MDM scheme : पकड़ा गया बड़का खेल ! 250 ग्राम तेल और 4 प्याज में 'गुरु जी' बनवा रहे थे 100 बच्चों का खाना, थाली से अंडे भी गायब; अब भरना होगा लाखों का जुर्माना

सीतामढ़ी के स्कूल में मिड-डे मील योजना में भारी अनियमितता, प्रधानाचार्य पर 3,07,485 रुपये का आर्थिक दंड, बच्चों को पर्याप्त भोजन नहीं मिल रहा था।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mon, 16 Feb 2026 02:07:57 PM IST

MDM scheme :  पकड़ा गया बड़का खेल ! 250 ग्राम तेल और 4 प्याज में 'गुरु जी' बनवा रहे थे 100 बच्चों का खाना, थाली से अंडे भी गायब; अब भरना होगा लाखों का जुर्माना

- फ़ोटो

MDM scheme : सीतामढ़ी जिले के परिहार प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय सिरसिया बाजार उत्तर में मिड-डे मील (एमडीएम) योजना में गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ कि लगभग 100 बच्चों के लिए प्रतिदिन केवल 4 प्याज और 250 ग्राम सरसों तेल का उपयोग किया जा रहा था। इससे बच्चों को पर्याप्त और पौष्टिक भोजन नहीं मिल रहा था। इसके अलावा, बच्चों की उपस्थिति में भी हेरफेर किया गया। 29 जनवरी को 469 बच्चों की हाजिरी दर्ज थी, जबकि अगले दिन 30 जनवरी को एमडीएम में केवल 76 बच्चे उपस्थित दिखाए गए।


जांच के दौरान यह भी पता चला कि शुक्रवार को अंडे वितरण नहीं किए गए। निरीक्षण के समय प्रधानाचार्य मणिपाल विद्यालय में मौजूद नहीं थे। उनका कहना था कि वे फल लाने गए थे। वहीं, कई सातवीं और आठवीं कक्षा के छात्र मध्यांतर में घर चले जाते थे क्योंकि स्कूल का गेट खुला छोड़ दिया जाता था, जिससे बच्चे भोजन किए बिना लौट जाते थे।


जांच प्रखंड साधन सेवी नौशाद द्वारा 30 जनवरी 2026 को की गई थी। बच्चों ने स्वयं बताया कि उन्हें पर्याप्त और स्वादिष्ट भोजन नहीं मिलता। साथ ही, एमडीएम पंजी भी अद्यतन नहीं था, जिससे अनियमितताओं पर संदेह और बढ़ गया।


इस पूरे मामले में दोषी पाए जाने पर विभाग ने प्रधानाचार्य मणिपाल पर 3,07,485 रुपये का आर्थिक दंड लगाया है। संबंधित अधिकारी ने निर्देश दिया है कि यदि यह राशि खाते में जमा नहीं की जाती है, तो वेतन से वसूली की जाएगी।


मध्याह्न भोजन विभाग के डीपीओ मनीष कुमार सिंह ने बताया कि निरीक्षण के दौरान गड़बड़ी पाई गई थी और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि ऐसे मामले लगातार जिले से आ रहे हैं और दोषी स्कूलों एवं प्रधानाचार्यों को चिन्हित कर कार्रवाई की जा रही है।


विशेषज्ञों और अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की लापरवाहियों से न केवल सरकारी धन का नुकसान होता है, बल्कि बच्चों के पोषण और उनके अधिकारों का हनन भी होता है। विभागीय कार्रवाई के बावजूद सवाल उठ रहे हैं कि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं पर किस प्रकार रोक लगाई जाएगी।


शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रकार के मामलों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण भोजन सुनिश्चित किया जा सके। इस घटना ने एमडीएम योजना की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और यह स्पष्ट किया कि बच्चों के पोषण पर किसी भी प्रकार की समझौता स्वीकार्य नहीं है।