निगरानी विभाग का आधिकारिक नंबर नहीं है। इसके बाद यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि मामला ठगी और फर्जीवाड़े का है।


निगरानी विभाग से सच्चाई सामने आने के बाद सीडीपीओ रूपम रानी ने केसरिया थाना में लिखित आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की। उन्होंने अपने आवेदन में पूरी घटना का विवरण दिया और बताया कि किस तरह खुद को एसीपी बताकर आरोपी ने 15 लाख रुपये की मांग की और झूठे केस में फंसाने की धमकी दी। आवेदन मिलने के बाद केसरिया थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


इस संबंध में केसरिया थानाध्यक्ष अनुज कुमार पांडेय ने बताया कि सीडीपीओ की ओर से आवेदन प्राप्त हुआ है। आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और मामले की गहन जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस उस मोबाइल नंबर की तकनीकी जांच कर रही है, जिससे कॉल किया गया था। कॉल डिटेल्स, लोकेशन और संबंधित सिम के दस्तावेजों की जांच की जा रही है ताकि आरोपी तक पहुंचा जा सके। इसके साथ ही निगरानी ब्यूरो से भी लगातार संपर्क किया जा रहा है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस तरह का कोई वास्तविक मामला विभाग में दर्ज नहीं है।


यह मामला न सिर्फ एक सरकारी अधिकारी को ठगने की कोशिश का है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह ठग निगरानी, सीबीआई और अन्य जांच एजेंसियों के नाम का इस्तेमाल कर अफसरों और आम लोगों को डराने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस का मानना है कि यह किसी संगठित ठगी गिरोह का भी हिस्सा हो सकता है, जो अलग-अलग जिलों में इस तरह के फोन कर लोगों से मोटी रकम ऐंठने की कोशिश करता है।


फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि उसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क है या वह अकेले ही इस तरह की ठगी की कोशिश कर रहा था। वहीं, प्रशासन ने भी अफसरों और कर्मचारियों से अपील की है कि इस तरह की किसी भी कॉल या धमकी से घबराएं नहीं और तुरंत संबंधित विभाग व पुलिस को सूचना दें।