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Bihar News: टेंडर घोटाले में बड़ा खुलासा: 4000 पन्नों की चार्जशीट में रिशु श्री से लेकर IAS संजीव हंस तक कई नाम, जानिए किस पर क्या आरोप

बिहार के टेंडर घोटाला मामले में SVU ने कोर्ट में 4000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। रिशु श्री, IAS संजीव हंस समेत कई अफसरों पर लगे गंभीर आरोपों की पूरी जानकारी पढ़ें।

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Tejpratap
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Bihar News: बिहार के चर्चित टेंडर घोटाला मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई अब और तेज हो गई है। बिहार विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने इस मामले में कोर्ट में करीब 4000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में ठेकेदार रिशु श्री, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजीव हंस समेत कई अफसरों, इंजीनियरों और अन्य लोगों के नाम शामिल किए गए हैं।


जांच एजेंसी का दावा है कि सरकारी विभागों में ठेके हासिल करने के लिए प्रभाव, पैसों के लेन-देन और कमीशन के नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया। चार्जशीट में अलग-अलग आरोपियों की भूमिका का विस्तार से उल्लेख किया गया है।


ठेकों के खेल में कमीशन का आरोप

जांच के अनुसार, ठेकेदार रिशु श्री पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी विभागों में अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर कई महत्वपूर्ण ठेके हासिल किए। आरोप है कि उनकी कंपनियों के बिल पास कराने और काम दिलाने के बदले सरकारी अधिकारियों को 2 से 3.5 प्रतिशत तक कमीशन दिया जाता था।


जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि यह पूरा नेटवर्क कई स्तरों पर काम कर रहा था, जिसमें ठेकेदार, अधिकारी और अन्य सहयोगी शामिल थे।


IAS संजीव हंस पर लगे गंभीर आरोप

चार्जशीट में आईएएस संजीव हंस का नाम भी शामिल है। आरोप है कि जल संसाधन विभाग में सचिव रहते हुए वीरपुर, सुपौल स्थित कोसी बराज सर्किल में फिजिकल मॉडलिंग सेंटर स्थापित करने की प्रक्रिया में अनियमितताएं बरती गईं।


जांच एजेंसी का आरोप है कि रिशु श्री समेत अन्य लोगों से उन्हें कथित तौर पर कमीशन की राशि प्राप्त हुई। हालांकि मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच जारी है।


पवन और संतोष कुमार की भूमिका

चार्जशीट में पवन कुमार और संतोष कुमार का नाम भी शामिल है। आरोप है कि मेसर्स मातृस्वा कंस्ट्रक्शन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के जरिए जल संसाधन विभाग समेत अन्य सरकारी विभागों में ठेके हासिल किए गए।


जांच के मुताबिक, इन ठेकों के बदले सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने का आरोप लगाया गया है।


नगर आयुक्त रहते मुमुक्षु चौधरी पर आरोप

जांच एजेंसी ने मुमुक्षु चौधरी पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि सीतामढ़ी और सहरसा के नगर आयुक्त रहते हुए शहरी विकास परियोजनाओं से जुड़े करीब 10 करोड़ रुपये के टेंडर रिशु श्री और उनकी कंपनियों को दिए गए।


इसके बदले रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया है। ईडी की छापेमारी के दौरान उनके घर से करीब दो करोड़ रुपये नकद मिलने की बात भी सामने आई थी।


तारिणी दास और उमेश कुमार सिंह भी घेरे में

चार्जशीट में तारिणी दास का नाम भी शामिल है। आरोप है कि भवन निर्माण विभाग की 10 से अधिक सरकारी निविदाओं का काम रिशु श्री और उनकी कंपनियों को दिया गया। इसके बदले 2 से 3 प्रतिशत तक रिश्वत लेने का आरोप है।


जांच के दौरान ईडी की कार्रवाई में उनके आवास से 8.57 करोड़ रुपये नकद बरामद होने की बात सामने आई थी।


वहीं उमेश कुमार सिंह पर ड्रेनेज पंपिंग स्टेशन वर्क समेत अन्य निविदाओं में रिशु श्री को फायदा पहुंचाने और एक प्रतिशत कमीशन लेने का आरोप लगाया गया है। छापेमारी में उनके घर से करीब एक करोड़ रुपये नकद बरामद होने का दावा किया गया था।


4000 पन्नों की चार्जशीट से बढ़ी हलचल

इस मामले में दाखिल की गई लंबी चार्जशीट ने बिहार के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। जांच एजेंसी अब चार्जशीट में शामिल तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।


टेंडर घोटाले का यह मामला सरकारी ठेकों में पारदर्शिता और अधिकारियों-ठेकेदारों के गठजोड़ पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले में और नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।