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Bihar teacher transfer : बिहार में TRE-3 शिक्षक ट्रांसफर का बड़ा अपडेट, जानें कब मिलेगा आपका पसंदीदा स्थान; विभाग ने कर दिया क्लियर

बिहार में टीआरई-3 शिक्षकों का ट्रांसफर जून-जुलाई 2026 में प्रोबेशन खत्म होने के बाद। नई नीति शिक्षक-छात्र अनुपात और दूरी पर आधारित होगी।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 21, 2026, 3:47:35 PM

Bihar teacher transfer : बिहार में TRE-3 शिक्षक ट्रांसफर का बड़ा अपडेट, जानें कब मिलेगा आपका पसंदीदा स्थान; विभाग ने कर दिया क्लियर

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Bihar teacher transfer : बिहार में टीआरई-3 के तहत नियुक्त शिक्षकों को लंबे समय से अपने ट्रांसफर का इंतजार है। खासकर वे शिक्षक जो अपने घर से दूर जिलों में पदस्थापित हैं, वे अपने गृह जिले या नजदीकी स्थान पर स्थानांतरण की उम्मीद लगाए बैठे हैं। इस बीच शिक्षा विभाग ने इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है और स्पष्ट किया है कि टीआरई-3 शिक्षकों का ट्रांसफर कब और किन नियमों के तहत किया जाएगा।


शिक्षा विभाग के अनुसार, टीआरई-3 के तहत बहाल शिक्षकों को अभी कुछ समय और इंतजार करना होगा। विभाग ने बताया है कि टीआरई-1 और टीआरई-2 के शिक्षकों को पहले एक साल की प्रोबेशन अवधि पूरी करनी पड़ी थी, जिसके बाद उनका स्थानांतरण किया गया। इसी तर्ज पर टीआरई-3 के शिक्षकों का भी प्रोबेशन पीरियड जून-जुलाई 2026 तक पूरा होगा। इसके बाद ही उनके ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यानी फिलहाल ट्रांसफर की उम्मीद कर रहे शिक्षकों को कम से कम प्रोबेशन खत्म होने तक इंतजार करना पड़ेगा।


विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि ट्रांसफर के दौरान शिक्षकों की सुविधा का ध्यान रखा जाएगा। खासतौर पर दूरी एक महत्वपूर्ण कारक होगी, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि शिक्षकों को अत्यधिक दूरस्थ क्षेत्रों में लंबे समय तक न रहना पड़े। इससे उन शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो अपने परिवार से दूर रहकर सेवा दे रहे हैं।


बिहार में वर्तमान में लगभग 5.87 लाख शिक्षक सरकारी विद्यालयों में कार्यरत हैं। इतने बड़े स्तर पर ट्रांसफर प्रक्रिया को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए राज्य सरकार नई ट्रांसफर नीति तैयार करने जा रही है। इस नई नीति का मुख्य आधार शिक्षक-छात्र अनुपात (Teacher-Student Ratio) होगा। यानी जिस विद्यालय में जितने छात्रों के हिसाब से जितने शिक्षकों की आवश्यकता होगी, उसी आधार पर शिक्षकों का स्थानांतरण किया जाएगा।


नई व्यवस्था के तहत विद्यालयों के लिए एक “मानक मंडल” तैयार किया जाएगा, जिसमें यह तय होगा कि किसी स्कूल में कितने शिक्षक होने चाहिए। जिन स्कूलों में शिक्षकों की संख्या अधिक होगी, वहां से शिक्षकों का ट्रांसफर किया जाएगा और जहां कमी होगी, वहां उनकी पोस्टिंग की जाएगी। इससे शिक्षा व्यवस्था में संतुलन आएगा और छात्रों को बेहतर शिक्षा मिल सकेगी।


इस पूरी प्रक्रिया को लागू करने के लिए राज्य सरकार ने एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी का अध्यक्ष शिक्षा सचिव को बनाया गया है। इसके अलावा प्राथमिक शिक्षा निदेशक, कोशी प्रमंडल के क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक, बिहार शिक्षा परियोजना के अपर राज्य परियोजना निदेशक रवि शंकर सिंह और माध्यमिक शिक्षा निदेशक को सदस्य बनाया गया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक को इस कमेटी का सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है।


सरकार ने इस कमेटी को निर्देश दिया है कि वह 15 दिनों के भीतर नई ट्रांसफर नीति का ड्राफ्ट तैयार कर शिक्षा विभाग को सौंपे। इसके बाद इस नीति को लागू किया जाएगा, जिससे पूरे राज्य में शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया एक समान और पारदर्शी तरीके से हो सके।


कुल मिलाकर, टीआरई-3 शिक्षकों को अभी थोड़ा इंतजार करना होगा, लेकिन आने वाली नई नीति से उन्हें अपने गृह जिले या पसंदीदा स्थान पर पोस्टिंग मिलने की उम्मीद जरूर बढ़ गई है। इससे न केवल शिक्षकों की समस्याओं का समाधान होगा, बल्कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था भी अधिक मजबूत और संतुलित बनेगी।