1st Bihar Published by: First Bihar Updated Apr 18, 2025, 6:25:16 PM
प्रतीकात्मक तस्वीर - फ़ोटो Google
Bihar News : बिहार के विकास की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। राज्य का पहला छह लेन पुल, जो मोकामा के औंटा को बेगूसराय के सिमरिया से जोड़ता है, अब पूरी तरह से तैयार हो चुका है। अनुमान है कि अगले सप्ताह से इस पुल पर आवागमन शुरू हो जाएगा। गंगा नदी पर बना यह अत्याधुनिक पुल उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा।
₹1740 करोड़ की लागत से तैयार, 8.15 किलोमीटर लंबा पुल
इस मेगा प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 8.15 किलोमीटर है, जिसमें 1.865 किलोमीटर मुख्य पुल और शेष संपर्क मार्ग शामिल हैं। ₹1740 करोड़ की लागत से निर्मित इस पुल से हजारों यात्रियों को रोजाना राहत मिलेगी। संपर्क मार्गों में तीन किलोमीटर फोरलेन और 3.285 किलोमीटर छह लेन की सड़क बनाई गई है।
शुरू में तीन लेन से होगा संचालन
हालांकि रेलवे ओवरब्रिज के एक हिस्से में अभी कार्य शेष है, लेकिन प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि 31 मई तक यह कार्य भी पूरा कर लिया जाएगा। तब तक आवागमन अस्थायी रूप से तीन लेन से किया जाएगा।
रेलवे ओवरब्रिज, अंडरब्रिज और वेक्यूलर अंडरपास का निर्माण
इस परियोजना के तहत छह लेन का रेलवे ओवरब्रिज (ROB), दो रेलवे अंडरब्रिज (RUB) और छह वेक्यूलर अंडरब्रिज (VUB) का भी निर्माण किया गया है, जो निर्बाध यातायात सुनिश्चित करेंगे। औंटा और हाथीदह क्षेत्र में RUB बनाए गए हैं।
पटना-मोकामा ग्रीनफील्ड फोरलेन से खूबसूरत जुड़ाव
यह पुल पटना-मोकामा ग्रीनफील्ड फोरलेन से भी जुड़ता है। यहां पर एक गोलंबर (रोटरी) का निर्माण किया गया है, जो यात्रियों को अलग-अलग दिशाओं में जाने के लिए सुगमता प्रदान करेगा।
राजेंद्र सेतु का विकल्प बनेगा नया पुल
अब तक लोग पुराने और जर्जर राजेंद्र सेतु के सहारे यात्रा करने को मजबूर थे, जहां घंटों जाम लगना आम बात थी। नया छह लेन पुल इस समस्या का स्थायी समाधान बनेगा और लोगों को समय व ईंधन दोनों की बचत होगी।
आर्थिक और सामाजिक विकास को मिलेगी रफ्तार
इस पुल के शुरू होने से कृषि, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। साथ ही, पटना और बेगूसराय जैसे औद्योगिक क्षेत्रों के बीच तेज यातायात से राज्य में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
बिहार के लिए बदलती तस्वीर
यह पुल न केवल एक निर्माण परियोजना है, बल्कि यह बिहार के भविष्य को नई दिशा देने वाला इंफ्रास्ट्रक्चर है। यह उत्तर और दक्षिण बिहार को भौगोलिक ही नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक रूप से भी जोड़ने का काम करेगा।