1st Bihar Published by: First Bihar Updated Jan 13, 2026, 5:38:25 PM
थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों का सातवां बैच - फ़ोटो social media
PATNA: थैलेसीमिया से पीड़ित 7 बच्चों को इलाज के लिए वेल्लोर ले जाया जा रहा है। इन बच्चों का CMC वेल्लोर में निःशुल्क बोन मैरो ट्रांसप्लांट होगा। जो बिहार की नीतीश सरकार मुफ्त करवा रही है। इन सभी बच्चों को लेकर आज एक टीम वेल्लोर के लिए रवाना हुई है। इस बात की जानकारी बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने दी।
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने कहा है कि माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़, संवेदनशील एवं सर्वसुलभ बनाने की दिशा में निरंतर प्रभावी कार्य कर रही है। इसी क्रम में थैलेसीमिया (मेजर) पीड़ित 07 बच्चों का एक नया बैच 13 जनवरी को बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) हेतु तमिलनाडु के वेल्लोर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सीएमसी) रवाना किया गया है। यह थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों का सातवां बैच है।
उन्होंने कहा कि सातवें बैच में राज्य के विभिन्न जिलों से चयनित बच्चों को बीएमटी हेतु भेजा गया है। इनमें मधुबनी, मुजफ्फरपुर, मधेपुरा, वैशाली, सीतामढ़ी, खगड़िया एवं पूर्वी चंपारण से एक-एक बच्चा शामिल है। इससे पूर्व अलग-अलग चरणों में कुल 26 बच्चों का सफलतापूर्वक बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराया जा चुका है।
राज्य सरकार थैलेसीमिया, हीमोफिलिया एवं सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के समुचित उपचार एवं सतत देखभाल के लिए बहुस्तरीय प्रयास कर रही है। जिसके अंतर्गत राज्य में 06 एकीकृत डे-केयर केंद्रों की स्थापना की गई है, जहाँ थैलेसीमिया के मरीजों को जांच सुविधा, ब्लड ट्रांसफ्यूजन, आयरन चेलेटिंग दवाएं, एंटी हेमोफिलिक फैक्टर (एएचएफ) ट्रांसफ्यूजन सहित आवश्यक चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।
मंगल पांडेय ने कहा कि 12 वर्ष से कम आयु के योग्य बच्चों के लिए संचालित मुख्यमंत्री बाल थैलेसीमिया योजना के तहत बिहार सरकार द्वारा क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया गया है। इस योजना के अंतर्गत ऐसे चयनित बच्चों जिनका भाई या बहन से एच.एल.ए. मैच करता है। उनका सीएमसी वेल्लोर में निःशुल्क बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराया जाता है।
थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के बोन मैरो ट्रांसप्लांट एवं संपूर्ण उपचार प्रक्रिया पर राज्य सरकार प्रति मरीज लगभग 15 लाख रुपये का व्यय करती है। इस राशि में मरीज, डोनर एवं माता-पिता की हवाई यात्रा, अस्पताल में उपचार, वेल्लोर में आवास, भोजन सहित अन्य आवश्यक खर्च सम्मिलित हैं। राज्य सरकार गंभीर एवं दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य प्रदान करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है तथा आने वाले समय में ऐसी योजनाओं को और अधिक प्रभावी एवं व्यापक स्वरूप प्रदान किया जाएगा।