1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mon, 16 Feb 2026 08:15:01 AM IST
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Bihar Budget 2026 : बिहार सरकार द्वारा रोजगार और सरकारी नौकरियों के अवसर बढ़ाने की नीति का असर अब सरकारी खजाने पर साफ दिखाई देने लगा है। हाल ही में बजट सत्र के दौरान वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए सरकार ने बताया कि सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को वेतन देने में भारी राशि खर्च करनी पड़ रही है। आंकड़ों के अनुसार, अगले वित्तीय वर्ष में वेतन मद में करीब 70 हजार 220 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जो अब तक का सबसे बड़ा वेतन बजट माना जा रहा है।
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि 20 वर्ष पहले वित्तीय वर्ष 2005-06 में राज्य सरकार के बजट में वेतन मद पर केवल 5152 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इसके बाद लगातार सरकारी भर्तियों और वेतन संरचना में बदलाव के कारण यह खर्च तेजी से बढ़ता गया। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह राशि बढ़कर 51 हजार 690 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है, जबकि आगामी वर्ष 2026-27 में यह 70 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंचने का अनुमान है। उल्लेखनीय है कि इस वेतन मद में पेंशन खर्च को शामिल नहीं किया गया है।
पेंशन मद में भी खर्च तेजी से बढ़ा है। मौजूदा बजट में पेंशन पर करीब 35 हजार 170 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जो वेतन मद की लगभग आधी राशि के बराबर है। वर्ष 2005-06 में पेंशन का बजट केवल 2456 करोड़ रुपये था। इस तरह पेंशन व्यय में भी पिछले दो दशकों में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कर्मचारियों की बढ़ती संख्या और सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभों के कारण पेंशन खर्च में लगातार इजाफा हो रहा है।
सरकार द्वारा विभिन्न विभागों में बड़े पैमाने पर की गई बहाली को वेतन और पेंशन खर्च बढ़ने का मुख्य कारण माना जा रहा है। शिक्षा, पुलिस और स्वास्थ्य जैसे प्रमुख विभागों में हजारों पदों पर नियुक्तियां की गई हैं। इसके चलते वर्तमान समय में राज्य में सरकारी कर्मियों की संख्या बढ़कर लगभग 9 लाख 50 हजार हो गई है, जबकि करीब 20 वर्ष पहले यह संख्या लगभग 3 लाख 50 हजार थी। यानी सरकारी कर्मियों की संख्या में तीन गुना से अधिक वृद्धि हुई है।
पिछले दो वर्षों में ही राज्य में शिक्षक, सिपाही और अन्य पदों को मिलाकर करीब 2 लाख से अधिक नियुक्तियां की गई हैं। राज्य सरकार आने वाले पांच वर्षों में 10 लाख सरकारी नौकरी देने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके अलावा सरकार ने एक करोड़ से अधिक रोजगार सृजित करने का भी लक्ष्य तय किया है। हालांकि रोजगार के अवसर बढ़ाने से युवाओं को फायदा मिल रहा है, लेकिन दूसरी ओर राज्य के वित्तीय प्रबंधन पर दबाव बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।
वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भर्ती की रफ्तार इसी तरह जारी रही तो वर्ष 2030 तक वेतन और पेंशन पर होने वाला खर्च कई गुना बढ़ सकता है। ऐसे में सरकार को विकास योजनाओं और राजस्व संतुलन के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।