ब्रेकिंग
Bihar News : बांकीपुर उपचुनाव में बड़ा आदेश! अब बिना अनुमति सभा-जुलूस किया तो होगी कार्रवाईBihar News : 35 साल पुराने विस्फोट केस में बड़ा फैसला! पूर्व सांसद सूरजभान सिंह समेत 3 आरोपित बरीBihar News: अब नहीं बचेगा कोई अपराधी! बिहार पुलिस मुख्यालय ने सभी एसपी को जारी किए सख्त निर्देशBihar Weather Today: पटना में उमस से लोग बेहाल, दरभंगा-मधुबनी समेत कई जिलों में बारिश और वज्रपात का अलर्टभोजपुर एनकाउंटर मामला: भरत तिवारी की मां 9 जुलाई से करेंगी भूख हड़ताल, परिवार ने सरकार के सामने रखीं पांच मांगेंBihar News : बांकीपुर उपचुनाव में बड़ा आदेश! अब बिना अनुमति सभा-जुलूस किया तो होगी कार्रवाईBihar News : 35 साल पुराने विस्फोट केस में बड़ा फैसला! पूर्व सांसद सूरजभान सिंह समेत 3 आरोपित बरीBihar News: अब नहीं बचेगा कोई अपराधी! बिहार पुलिस मुख्यालय ने सभी एसपी को जारी किए सख्त निर्देशBihar Weather Today: पटना में उमस से लोग बेहाल, दरभंगा-मधुबनी समेत कई जिलों में बारिश और वज्रपात का अलर्टभोजपुर एनकाउंटर मामला: भरत तिवारी की मां 9 जुलाई से करेंगी भूख हड़ताल, परिवार ने सरकार के सामने रखीं पांच मांगें

Bihar Teacher Rules : बिहार में टीईटी खत्म, अब प्राइमरी टीचर बनने के लिए बस करना होगा यह काम; सीधे मिलेगी नौकरी

बिहार सरकार ने प्रारंभिक कक्षाओं के शिक्षक बनने के लिए टीईटी परीक्षा खत्म करने का फैसला लिया है। अब शिक्षक भर्ती के लिए केवल सीटेट के आधार पर आवेदन किया जा सकेगा।

Bihar Teacher Rules : बिहार में टीईटी खत्म, अब प्राइमरी टीचर बनने के लिए बस करना होगा यह काम; सीधे मिलेगी नौकरी
Tejpratap
Tejpratap
5 मिनट

Bihar Teacher Rules : बिहार में प्रारंभिक कक्षाओं (पहली से आठवीं तक) के शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। राज्य के शिक्षा विभाग ने अंतिम रूप से निर्णय लिया है कि अब शिक्षक बनने के लिए राज्य स्तरीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) आयोजित नहीं की जाएगी। इसके बजाय अभ्यर्थियों को केवल केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी सीटेट के आधार पर ही शिक्षक भर्ती परीक्षा में आवेदन करने की अनुमति दी जाएगी। सीटेट परीक्षा का आयोजन Central Board of Secondary Education (CBSE) द्वारा किया जाता है।


शिक्षा विभाग ने करीब तीन वर्ष पहले ही संकेत दे दिया था कि फिलहाल टीईटी परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी, हालांकि भविष्य में इसे आयोजित करने की संभावना से इनकार नहीं किया गया था। अब विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि सीटेट के माध्यम से पर्याप्त संख्या में योग्य अभ्यर्थी उपलब्ध हो रहे हैं, इसलिए अलग से राज्य स्तरीय टीईटी आयोजित करने की जरूरत नहीं है।


बिहार में केवल दो बार हुई टीईटी परीक्षा

राज्य में टीईटी परीक्षा का आयोजन अब तक सिर्फ दो बार किया गया है। पहली बार वर्ष 2011 में और दूसरी बार वर्ष 2017 में यह परीक्षा आयोजित हुई थी। यह परीक्षा बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा आयोजित की गई थी। इस राज्य स्तरीय परीक्षा में प्राथमिक (कक्षा 1 से 5) और उच्च प्राथमिक (कक्षा 6 से 8) स्तर के शिक्षकों की योग्यता का मूल्यांकन किया जाता था। इस परीक्षा में 50 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को सफल माना जाता था।


प्राथमिक और उच्च प्राथमिक के लिए अलग पात्रता

प्राथमिक कक्षाओं (1 से 5) के लिए आयोजित पेपर-1 में वही अभ्यर्थी शामिल हो सकते थे, जिन्होंने मान्यता प्राप्त बोर्ड से कम से कम 50 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं उत्तीर्ण की हो। इसके साथ ही अभ्यर्थियों के पास शिक्षा में दो वर्षीय डिप्लोमा (डीएलएड) होना अनिवार्य था।


वहीं, कक्षा 6 से 8 तक शिक्षक बनने के लिए पेपर-2 आयोजित किया जाता था। इस स्तर के लिए अभ्यर्थियों को स्नातक के साथ दो वर्षीय डीएलएड या बीएड डिग्री होना जरूरी था। वर्ष 2017 में टीईटी परीक्षा का परिणाम जारी करते समय यह घोषणा भी की गई थी कि राज्य में हर वर्ष इस परीक्षा का आयोजन किया जाएगा, लेकिन इसके बाद परीक्षा आयोजित नहीं की गई।


सीटेट और टीईटी के सिलेबस में बड़ा अंतर

टीईटी परीक्षा बंद होने से कई अभ्यर्थियों को नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। दरअसल, टीईटी का सिलेबस राज्य के पाठ्यक्रम पर आधारित था, जिसे SCERT तैयार करता था। इसमें बिहार के मैट्रिक और इंटरमीडिएट स्तर के पाठ्यक्रम से जुड़े विषय शामिल होते थे।


इसके विपरीत सीटेट का सिलेबस राष्ट्रीय स्तर का होता है और इसे NCERT के पाठ्यक्रम के आधार पर तैयार किया जाता है। यही कारण है कि कई अभ्यर्थी सीटेट को टीईटी की तुलना में अधिक कठिन मानते हैं। टीईटी में राज्य से जुड़े प्रश्नों का अधिक महत्व होता था, जबकि सीटेट का दायरा पूरे देश से संबंधित विषयों को शामिल करता है।


क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर भी चिंता

टीईटी परीक्षा में बिहार की क्षेत्रीय भाषाओं जैसे भोजपुरी, अंगिका और मगही से संबंधित विषयों को शामिल किया जाता था, लेकिन सीटेट में इन भाषाओं की परीक्षा नहीं होती है। हालांकि हाल ही में मैथिली भाषा को सीटेट में शामिल करने का निर्णय लिया गया है, जिससे मैथिली भाषा के अभ्यर्थियों को अवसर मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।


सीटेट परीक्षा का पैटर्न

सीटेट परीक्षा कुल 150 अंकों की होती है, जिसमें 150 प्रश्न पूछे जाते हैं। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को परीक्षा में सफल होने के लिए न्यूनतम 90 अंक लाना अनिवार्य होता है। वहीं अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और दिव्यांग वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 55 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए हैं। पहले बिहार टीईटी में सामान्य वर्ग की छात्राओं को 55 प्रतिशत यानी 82 अंक पर भी सफल घोषित किया जाता था।


शिक्षा विभाग के इस नए फैसले से भर्ती प्रक्रिया को सरल बनाने की कोशिश जरूर की गई है, लेकिन राज्य के कई अभ्यर्थियों के लिए यह निर्णय नई चुनौतियां भी लेकर आया है। अब आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस व्यवस्था से शिक्षक भर्ती प्रक्रिया कितनी प्रभावी बन पाती है।